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झबरेड़ा में 100 झंडारोहण विवादों के घेरे में
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रुड़की तहसील में झबरेड़ा पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देते सर्व दल
- फोटो : ROORKEE
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झबरेड़ा में 15 अगस्त को नगर पंचायत की ओर से किए गए 100 फीट ऊंचे झंडे का उद्घाटन दो दिन बाद विवादों के घेरे में आ गया है। शनिवार को अनुसूचित समाज के कुछ लोगों ने तहसील पहुंचकर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया है कि शिलापट्ट पर पंचायत अध्यक्ष ने अपना नाम ऊपर लिखा है, जबकि प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए मंत्री मदन कौशिक का नाम नीचे लिखा गया है। वहीं क्षेत्रीय विधायक का नाम ही शिलापट्ट से गायब है। क्षेत्रीय विधायक का नाम नहीं लिखने को लेकर उनके समर्थकों ने पंचायत अध्यक्ष पर अनुसूचित जाति विरोधी कार्य करने का भी आरोप लगाया है।
शनिवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे अजय कुमार, रेखा रानी, सुरेंद्र कुमार, नवीन कुमार आदि ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायत अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने अनुसूचित जाति विरोधी एवं प्रोटोकॉल के विरुद्ध कार्य किया है। स्वतंत्रता दिवस के दिन 100 फीट ऊंचे झंडे का उद्घाटन किया गया। इस दौरान उसके शिलापट्ट पर पंचायत अध्यक्ष ने अपना नाम ऊपर लिखा है। जबकि मंत्री मदन कौशिक का नाम नीचे लिखा गया है। वहीं झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल का नाम शिलापट्ट पर अंकित ही नहीं किया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत अध्यक्ष बैठकों की सूचनाएं न तो सभासदों को दे रहे हैं और न ही विधायक को। न ही पंचायत द्वारा बैठक का एजेंडा जारी किया जाता है। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य वित्त आयोग की धनराशि से ध्वज स्थापित किया गया है। यह ध्वज घनी आबादी में लगाया गया है। इससे किसी समय भी अनहोनी का खतरा बना हुआ है। ज्ञापन में इसकी जांच कराए जाने की मांग की गई है।
विधायक ने कहा, विधानसभा में उठाएंगे मामला
विधायक से पूछने पर उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। जानकारी जुटाई जाएगी। यदि शासनादेश का उल्लंघन कर उनके विशेषाधिकार का हनन हुआ है तो यह मामला विधानसभा में उठाया जाएगा। क्योंकि तब यह मामला पूरे उत्तराखंड के विधायकों का मामला है। शासनादेश और प्रोटोकॉल के तहत क्षेत्रीय विधायक का नाम शिलापट्ट पर आना चाहिए। यदि उन्होंने अज्ञानता वश नाम नहीं दिया है तो वे नगर पंचायत किस आधार पर चला रहे हैं। यदि नाम जानबूझकर नहीं लिखा गया है तो यह शासनादेश का उल्लंघन है। क्योंकि पदेन सदस्य की हैसियत से भी विधायक का नाम शिलापट्ट पर होना चाहिए।
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पंचायत अध्यक्ष ने कहा, विधायक ने नहीं किया सहयोग
झबरेड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष मानवेंद्र चौधरी ने इस बाबत कहा है कि शिलापट्ट पर उनका नाम छोटे आकार में हैं, जबकि मंत्री मदन कौशिक का बड़े आकार में अंकित किया गया है। विधायक देशराज कर्णवाल से जब 100 फीट ऊंचा झंडा स्थापित कराने के बाबत बात की गई तो उन्होंने कहा था कि इतना ऊंचा झंडा लगाने का क्या औचित्य है। उन्होंने इसमें किसी भी तरह के सहयोग से इंकार कर दिया था। ऐसे में उनका नाम शिलापट्ट पर कैसे दिया जाता। यदि वह सहयोग देते तो उनका भी नाम लिखवाया जाता। पंचायत की बैठकों की सूचना कई बार विधायक को दी गई है, लेकिन कई बार यह दिक्कत आती है कि उनका विधानसभा क्षेत्र में न कोई आफिस है और न ही आवास। बैठक का एजेंडा सभी सदस्यों को दिया जाता है।
आखिर क्यों विधायक और अध्यक्ष में खिंच गई तलवार
रुड़की। लोकसभा चुनाव से पहले हुए नगर पंचायत के चुनाव के दौरान झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने भी पंचायत अध्यक्ष मानवेंद्र चौधरी के भाजपा से टिकट के लिए पैरवी की थी। यही नहीं उन्होंने प्रचार में भी पूरी ताकत झोंकी थी। इस सीट पर मानवेंद्र के सामने उन्हीं के परिवार के पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह के बेटे कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे। जीत के बाद भी विधायक और पंचायत अध्यक्ष परिवार के बीच काफी प्रगाढ़ रिश्ते थे। झबरेड़ा विधायक ने ही मानवेंद्र के पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद झबरेड़ा में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम आयोजित कराया था, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी थी। लोकसभा चुनाव में हुए कार्यक्रमों में भी दोनों के बीच तल्खी देखने में आई थी। अब यह तल्खी खुलकर सामने आ गई है। वहीं दूसरी ओर, झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल पहले खानपुर विधायक के खिलाफ सामने आए थे तो अब पंचायत अध्यक्ष के सामने भी खुलकर आ गए हैं। ऐसे में अब देखना यह होगा कि हमेशा किसी न किसी प्रकरण को लेकर सुर्खियों में रहने वाले विधायक कर्णवाल की यह जंग कहा तक जाती है।ह्य
