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- मैदान के साथ ही पहाड़ में बह रही दूध की गंगा
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:24 PM IST
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मुनीश रियाल
रुड़की।
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ हरिद्वार से जुड़ी 400 समितियों से उत्पादित दूध की सप्लाई एयरफोर्स, आर्मी और सिविल क्षेत्रों में की जा रही है। इससे हरिद्वार और कोटद्वार के 10 हजार किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ हरिद्वार में कोटद्वार की 100 और हरिद्वार जिले की 300 दुग्ध समितियों पंजीकृत हैं। जिले में सात रूटों में मिल्क वैन से दूध एकत्रित किया जाता है। वहीं कोटद्वार के गांवों में बनी समितियों से भी मिल्क वैन दूध लाती है। वहां से एक हजार लीटर दूध टैंकर से शिकारपुर स्थित प्लांट में आता है। जहां चेक करने के बाद उसे पाश्चुराइज्ड कर पॉली पाउच में पैक किया जाता है। यह पाउच आंचल दूध के नाम से होता है। पाउच 500 मिलीलीटर और छह लीटर के होते हैं। उसके बाद दूध पाउचों को टैंकरों से संबंधित क्षेत्रों में भेजा जाता है।
सेना को भी सप्लाई किया जाता है दूध
दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के शिकारपुर स्थित प्लांट से बीईजी रुड़की, एयरफोर्स स्टेशन सरसावा, कमांडो ट्रेनिंग सेंटर और रिमाउंट डिपो सहारनपुर को भी दूध की सप्लाई की जाती है। लैंसडौन स्थित गढ़वाल राइफल रेजीमेंटल सेंटर मुख्यालय के साथ ही कौड़िया कैंप कोटद्वार में भी प्लांट से दूध की सप्लाई की जाती है। इसके अलावा कोटद्वार बाजार, रुड़की और हरिद्वार में दूध की आपूर्ति की जाती है। प्लांट से छह हजार लीटर दूध आर्मी को और चार हजार लीटर दूध सिविल एरिया को सप्लाई किया जाता है।
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को पशु चारे पर दी जाती है सब्सिडी
डेयरी विकास विभाग की ओर से समितियों को रियायती दर पर पशु आहार दिया जाता है। 50 किलोग्राम की बोरी 900 रुपये में दी जाती है। जिसमें दो रुपये प्रति किलोग्राम सब्सिडी दी जाती है। जबकि खुले बाजार में यह पशु आहार 1300 रुपये का है। विभाग की ओर मिल्क वैन में रखकर यह पशु चारा संबंधित किसान तक पहुंचाया जाता है।
दो डाक्टरों की है तैनाती
दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के शिकारपुर स्थित प्लांट में डेयरी विकास की ओर से दो डाक्टर तैनात हैं, जो गांवों में जाकर पशुओं में टीकाकरण करते हैं। पशुओं की ब्रीडिंग भी कराई जाती है। पशुओं के बीमार होने पर डाक्टरों की ओर से मोबाइल लेकर संबंधित गांव जाकर पशुओं का इलाज कराया जाता है।
गंगा महिला डेयरी योजना का लाभ
डेयरी विकास की ओर से महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए गंगा महिला डेयरी योजना का संचालन किया जा रहा है। 52 हजार की योजना में सरकार की ओर से 27 हजार की छूट दी जाती है। 20 हजार रुपये का लोन बैंक से कराया जाता है। पांच हजार का अंशदान महिला किसान को करना होता है। विभाग की ओर से पशु बीमा भी कराया जाता है। पशुओं की आकस्मिक मौत पर बीमा का पैसा भी मिलता है। गंगा महिला डेयरी योजना में डेयरी विकास विभाग के कार्यालय में 90 लाभार्थियों ने आवेदन जमा किए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना का लक्ष्य पूरा हो गया है।
आंचल दूध से बनता है पतंजलि का रसगुल्ला
शिकारपुर स्थित दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के प्लांट से हर रोज एक हजार लीटर दूध पतंजलि योगपीठ को सप्लाई किया जाता है। इस दूध का उपयोग पतंजलि का रसगुला बनाने में किया जाता है। वहीं हरिद्वार के सिडकुल स्थित हीरो मोटोकार्प के प्लांट में भी हर रोज एक हजार लीटर दूध की सप्लाई की जाती है।
सहकारिता विभाग और नाबार्ड दे रहा ऋण
सहकारिता विभाग की ओर से दो गायों के लिए एक लाख का ऋण दो प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाता है। वहीं नाबार्ड(राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की ओर से दो गाय खरीदने के लिए सब्सिडी युक्त ऋण दिया जाता है। दो से अधिक गाय खरीदने के लिए गांव में समिति का गठन करना होगा, चार, छह, आठ और 10 गाय खरीदने का लोन दिया जाता है।
दूध उत्पादन बढ़ाने और समितियों की संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। बेरोजगार युवाओं को भी डेयरी विकास विभाग से जोडने के प्रयास किए जा रहे हैं।- पीयूष आर्य, सहायक निदेशक, डेयरी विकास विभाग हरिद्वार
