Roorkee News: बम धमाके को दस साल बीते पर नहीं मिल पाया तुषार को न्याय, रुड़की में पहली बार हुई थी आतंकी घटना
रुड़की में पहली बार छह दिसंबर को 2014 में आतंकी घटना हुई थी। बम विस्फोट में 11 साल के मासूम तुषार की जान चली गई थी। तुषार राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा छह में पढ़ता था।
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छह दिसंबर 2014 को हुए बम धमाके में 11 साल के मासूम तुषार की मौत हो गई थी। देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी एनआईए इस मामले की जांच कर रही है। इन 10 सालों में करीब तीन हजार से अधिक लोगों से एनआईए ने पूछताछ की लेकिन आज तक इस आतंकी घटना का खुलासा नहीं हो पाया है। तुषार को न्याय नहीं मिल पाया है। परिवार के लोग न्याय की मांग कर रहे हैं।
केएल डीएवी इंटर कॉलेज के मैदान में छह दिसंबर को शौर्य दिवस पर कार्यक्रम चल रहा था। इसमें हिंदू संगठन के बड़े नेता संगीत सोम व सुरेश राणा आदि समेत कई बड़े हिंदू नेता शामिल हुए थे। कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल में महज कुछ ही दूरी पर एक जोरदार बम धमाका हुआ जिससे अफरा-तफरी मच गई। इस धमाके की चपेट में राजकीय इंटर कॉलेज की कक्षा छह का छात्र व कृष्णानगर गली नंबर-3 निवासी तुषार धीमान आ गया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
स्कूल की छुट्टी के बाद अपने घर जा रहा था तुषार
घटना के समय वह स्कूल की छुट्टी के बाद अपने घर जा रहा था। इस आतंकी घटना से पूरा शहर हिल गया था। बम विस्फोट होने के चलते मामले की जांच का जिम्मा देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी एनआईए को सौंपा गया। एनआईए ने कई महीनों तक जांच के लिए रुड़की में ही डेरा डाले रखा। इस दौरान एनआईए ने तीन हजार से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए। हर स्तर पर पड़ताल की लेकिन आज तक भी इस आतंकी घटना का खुलासा नहीं हो पाया है।
मासूम तुषार की मौत के जिम्मेदार आज भी खुले घूम रहे हैं। तुषार को 10 साल बीतने पर भी न्याय नहीं मिल पाया। तुषार के पापा सतीश कुमार धीमान, मम्मी किरण धीमान व बड़े भाई विशाल को अभी इंसाफ का इंतजार है। उनका कहना है कि इस बम धमाके के दोषियों को जरूर पकड़ा जाना चाहिए। उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उनका पकड़ा न जाना देश के लिए एक बड़ा खतरा है।
2018 के बाद नहीं हुई कार्रवाई
तुषार के पिता सतीश कुमार धीमान ने बताया कि वर्ष 2018 तक मामले में कार्रवाई चली लेकिन उसके बाद कभी किसी ने नहीं बताया कि उनका केस कहां तक पहुंचा। उन्होंने कई बार इस संबंध में संपर्क भी करना चाहा लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया।
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तुषार की याद में बना है ‘शहीद तुषार द्वार’
तुषार को न्याय भले न मिल पाया हो लेकिन शहर के लोगों ने उन्हें बेहद सम्मान दिया। तुषार की याद में लीथोप्रेस कॉलोनी के बराबर से शास्त्रीनगर व कृष्णानगर को जाने वाले मार्ग पर एक द्वार बनाया गया है। इसका नाम शहीद तुषार द्वार रखा गया है। यही नहीं तुषार की याद में हर साल पुण्यतिथि पर कार्यक्रम भी होता है। हालांकि उस समय घोषणा की गई थी कि तुषार के परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह वादा भी प्रदेश सरकार ने आज तक पूरा नहीं किया है।