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शनिवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे अजय कुमार, रेखा रानी, सुरेंद्र कुमार, नवीन कुमार आदि ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायत अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने अनुसूचित जाति विरोधी एवं प्रोटोकॉल के विरुद्ध कार्य किया है। स्वतंत्रता दिवस के दिन 100 फीट ऊंचे झंडे का उद्घाटन किया गया। इस दौरान उसके शिलापट्ट पर पंचायत अध्यक्ष ने अपना नाम ऊपर लिखा है। जबकि मंत्री मदन कौशिक का नाम नीचे लिखा गया है। वहीं झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल का नाम शिलापट्ट पर अंकित ही नहीं किया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत अध्यक्ष बैठकों की सूचनाएं न तो सभासदों को दे रहे हैं और न ही विधायक को। न ही पंचायत द्वारा बैठक का एजेंडा जारी किया जाता है। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य वित्त आयोग की धनराशि से ध्वज स्थापित किया गया है। यह ध्वज घनी आबादी में लगाया गया है। इससे किसी समय भी अनहोनी का खतरा बना हुआ है। ज्ञापन में इसकी जांच कराए जाने की मांग की गई है।
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विधायक ने कहा, विधानसभा में उठाएंगे मामला
विधायक से पूछने पर उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। जानकारी जुटाई जाएगी। यदि शासनादेश का उल्लंघन कर उनके विशेषाधिकार का हनन हुआ है तो यह मामला विधानसभा में उठाया जाएगा। क्योंकि तब यह मामला पूरे उत्तराखंड के विधायकों का मामला है। शासनादेश और प्रोटोकॉल के तहत क्षेत्रीय विधायक का नाम शिलापट्ट पर आना चाहिए। यदि उन्होंने अज्ञानता वश नाम नहीं दिया है तो वे नगर पंचायत किस आधार पर चला रहे हैं। यदि नाम जानबूझकर नहीं लिखा गया है तो यह शासनादेश का उल्लंघन है। क्योंकि पदेन सदस्य की हैसियत से भी विधायक का नाम शिलापट्ट पर होना चाहिए।
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पंचायत अध्यक्ष ने कहा, विधायक ने नहीं किया सहयोग
झबरेड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष मानवेंद्र चौधरी ने इस बाबत कहा है कि शिलापट्ट पर उनका नाम छोटे आकार में हैं, जबकि मंत्री मदन कौशिक का बड़े आकार में अंकित किया गया है। विधायक देशराज कर्णवाल से जब 100 फीट ऊंचा झंडा स्थापित कराने के बाबत बात की गई तो उन्होंने कहा था कि इतना ऊंचा झंडा लगाने का क्या औचित्य है। उन्होंने इसमें किसी भी तरह के सहयोग से इंकार कर दिया था। ऐसे में उनका नाम शिलापट्ट पर कैसे दिया जाता। यदि वह सहयोग देते तो उनका भी नाम लिखवाया जाता। पंचायत की बैठकों की सूचना कई बार विधायक को दी गई है, लेकिन कई बार यह दिक्कत आती है कि उनका विधानसभा क्षेत्र में न कोई आफिस है और न ही आवास। बैठक का एजेंडा सभी सदस्यों को दिया जाता है।
आखिर क्यों विधायक और अध्यक्ष में खिंच गई तलवार
रुड़की। लोकसभा चुनाव से पहले हुए नगर पंचायत के चुनाव के दौरान झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने भी पंचायत अध्यक्ष मानवेंद्र चौधरी के भाजपा से टिकट के लिए पैरवी की थी। यही नहीं उन्होंने प्रचार में भी पूरी ताकत झोंकी थी। इस सीट पर मानवेंद्र के सामने उन्हीं के परिवार के पूर्व विधायक चौधरी यशवीर सिंह के बेटे कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे। जीत के बाद भी विधायक और पंचायत अध्यक्ष परिवार के बीच काफी प्रगाढ़ रिश्ते थे। झबरेड़ा विधायक ने ही मानवेंद्र के पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद झबरेड़ा में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम आयोजित कराया था, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी थी। लोकसभा चुनाव में हुए कार्यक्रमों में भी दोनों के बीच तल्खी देखने में आई थी। अब यह तल्खी खुलकर सामने आ गई है। वहीं दूसरी ओर, झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल पहले खानपुर विधायक के खिलाफ सामने आए थे तो अब पंचायत अध्यक्ष के सामने भी खुलकर आ गए हैं। ऐसे में अब देखना यह होगा कि हमेशा किसी न किसी प्रकरण को लेकर सुर्खियों में रहने वाले विधायक कर्णवाल की यह जंग कहा तक जाती है।ह्य