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डीएम भी नहीं दिला पाए किसानों को राहत
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:53 AM IST
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रुड़की। डीएम के आदेश भी किसानों को राहत नहीं दे पाए है। डीएम दीपक रावत ने करीब एक पखवाड़े पहले शुगर मिलों और किसानों की संयुक्त बैठक में किसानों को राहत देने के लिए कई आदेश जारी किए थे, लेकिन डीएम साहब के ये आदेश भी हवाई साबित हो रहे है।
किसान बाहरी गन्ने और घटतौली समेत कई शिकायतें महीनों से विभागीय अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से कर रहे थे, लेकिन इन शिकायतों पर अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे थे। जिसके चलते किसानों ने काफी उम्मीदों के साथ डीएम दीपक रावत से कार्रवाई की गुहार लगाई थी। डीएम ने भी किसानों की समस्याओं पर गौर करते हुए 22 नवंबर को रुड़की तहसील में किसान नेताओं, मिल अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों की संयुक्त बैठक की थी। जिसके चलते डीएम ने किसानों को राहत देते हुए कई वादे किए थे और जांच बैठाई थी। जिसमें मिलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, बाट माप विभाग से तौल केंद्रों की जांच कराने, बाहरी गन्ने को बढ़ावा देने वालों की जांच कराने, लक्सर और ज्वालापुर समिति के चेयरमैनों की जांच कराने के आदेश दिए थे, लेकिन डीएम साहब के इन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। करीब एक पखवाड़े का समय गुजर जाने के बाद एक-दो दावों को छोड़कर न तो बाहरी गन्ने को लेकर जांच-पड़ताल होती नजर आ रही है और न ही शुगरमिलों में सीसीटीवी कैमरे आदि लगाए गए है। बाट माप तौल विभाग तो मैदान में नजर तक नहीं आया है। जिसके चलते डीएम के दावे सिर्फ हवाई साबित हुए है।
दो प्रजातियों का बकाया भुगतान हुआ जारी
डीएम दीपक रावत ने बैठक में लक्सर शुगर मिल के अधिकारियों को दो प्रजातियों का बकाया जारी करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद शुगर मिल के अधिकारियों ने भुगतान तो जारी कर दिया, लेकिन भुगतान उस समय जारी किया गया जब किसानों ने भुगतान को लेकर समिति पर ताला डाल दिया था। यहां भी आदेश का कोई खासा फर्क देखने को नहीं मिला।
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किसान बाहरी गन्ने और घटतौली समेत कई शिकायतें महीनों से विभागीय अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से कर रहे थे, लेकिन इन शिकायतों पर अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे थे। जिसके चलते किसानों ने काफी उम्मीदों के साथ डीएम दीपक रावत से कार्रवाई की गुहार लगाई थी। डीएम ने भी किसानों की समस्याओं पर गौर करते हुए 22 नवंबर को रुड़की तहसील में किसान नेताओं, मिल अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों की संयुक्त बैठक की थी। जिसके चलते डीएम ने किसानों को राहत देते हुए कई वादे किए थे और जांच बैठाई थी। जिसमें मिलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, बाट माप विभाग से तौल केंद्रों की जांच कराने, बाहरी गन्ने को बढ़ावा देने वालों की जांच कराने, लक्सर और ज्वालापुर समिति के चेयरमैनों की जांच कराने के आदेश दिए थे, लेकिन डीएम साहब के इन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। करीब एक पखवाड़े का समय गुजर जाने के बाद एक-दो दावों को छोड़कर न तो बाहरी गन्ने को लेकर जांच-पड़ताल होती नजर आ रही है और न ही शुगरमिलों में सीसीटीवी कैमरे आदि लगाए गए है। बाट माप तौल विभाग तो मैदान में नजर तक नहीं आया है। जिसके चलते डीएम के दावे सिर्फ हवाई साबित हुए है।
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दो प्रजातियों का बकाया भुगतान हुआ जारी
डीएम दीपक रावत ने बैठक में लक्सर शुगर मिल के अधिकारियों को दो प्रजातियों का बकाया जारी करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद शुगर मिल के अधिकारियों ने भुगतान तो जारी कर दिया, लेकिन भुगतान उस समय जारी किया गया जब किसानों ने भुगतान को लेकर समिति पर ताला डाल दिया था। यहां भी आदेश का कोई खासा फर्क देखने को नहीं मिला।
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