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ऊर्जा निगम की लापरवाही से खाक हो रहीं फसल
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:13 AM IST
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रुड़की। ऊर्जा निगम की लापरवाही से देहात क्षेत्र में फसलें जलकर राख हो रही हैं। एक माह में 17 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। हालत यह है कि जर्जर हो चुकी हाईटेंशन लाइनों और झूल रहे तारों के टकराने से चिंगारी से फसलें चंद मिनटों में जल जा रही हैं। घटना के बाद पीड़ित ऊर्जा निगम, राजस्व और विद्युत सुरक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं बावजूद पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलता। अप्रैल में ही मंगलौर में दो, बुग्गावाला में दो, भगवानपुर में तीन, झबरेड़ा में चार, लक्सर में चार, कलियर में दो जगह आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। घटना के बाद न ऊर्जा निगम इन जर्जर लाइनों को बदलवा रहा है और न आग से बचाव के उपाय कर रहा है। विद्युत सुरक्षा विभाग भी खेतों में लग रही आग की घटनाओं के लिए ऊर्जा निगम को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
इन घटनाओं से किसानों पर मार
लक्सर।
>> 15 अप्रैल : रामपुर रायघटी गांव में हाईटेंशन लाइन की चिंगारी से वीरसिंह, राजकुमार, जगवीर की 30 बीघा गेहूं का खेत जला।
>> 16 अप्रैल: सुल्तानपुर निवासी लाला की तीन बीघा गेहूं की फसल जली।
>> 19 अप्रैल: को पीतपुर में सुरेशपाल, राधा, रमेश, जयपाल, बलराम, सुमित्रा, प्रीतम, सुदेश, कुलविंदर, मदन और पुष्पा की 30 बीघा गेहूं का खेत जला।
>> 15 अप्रैल :गोवर्धनपुर गांव में झूल रहे हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से डंपर में आग लगी।
मंगलौर
>> 16 अप्रैल: थीथकी गांव में हाईटेंशन लाइन की चिंगारी से खेत में लगी आग।
>> 26 अप्रैल: पीरपुरा गांव में सात बीघा खेत जलकर हुआ राख।
बुग्गावाला
>> 18 अप्रैल: तीन बीघे गेहूं के खेत में लगी आग।
चुड़ियाला
>> खेलपुर गांव में 25 बीघा गेहूं का खेत जला।
<< फकरेड़ी में चिंगारी से 30 बीघा गेहूं का खेत जला।
भगवानपुर
>> मंडावर में छह बीघा गेहूं का खेत जलकर राख।
>> सरठेडी गांव में तीन बीघा गेहूं का खेत जला।
>> करौंदी में छह बीघा गेहूं का खेत जलकर राख।
झबरेड़ा
>> 25 अप्रैल: खाताखेड़ी में गेहूं का खेत जला।
>> रहीमपुर में गेहूं का खेत जला।
>> झबरेड़ा-मंगलौर मार्ग पर गेहूं का खेत जला।
>> सडौली गांव में गेहूं का खेत जला।
हवा चलते ही कांप जाती है किसानों की रुह
तेज हवाएं चलने से हाईटेंशन लाइनों के टकराने से निकली चिंगारियों से खेतों में आग लग रही हैं। चंद मिनटों में कई-कई बीघा गेहूं का खेत जल जा रहा है। किसान जब तक आग बुझाने की कोशिश करता है तब तक हवा के साथ आग की लपटें और तेज हो जाती हैं और किसान मूकदर्शक बनकर रह जाता है।
अग्निशमन केंद्रों को लेकर गंभीर नहीं सरकार
रुड़की/लक्सर/भगवानपुर। अग्निशमन केंद्रों को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। प्रस्ताव भेजने के बाद केंद्र स्थापित करने के लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। हालत यह है कि कहीं-कहीं केंद्र तहसील भवन में संचालित हो रहे हैं। जिसकी वजह से दूरस्थ क्षेत्रों में आग बुझाने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
