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युवा पीढ़ी प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन कर ज्ञान अर्जन करें: श्रीवास्तव
Updated Wed, 18 Jul 2018 10:16 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। सीबीआरआई में जिज्ञासा विद्यार्थी-वैज्ञानिक संयोजन कार्यक्रम के तहत केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि केंद्रीय विद्यालय संगठन देहरादून के उपायुक्त सोमित श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथ समृद्धशाली है। युवा पीढ़ी को इन ग्रंथों का अध्ययन कर इनसे ज्ञान अर्जन करना चाहिए।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को भवन निर्माण सामग्रियों, संरचनाओं के स्वास्थ्य प्रबोधन तथा पुनर्वास, आपदा न्यूनीकरण, अग्नि सुरक्षा, ऊर्जा दक्ष ग्रामीण तथा शहरी आवास आदि के संबंध में नई तकनीकी जानकारी देना था। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत गीत, दीप प्रज्ज्वलन स हुआ। कार्यक्रम समन्वयक डा. अतुल अग्रवाल ने मुख्य अतिथि सोमित श्रीवास्वत को तुलसी का पौधा भेंट करने के साथ ही तुलसी के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व के बारे में बताया। मुख्य अतिथि सोमित श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय ग्रंथों और उपनिषदों का अध्ययन कर ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित किया।
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अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान के निदेशक डा. एन गोपालकृष्णन ने छात्रों को तनाव मुक्त होकर पढ़ने के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि हमें क्या, क्यों और कैसे जानने की प्रवृत्ति रखनी चाहिए। यही सीखने का प्रथम चरण है। इस दौरान छात्रों ने विज्ञान गीत और डिजिटल इंडिया पर नाटिका भी प्रस्तुत की। इस अवसर पर सीएसआईआर-सीबीआरआई की द्विभाषी त्रैमासिक पत्रिका भवनिका के नए अंक का विमोचन भी किया गया। वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डा. एलपी सिंह ने धन्यवाद प्रस्तुत किया। मुख्य वैज्ञानिक डा. सुवीर सिंह ने अग्नि अनुसंधान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। वैज्ञानिक डा. अतुल अग्रवाल ने छात्रों को लघु चलचित्रों से जीवन के मूल सिद्धांतों की जानकारी दी। इस दौरान लिखित प्रश्नोत्तरी में छात्रों ने विज्ञान के विभिन्न विषयों, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, सीएसआईआर, सीबीआरआई जैसे वैज्ञानिक संस्थानों के विषय में प्रश्नों के उत्तर दिए। इस दौरान डा. आभा मित्तल, विपिन त्यागी, अनीता बिष्ट एंव शिवानी चौधरी आदि वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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