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टेंपो में हिचकोले खा रही चालीस गांव की 50 हजार आबादी
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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की/झबरेड़ा
नगर पंचायत झबरेड़ा और आसपास के करीब 40 गांव की करीब 50 हजार की आबादी टेंपो में हिचकोले खाने को मजबूर है। इस रूट पर फिलहाल रोडवेज और निजी बसों की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के लोगों को निजी संसाधनों के अलावा टेंपो का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र की समस्या के समाधान के लिए कोई जनप्रतिनिधि और अधिकारी नजर नहीं आ रहा है।
झबरेड़ा क्षेत्र पयर्टन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस क्षेत्र के कुंजा बहादरपुर गांव के आजादी की लड़ाई में विशेष योगदान दिया था। इसलिए प्रदेश सरकार ने कुंजा बहादरपुर गांव को पयर्टनस्थल का दर्जा दिया। सरकार ने करीब तीन वर्ष पहले इस रूट पर रोडवेज की कुछ बसों का संचालन शुरू कराया था। क्षेत्रीय ग्रमीण राजपाल, अनिल कुमार, बिजेंद्र, पवन कुमार, लियाकत, सतीश कुमार, राजीव कुमार, संजय कुमार, पहल सिंह आदि का कहना है कि पिछले छह माह से यह बसें भी क्षेत्र में नहीं जा रही है। लोगों को रुड़की तक का सफर निजी संसाधनों से ही करना पड़ रहा है। इसके अलावा यदि किसी के पास यातायात का अपना साधन नहीं है, तो वह एकमात्र साधन टेंपो पर आश्रित है। कई बार यात्रियों को टेंपो के इंतजार में घंटों खड़े होना पड़ता है। क्षेत्र में यातायात की सुविधा को बेहतर करने के लिए ग्रामीण कई बार आवाज उठा चुके है। लेकिन, सरकार और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में रोष पनप रहा है।
ये गांव हो रहे प्रभावित
सुसाड़ा, सुसाड़ी, भोकलपुर, लखनौता, शेरपुर खेलमऊ, मखमूदपुर, कोटवाल आलम, सढ़ौली, भगतोवाली, झबरेड़ा, साबतवाली, खजूरी, मानकपुर, खुंडेवाली, डेलना, माजरा, बेहड़ेकी सैदाबाद, मुलेवाला, देवपुर, इकबालपुर, जहाजगढ़, नन्हेड़ा अंनतपुर, खाताखेड़ी, कुंजा बहादरबाद, सुनहेटी, मोलना, बिंडू खड़क, बालूपुर आदि।
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हरिद्वार से कुछ बसों का संचालन हो रहा है। फिलहाल चारधाम यात्रा के कारण बसों का संचालन प्रभावित है। शायद हरिद्वार की बसों का संचालन नहीं हो पा रहा होगा।
- रामलाल पैन्यूली, एजीएम, रुड़की
हरिद्वार डिपो से एक बस का संचालन सुबह किया जा रहा है। इस रूट पर यात्रियों की कमी है।
आलोक बनवाल, एजीएम, जेएनएनयूआरएम हरिद्वार
एक साल पहले 36 बसों के आदेश कराए थे, लेकिन पर्याप्त मात्रा में सवारी नहीं मिलने के कारण बसें कम होती गई। झबरेड़ा क्षेत्र में बस अड्डा प्रस्तावित है। जिसे जल्द ही बनवाया जाएगा। इसके बाद बसें रुकेंगी भी और सही तरीके से संचालित भी होंगी। इसके अलावा कस्बे में अस्पताल के उच्चीकरण और मिनी स्टेडियम के निर्माण का काम भी पूरा कराया जाएगा।
--देशराज कर्णवाल, विधायक झबरेड़ा
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नगर पंचायत झबरेड़ा और आसपास के करीब 40 गांव की करीब 50 हजार की आबादी टेंपो में हिचकोले खाने को मजबूर है। इस रूट पर फिलहाल रोडवेज और निजी बसों की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के लोगों को निजी संसाधनों के अलावा टेंपो का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र की समस्या के समाधान के लिए कोई जनप्रतिनिधि और अधिकारी नजर नहीं आ रहा है।
झबरेड़ा क्षेत्र पयर्टन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस क्षेत्र के कुंजा बहादरपुर गांव के आजादी की लड़ाई में विशेष योगदान दिया था। इसलिए प्रदेश सरकार ने कुंजा बहादरपुर गांव को पयर्टनस्थल का दर्जा दिया। सरकार ने करीब तीन वर्ष पहले इस रूट पर रोडवेज की कुछ बसों का संचालन शुरू कराया था। क्षेत्रीय ग्रमीण राजपाल, अनिल कुमार, बिजेंद्र, पवन कुमार, लियाकत, सतीश कुमार, राजीव कुमार, संजय कुमार, पहल सिंह आदि का कहना है कि पिछले छह माह से यह बसें भी क्षेत्र में नहीं जा रही है। लोगों को रुड़की तक का सफर निजी संसाधनों से ही करना पड़ रहा है। इसके अलावा यदि किसी के पास यातायात का अपना साधन नहीं है, तो वह एकमात्र साधन टेंपो पर आश्रित है। कई बार यात्रियों को टेंपो के इंतजार में घंटों खड़े होना पड़ता है। क्षेत्र में यातायात की सुविधा को बेहतर करने के लिए ग्रामीण कई बार आवाज उठा चुके है। लेकिन, सरकार और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में रोष पनप रहा है।
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ये गांव हो रहे प्रभावित
सुसाड़ा, सुसाड़ी, भोकलपुर, लखनौता, शेरपुर खेलमऊ, मखमूदपुर, कोटवाल आलम, सढ़ौली, भगतोवाली, झबरेड़ा, साबतवाली, खजूरी, मानकपुर, खुंडेवाली, डेलना, माजरा, बेहड़ेकी सैदाबाद, मुलेवाला, देवपुर, इकबालपुर, जहाजगढ़, नन्हेड़ा अंनतपुर, खाताखेड़ी, कुंजा बहादरबाद, सुनहेटी, मोलना, बिंडू खड़क, बालूपुर आदि।
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हरिद्वार से कुछ बसों का संचालन हो रहा है। फिलहाल चारधाम यात्रा के कारण बसों का संचालन प्रभावित है। शायद हरिद्वार की बसों का संचालन नहीं हो पा रहा होगा।
- रामलाल पैन्यूली, एजीएम, रुड़की
हरिद्वार डिपो से एक बस का संचालन सुबह किया जा रहा है। इस रूट पर यात्रियों की कमी है।
आलोक बनवाल, एजीएम, जेएनएनयूआरएम हरिद्वार
एक साल पहले 36 बसों के आदेश कराए थे, लेकिन पर्याप्त मात्रा में सवारी नहीं मिलने के कारण बसें कम होती गई। झबरेड़ा क्षेत्र में बस अड्डा प्रस्तावित है। जिसे जल्द ही बनवाया जाएगा। इसके बाद बसें रुकेंगी भी और सही तरीके से संचालित भी होंगी। इसके अलावा कस्बे में अस्पताल के उच्चीकरण और मिनी स्टेडियम के निर्माण का काम भी पूरा कराया जाएगा।
--देशराज कर्णवाल, विधायक झबरेड़ा