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लक्सर में तहसील भवन में फायर बिग्रेड का कार्यालय संचालित हो रहा है। जबकि यहां कई फैक्ट्रियां हैं। ऐसे में किसी बड़े अग्निकांड होने पर हरिद्वार और रुड़की से फायर बिग्रेड के वाहन मंगाने पड़ते हैं। भगवानपुर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के बाद भी यहां अग्निशमन केंद्र का निर्माण नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि छह माह पूर्व अग्निशमन केंद्र के भवन निर्माण की डीपीआर शासन को भेजी गई है, लेकिन शासन की ओर केंद्र के भवन के लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं दी गई है। वर्तमान में केंद्र रुड़की की एक यूनिट भगावानपुर थाना में खड़ी रहती है। भगवानपुर में किसी बड़ी दुर्घटना होने पर पहले यह यूनिट मौके पर पहुंचती है। नारसन और मंगलौर में भी केंद्र नहीं हैं।
शहर में 10 हाईड्रेंट के भरोसे अग्नि सुरक्षा
शहर में किसी अग्नि दुर्घटना को रोकने के लिए जल संस्थान की ओर से शहर में 10 फायर हाईड्रेंट बनाए गए हैं। इनमें दुर्गा चौक, पुरानी तहसील राधा कृष्ण मंदिर, एसडी इंटर कॉलेज के पास, विश्वकर्मा चौक के पास, केएल पॉलिटेक्निक के पास, आवास विकास में पार्क के पास, बादशाह होटल के पास, सोफिया स्कूल के पास, सब्जी मंडी में ट्यूबवेल के पास है।
पूरे राज्य में आग बुझाने के लिए एक हाईड्रोलिक सीढ़ी
रुड़की। भले ही सरकार आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध होने की बात कर रहा है, लेकिन स्थिति यह है कि कहीं आग लगने पर अग्निशमन विभाग नार्मल सीढ़ी का ही प्रयोग करता है। कई बार चौथी मंजिल में लगी आग बुझाने के लिए पर्याप्त हाईड्रोलिक सीढ़ी न होने पर जैसे-तैसे आग पर काबू पाना पड़ता है। अग्निशमन विभाग के पास जो हाईड्रोलिक सीढ़ी है वह अग्निशमन केंद्र देहरादून के पास रहती है। ऐसे में यदि कहीं पर भीषण आग लगती है तो इसे बुझाने के लिए हाईड्रोलिक सीढ़ी देहरादून फायर बिग्रेड से मांगनी पड़ती है।
कोट-
अग्निशमन कार्यालय के लिए लक्सर में जमीन का आवंटन हो गया था, एक व्यक्ति ने इस भूमि को अपनी बताकर कोर्ट से स्टे ले लिया था। तब से भवन निर्माण नहीं हो पाया है। बाकी संसाधन उपलब्ध हैं।
शिशुपाल सिंह नेगी, अग्निशमन अधिकारी लक्सर
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इन घटनाओं से किसानों पर मार
लक्सर।
>> 15 अप्रैल : रामपुर रायघटी गांव में हाईटेंशन लाइन की चिंगारी से वीरसिंह, राजकुमार, जगवीर की 30 बीघा गेहूं का खेत जला।
>> 16 अप्रैल: सुल्तानपुर निवासी लाला की तीन बीघा गेहूं की फसल जली।
>> 19 अप्रैल: को पीतपुर में सुरेशपाल, राधा, रमेश, जयपाल, बलराम, सुमित्रा, प्रीतम, सुदेश, कुलविंदर, मदन और पुष्पा की 30 बीघा गेहूं का खेत जला।
>> 15 अप्रैल :गोवर्धनपुर गांव में झूल रहे हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से डंपर में आग लगी।
मंगलौर
>> 16 अप्रैल: थीथकी गांव में हाईटेंशन लाइन की चिंगारी से खेत में लगी आग।
>> 26 अप्रैल: पीरपुरा गांव में सात बीघा खेत जलकर हुआ राख।
बुग्गावाला
>> 18 अप्रैल: तीन बीघे गेहूं के खेत में लगी आग।
चुड़ियाला
>> खेलपुर गांव में 25 बीघा गेहूं का खेत जला।
<< फकरेड़ी में चिंगारी से 30 बीघा गेहूं का खेत जला।
भगवानपुर
>> मंडावर में छह बीघा गेहूं का खेत जलकर राख।
>> सरठेडी गांव में तीन बीघा गेहूं का खेत जला।