रुड़की।
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ हरिद्वार से जुड़ी 400 समितियों से उत्पादित दूध की सप्लाई एयरफोर्स, आर्मी और सिविल क्षेत्रों में की जा रही है। इससे हरिद्वार और कोटद्वार के 10 हजार किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ हरिद्वार में कोटद्वार की 100 और हरिद्वार जिले की 300 दुग्ध समितियों पंजीकृत हैं। जिले में सात रूटों में मिल्क वैन से दूध एकत्रित किया जाता है। वहीं कोटद्वार के गांवों में बनी समितियों से भी मिल्क वैन दूध लाती है। वहां से एक हजार लीटर दूध टैंकर से शिकारपुर स्थित प्लांट में आता है। जहां चेक करने के बाद उसे पाश्चुराइज्ड कर पॉली पाउच में पैक किया जाता है। यह पाउच आंचल दूध के नाम से होता है। पाउच 500 मिलीलीटर और छह लीटर के होते हैं। उसके बाद दूध पाउचों को टैंकरों से संबंधित क्षेत्रों में भेजा जाता है।
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सेना को भी सप्लाई किया जाता है दूध
दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के शिकारपुर स्थित प्लांट से बीईजी रुड़की, एयरफोर्स स्टेशन सरसावा, कमांडो ट्रेनिंग सेंटर और रिमाउंट डिपो सहारनपुर को भी दूध की सप्लाई की जाती है। लैंसडौन स्थित गढ़वाल राइफल रेजीमेंटल सेंटर मुख्यालय के साथ ही कौड़िया कैंप कोटद्वार में भी प्लांट से दूध की सप्लाई की जाती है। इसके अलावा कोटद्वार बाजार, रुड़की और हरिद्वार में दूध की आपूर्ति की जाती है। प्लांट से छह हजार लीटर दूध आर्मी को और चार हजार लीटर दूध सिविल एरिया को सप्लाई किया जाता है।
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को पशु चारे पर दी जाती है सब्सिडी
डेयरी विकास विभाग की ओर से समितियों को रियायती दर पर पशु आहार दिया जाता है। 50 किलोग्राम की बोरी 900 रुपये में दी जाती है। जिसमें दो रुपये प्रति किलोग्राम सब्सिडी दी जाती है। जबकि खुले बाजार में यह पशु आहार 1300 रुपये का है। विभाग की ओर मिल्क वैन में रखकर यह पशु चारा संबंधित किसान तक पहुंचाया जाता है।
दो डाक्टरों की है तैनाती
दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के शिकारपुर स्थित प्लांट में डेयरी विकास की ओर से दो डाक्टर तैनात हैं, जो गांवों में जाकर पशुओं में टीकाकरण करते हैं। पशुओं की ब्रीडिंग भी कराई जाती है। पशुओं के बीमार होने पर डाक्टरों की ओर से मोबाइल लेकर संबंधित गांव जाकर पशुओं का इलाज कराया जाता है।
गंगा महिला डेयरी योजना का लाभ
डेयरी विकास की ओर से महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए गंगा महिला डेयरी योजना का संचालन किया जा रहा है। 52 हजार की योजना में सरकार की ओर से 27 हजार की छूट दी जाती है। 20 हजार रुपये का लोन बैंक से कराया जाता है। पांच हजार का अंशदान महिला किसान को करना होता है। विभाग की ओर से पशु बीमा भी कराया जाता है। पशुओं की आकस्मिक मौत पर बीमा का पैसा भी मिलता है। गंगा महिला डेयरी योजना में डेयरी विकास विभाग के कार्यालय में 90 लाभार्थियों ने आवेदन जमा किए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना का लक्ष्य पूरा हो गया है।
आंचल दूध से बनता है पतंजलि का रसगुल्ला
शिकारपुर स्थित दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के प्लांट से हर रोज एक हजार लीटर दूध पतंजलि योगपीठ को सप्लाई किया जाता है। इस दूध का उपयोग पतंजलि का रसगुला बनाने में किया जाता है। वहीं हरिद्वार के सिडकुल स्थित हीरो मोटोकार्प के प्लांट में भी हर रोज एक हजार लीटर दूध की सप्लाई की जाती है।
सहकारिता विभाग और नाबार्ड दे रहा ऋण
सहकारिता विभाग की ओर से दो गायों के लिए एक लाख का ऋण दो प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दिया जाता है। वहीं नाबार्ड(राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की ओर से दो गाय खरीदने के लिए सब्सिडी युक्त ऋण दिया जाता है। दो से अधिक गाय खरीदने के लिए गांव में समिति का गठन करना होगा, चार, छह, आठ और 10 गाय खरीदने का लोन दिया जाता है।
दूध उत्पादन बढ़ाने और समितियों की संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। बेरोजगार युवाओं को भी डेयरी विकास विभाग से जोडने के प्रयास किए जा रहे हैं।- पीयूष आर्य, सहायक निदेशक, डेयरी विकास विभाग हरिद्वार