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प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर 16 लाख की ठगी
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रुड़की। खुद को एनजीओ संचालक बताकर एक महिला समेत पांच लोगों ने गाजियाबाद के एक प्रापर्टी डीलर से लाखों रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने पांचों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
गाजियाबाद के मुरादनगर निवासी अंकित गोयल पुत्र विजेंद्र गोयल ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वह प्रापर्टी डीलर है। वर्ष 2019 में उनके पास एक नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने बताया था कि उसका नाम अभय वीर है और वह एनजीओ संचालक है। उसे अपने एनजीओ के लिए उत्तराखंड में बिल्डिंग चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड में उनके संपर्क नहीं होने की बात कही। इसपर आरोपी ने झांसा दिया कि वह मंगलौर के पास गाधारौणा गांव में उसे बिल्डिंग सस्ते रेट पर दिलवा सकता है। उसके झांसे में आकर वह बिल्डिंग देखने आए। यहां उक्त व्यक्ति ने नूर हसन नाम के व्यक्ति को बिल्डिंग का मालिक बताते हुए उनसे मिलवाया। बिल्डिंग खरीदने के लिए एक करोड़ रुपये में सौदा तय हो गया। इसके बाद अंकित ने अपने पार्टनर को इसकी जानकारी दी। देहरादून में उनकी मीटिंग हुई। यहां पर नूर हसन और एक अन्य महिला मौजूद थी। नूर हसन ने महिला को एनजीओ संचालिका बताया था। यहां पर उसने इकरानाम लिखवा दिया और 16 लाख रुपये दे दिए। जबकि बाकी की रकम रजिस्ट्री के समय दिए जाने की बात तय हुई। आरोप है कि इस बीच उन्होंने रजिस्ट्री कराने की बाबत कई बार फोन किया, लेकिन उक्त लोगों ने बात नहीं की। बाद में उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि उक्त लोगों ने किसी दूसरे की बिल्डिंग को अपना बताते हुए फर्जी दस्तावेज दिखाए थे। पीड़ित ने सोमवार को कोतवाली पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान ने बताया कि तहरीर के आधार पर नूर हसन, अभय वीर, सपना कश्यप, जुबेर अहमद और शहजाद अहमद के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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गाजियाबाद के मुरादनगर निवासी अंकित गोयल पुत्र विजेंद्र गोयल ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वह प्रापर्टी डीलर है। वर्ष 2019 में उनके पास एक नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने बताया था कि उसका नाम अभय वीर है और वह एनजीओ संचालक है। उसे अपने एनजीओ के लिए उत्तराखंड में बिल्डिंग चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड में उनके संपर्क नहीं होने की बात कही। इसपर आरोपी ने झांसा दिया कि वह मंगलौर के पास गाधारौणा गांव में उसे बिल्डिंग सस्ते रेट पर दिलवा सकता है। उसके झांसे में आकर वह बिल्डिंग देखने आए। यहां उक्त व्यक्ति ने नूर हसन नाम के व्यक्ति को बिल्डिंग का मालिक बताते हुए उनसे मिलवाया। बिल्डिंग खरीदने के लिए एक करोड़ रुपये में सौदा तय हो गया। इसके बाद अंकित ने अपने पार्टनर को इसकी जानकारी दी। देहरादून में उनकी मीटिंग हुई। यहां पर नूर हसन और एक अन्य महिला मौजूद थी। नूर हसन ने महिला को एनजीओ संचालिका बताया था। यहां पर उसने इकरानाम लिखवा दिया और 16 लाख रुपये दे दिए। जबकि बाकी की रकम रजिस्ट्री के समय दिए जाने की बात तय हुई। आरोप है कि इस बीच उन्होंने रजिस्ट्री कराने की बाबत कई बार फोन किया, लेकिन उक्त लोगों ने बात नहीं की। बाद में उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि उक्त लोगों ने किसी दूसरे की बिल्डिंग को अपना बताते हुए फर्जी दस्तावेज दिखाए थे। पीड़ित ने सोमवार को कोतवाली पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान ने बताया कि तहरीर के आधार पर नूर हसन, अभय वीर, सपना कश्यप, जुबेर अहमद और शहजाद अहमद के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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