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बिटिया की डोली उठाने को आगे आए ग्रामीण
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:20 AM IST
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भगवानपुर।
एक ही परिवार में तीन मौतों से जहां पूरा लव्वा गांव शोक में डूबा हुआ है। वहीं ग्रामीणों ने अपने स्तर से नीयत तिथि (30 अप्रैल) पर ही बिटिया की शादी करवाने को निर्णय लिया है। इसके लिए ससुराल पक्ष की रजामंदी भी ले ली गई है। दुख की इस घड़ी में सभी ग्रामीण पिता का फर्ज अदा करने को आगे आए हैं।
लव्वा गांव में शुक्रवार को हुए तिहरे हत्याकांड के बाद शोक में डूबे पीड़ित परिवार की मदद को शनिवार को कई ग्रामीण आगे आए। गांव के लोगों ने बेटी मानसी की शादी के लिए अपने स्तर से ससुराल पक्ष के लोगों से बातचीत की। साथ ही निश्चित तिथि पर शादी करने की बात कही। गांव के यादराम सैनी ने बताया कि 30 अप्रैल को राज सिंह की बेटी मानसी की शादी तय है। इसके लिए कार्ड भी बंट चुके हैं। उन्होंने निजी स्तर पर शादी करवाने को कुछ लोगों से बातचीत की है। ससुराल पक्ष के लोगों से पीड़ित परिवार के अलावा बिरादरी के कुछ लोगों ने भी बात की है। इसमें दोनों पक्षों में निश्चित तिथि पर जरूरी रस्में पूरी करते हुए डोली विदा करने की बात तय की। ग्रामीणों का कहना है कि मां-बाप की कमी कोई पूरा नहीं कर सकता, लेकिन वे अपना फर्ज निभाते हुए इसे पूरा करने की हरसंभव कोशिश में लगे हुए हैं। इसके अलावा आसपास के गांवों के ग्रामीणों का पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए तांता लगा हुआ है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
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एक ही परिवार में तीन मौतों से जहां पूरा लव्वा गांव शोक में डूबा हुआ है। वहीं ग्रामीणों ने अपने स्तर से नीयत तिथि (30 अप्रैल) पर ही बिटिया की शादी करवाने को निर्णय लिया है। इसके लिए ससुराल पक्ष की रजामंदी भी ले ली गई है। दुख की इस घड़ी में सभी ग्रामीण पिता का फर्ज अदा करने को आगे आए हैं।
लव्वा गांव में शुक्रवार को हुए तिहरे हत्याकांड के बाद शोक में डूबे पीड़ित परिवार की मदद को शनिवार को कई ग्रामीण आगे आए। गांव के लोगों ने बेटी मानसी की शादी के लिए अपने स्तर से ससुराल पक्ष के लोगों से बातचीत की। साथ ही निश्चित तिथि पर शादी करने की बात कही। गांव के यादराम सैनी ने बताया कि 30 अप्रैल को राज सिंह की बेटी मानसी की शादी तय है। इसके लिए कार्ड भी बंट चुके हैं। उन्होंने निजी स्तर पर शादी करवाने को कुछ लोगों से बातचीत की है। ससुराल पक्ष के लोगों से पीड़ित परिवार के अलावा बिरादरी के कुछ लोगों ने भी बात की है। इसमें दोनों पक्षों में निश्चित तिथि पर जरूरी रस्में पूरी करते हुए डोली विदा करने की बात तय की। ग्रामीणों का कहना है कि मां-बाप की कमी कोई पूरा नहीं कर सकता, लेकिन वे अपना फर्ज निभाते हुए इसे पूरा करने की हरसंभव कोशिश में लगे हुए हैं। इसके अलावा आसपास के गांवों के ग्रामीणों का पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए तांता लगा हुआ है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
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