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शत प्रतिशत जीवित रहे पौधे, तैयार किया मॉडयूल
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एसडी कालेज की छात्रा रोपे गए पौधे के ट्री गार्ड पर अपना नाम लिखती हुई।
- फोटो : ROORKEE
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एसडी पीजी गर्ल्स पीजी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. किरण बाला ने पौधरोपण के बाद पौधों के संरक्षण के लिए एक खास मॉड्यूल तैयार किया है। इसके तहत वे दो साल से छात्राओं से न केवल पौध लगवा रही हैं बल्कि उनको शत प्रतिशत जीवित रखने के लक्ष्य को भी हासिल कर रही हैं।
एचएनबी गढ़वाल विवि से ‘पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर पीएचडी करने के दौरान डॉ. किरण बाला ने इस विषय पर भी चिंतन किया कि सैकड़ों पौधों को रोपे जाने के बाद भी उनमें से महज 20 प्रतिशत तक ही जीवित रह पाते हैं। उन्होंने बताया कि हर रोपे गए पौधे की सुरक्षा की शत प्रतिशत गारंटी हो, इसके लिए उन्होंने दो साल पहले कॉलेज की छात्राओं को मुहिम से जोड़ा। उन्होंने छात्राओं को पर्यावरण के लिए रोपे गए पौधे की भूमिका की गहराई समझाई और नैतिक जिम्मेदारी का बोध कराया। उन्होंने रोपे गए पौधों के चारों तरह ट्री गार्ड लगवाए और पेड़ पर नेम प्लेट लगाकर पौधा रोपने वाली छात्राओं का नाम लिखा। साथ ही उन्हीं छात्राओं को पेड़ को प्रतिदिन पानी देने समेत उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसका परिणाम यह रहा कि दो साल में 23 छात्राओं के रोपे गए सभी 15 पेड़ जीवित हैं और बढ़ रहे हैं। डॉ. किरण बाला ने बताया कि पौधे रोपने से ज्यादा जरूरी है, उनका जीवित रहना।
मॉड्यूल का यह है रूप
- छात्राओं का ओरिएटेंशन किया जाता है।
- इसके बाद इच्छुक छात्राएं स्वेच्छा से आवेदन करेंगी।
- पौधरोपण कर सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाया जाएगा।
- ट्री गार्ड पर पौधा रोपने वाली छात्रा अपना नाम लिखेंगी और देखभाल की जिम्मेदारी लेंगी।
- छात्राएं शपथपत्र भरेंगी कि वे इस पेड़ की जिम्मेदारी लेती हैं।
- पौधा रोपने वाली छात्रा को व्हाट्एप ग्रुप से जोड़ा जाएगा, हर महीने उनसे फीडबैक लिया जाएगा।
- मुहिम का नेतृत्व करने वाले पौधों की स्थिति का निरीक्षण करते हैं।
मुहिम में ये छात्राएं शामिल
स्वाति, आकांक्षा, पूजा, काजल, नेहा, वंशिका, कशिका, पारुल, रूबी, चेतना, अल्पना, हिमानी, मीनाक्षी, आशा, अर्पणा, सोनिया, रुमा, कविता, नेहा, नाजिश।
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एचएनबी गढ़वाल विवि से ‘पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर पीएचडी करने के दौरान डॉ. किरण बाला ने इस विषय पर भी चिंतन किया कि सैकड़ों पौधों को रोपे जाने के बाद भी उनमें से महज 20 प्रतिशत तक ही जीवित रह पाते हैं। उन्होंने बताया कि हर रोपे गए पौधे की सुरक्षा की शत प्रतिशत गारंटी हो, इसके लिए उन्होंने दो साल पहले कॉलेज की छात्राओं को मुहिम से जोड़ा। उन्होंने छात्राओं को पर्यावरण के लिए रोपे गए पौधे की भूमिका की गहराई समझाई और नैतिक जिम्मेदारी का बोध कराया। उन्होंने रोपे गए पौधों के चारों तरह ट्री गार्ड लगवाए और पेड़ पर नेम प्लेट लगाकर पौधा रोपने वाली छात्राओं का नाम लिखा। साथ ही उन्हीं छात्राओं को पेड़ को प्रतिदिन पानी देने समेत उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसका परिणाम यह रहा कि दो साल में 23 छात्राओं के रोपे गए सभी 15 पेड़ जीवित हैं और बढ़ रहे हैं। डॉ. किरण बाला ने बताया कि पौधे रोपने से ज्यादा जरूरी है, उनका जीवित रहना।
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मॉड्यूल का यह है रूप
- छात्राओं का ओरिएटेंशन किया जाता है।
- इसके बाद इच्छुक छात्राएं स्वेच्छा से आवेदन करेंगी।
- पौधरोपण कर सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाया जाएगा।
- ट्री गार्ड पर पौधा रोपने वाली छात्रा अपना नाम लिखेंगी और देखभाल की जिम्मेदारी लेंगी।
- छात्राएं शपथपत्र भरेंगी कि वे इस पेड़ की जिम्मेदारी लेती हैं।
- पौधा रोपने वाली छात्रा को व्हाट्एप ग्रुप से जोड़ा जाएगा, हर महीने उनसे फीडबैक लिया जाएगा।
- मुहिम का नेतृत्व करने वाले पौधों की स्थिति का निरीक्षण करते हैं।
मुहिम में ये छात्राएं शामिल
स्वाति, आकांक्षा, पूजा, काजल, नेहा, वंशिका, कशिका, पारुल, रूबी, चेतना, अल्पना, हिमानी, मीनाक्षी, आशा, अर्पणा, सोनिया, रुमा, कविता, नेहा, नाजिश।