>> करौंदी में छह बीघा गेहूं का खेत जलकर राख।
झबरेड़ा
>> 25 अप्रैल: खाताखेड़ी में गेहूं का खेत जला।
>> रहीमपुर में गेहूं का खेत जला।
>> झबरेड़ा-मंगलौर मार्ग पर गेहूं का खेत जला।
>> सडौली गांव में गेहूं का खेत जला।
हवा चलते ही कांप जाती है किसानों की रुह
तेज हवाएं चलने से हाईटेंशन लाइनों के टकराने से निकली चिंगारियों से खेतों में आग लग रही हैं। चंद मिनटों में कई-कई बीघा गेहूं का खेत जल जा रहा है। किसान जब तक आग बुझाने की कोशिश करता है तब तक हवा के साथ आग की लपटें और तेज हो जाती हैं और किसान मूकदर्शक बनकर रह जाता है।
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अग्निशमन केंद्रों को लेकर गंभीर नहीं सरकार
रुड़की/लक्सर/भगवानपुर। अग्निशमन केंद्रों को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। प्रस्ताव भेजने के बाद केंद्र स्थापित करने के लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। हालत यह है कि कहीं-कहीं केंद्र तहसील भवन में संचालित हो रहे हैं। जिसकी वजह से दूरस्थ क्षेत्रों में आग बुझाने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं।
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लक्सर में तहसील भवन में फायर बिग्रेड का कार्यालय संचालित हो रहा है। जबकि यहां कई फैक्ट्रियां हैं। ऐसे में किसी बड़े अग्निकांड होने पर हरिद्वार और रुड़की से फायर बिग्रेड के वाहन मंगाने पड़ते हैं। भगवानपुर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के बाद भी यहां अग्निशमन केंद्र का निर्माण नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि छह माह पूर्व अग्निशमन केंद्र के भवन निर्माण की डीपीआर शासन को भेजी गई है, लेकिन शासन की ओर केंद्र के भवन के लिए वित्तीय स्वीकृति नहीं दी गई है। वर्तमान में केंद्र रुड़की की एक यूनिट भगावानपुर थाना में खड़ी रहती है। भगवानपुर में किसी बड़ी दुर्घटना होने पर पहले यह यूनिट मौके पर पहुंचती है। नारसन और मंगलौर में भी केंद्र नहीं हैं।
शहर में 10 हाईड्रेंट के भरोसे अग्नि सुरक्षा
शहर में किसी अग्नि दुर्घटना को रोकने के लिए जल संस्थान की ओर से शहर में 10 फायर हाईड्रेंट बनाए गए हैं। इनमें दुर्गा चौक, पुरानी तहसील राधा कृष्ण मंदिर, एसडी इंटर कॉलेज के पास, विश्वकर्मा चौक के पास, केएल पॉलिटेक्निक के पास, आवास विकास में पार्क के पास, बादशाह होटल के पास, सोफिया स्कूल के पास, सब्जी मंडी में ट्यूबवेल के पास है।
पूरे राज्य में आग बुझाने के लिए एक हाईड्रोलिक सीढ़ी
रुड़की। भले ही सरकार आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध होने की बात कर रहा है, लेकिन स्थिति यह है कि कहीं आग लगने पर अग्निशमन विभाग नार्मल सीढ़ी का ही प्रयोग करता है। कई बार चौथी मंजिल में लगी आग बुझाने के लिए पर्याप्त हाईड्रोलिक सीढ़ी न होने पर जैसे-तैसे आग पर काबू पाना पड़ता है। अग्निशमन विभाग के पास जो हाईड्रोलिक सीढ़ी है वह अग्निशमन केंद्र देहरादून के पास रहती है। ऐसे में यदि कहीं पर भीषण आग लगती है तो इसे बुझाने के लिए हाईड्रोलिक सीढ़ी देहरादून फायर बिग्रेड से मांगनी पड़ती है।
कोट-
अग्निशमन कार्यालय के लिए लक्सर में जमीन का आवंटन हो गया था, एक व्यक्ति ने इस भूमि को अपनी बताकर कोर्ट से स्टे ले लिया था। तब से भवन निर्माण नहीं हो पाया है। बाकी संसाधन उपलब्ध हैं।
शिशुपाल सिंह नेगी, अग्निशमन अधिकारी लक्सर