{"_id":"5f908c538ebc3e9b7d3fe4ca","slug":"village-main-road-is-bad-roads-made-in-empty-plots-rishikesh-news-drn3597949173","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला एक्सक्लूसिव : बदहाल है गांव का मुख्य मार्ग, खाली प्लाटों में बना दी सड़कें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला एक्सक्लूसिव : बदहाल है गांव का मुख्य मार्ग, खाली प्लाटों में बना दी सड़कें
Thu, 22 Oct 2020 12:16 PM IST
देहरादून ब्यूरो
विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश
विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2020 12:16 PM IST
विज्ञापन
झीलवाला (डांडी) में जिला पंचायत की ओर से खाली प्लॉटों के आगे बनाया गया सीसी मार्ग ।
- फोटो : RISHIKESH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव ऐसा भी है, जहां सड़कों का अनियोजित विकास कई सवाल खड़े कर रहा है। यहां देहरादून-ऋषिकेश हाईवे से लगती गांव की मुख्य सड़क (लंबाई करीब 2.5 किमी) बद से बत्तर स्थिति में है, जबकि इसी सड़क से लगते ऐसे कई संपर्क मार्गों को सीसी मार्ग में तब्दील कर चकाचक कर दिया गया है, जहां अभी तक कोई आबादी ही नहीं है। विकास की बानगी देखिए, इसी सड़क से लगते कुछ मामले ऐसे भी हैं, जहां सरकारी धन को खपाने के लिए लोगों के चौक-चौराहों तक को सीसी मार्ग में तबदील कर दिया गया है।
मामला न्याय पंचायत क्षेत्र रानीपोखरी की ग्रामसभा बड़कोट डांडी (झीलवाला) गांव का है। जहां कुछ प्रापर्टी डीलरों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी धन का दुरपयोग किया गया है। यहां देहरादून-ऋषिकेश हाईवे से लगती गांव की मुख्य सड़क पर कई प्रापर्टी डीलरों ने किसानों की खेती की जमीनों को औने-पौने दामों में खरीदकर प्लाट काट दिए हैं।
प्रापर्टी डीलरों को ये प्लाट बेचने में कोई दिक्कत न हो, इसलिए जिला पंचायत के तहत सरकार ने इन प्लाट तक पहुंचने के लिए फटाफट यहां सीसी मार्ग का निर्माण भी करा दिया है। यहां ऐसे एक-दो नहीं कई मामले हैं, जहां कोई आबादी अभी बसी नहीं है, लेकिन जिला पंचायत के तहत यहां करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कें बना दी गई हैं। जबकि गांव की मुख्य सड़क पिछली बार वर्ष 2007-08 में बनी थी, जो आज भी बदहाली के आंसू बहा रही है। इसके अलावा कई नए आबाद क्षेत्र ऐसे हैं, जहां सड़कें बनाने की जरूरत थी, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
सड़कें पिछले कार्यकाल की, बोर्ड पर नए सदस्य, अध्यक्ष का नाम
न्याय पंचायत क्षेत्र रानीपोखरी के बड़कोट ग्रामसभा में जिला पंचायत के तहत करीब पांच करोड़ रुपये की सड़कों का काम पिछले कार्यकाल में हुआ। लेकिन मजेदार बात यह है कि इन सड़कों के मुहाने पर नए जिला पंचायत सदस्यों और अध्यक्ष के नाम का बोर्ड चस्पा कर दिया गया है। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य का कहना है कि ये सड़कें उनके कार्यकाल में नहीं बनी हैं, किसने बनवाई हैं, उन्हें पता नहीं। इसके अलावा अधिकतर सड़कों का निर्माण पूरा होने के बावजूद यहां कोई बोर्ड नहीं लगा है, जिससे पता चल सके कि निर्माण एजेंसी कौन थी, कितने के बजट में सड़क बनी और किसने ये सड़क बनवाई।
2019 में ये सड़कें जब बन रहीं थीं, तब आचार संहिता लगी थी। ये सड़कें मेरे कार्यकाल में पास नहीं हुई हैं। वहां मेरे नाम का बोर्ड कैसे लगा है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। पहले तो खाली प्लाट में सड़क बनाई ही क्यों, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
- अनिता सेमवाल, जिला पंचायत सदस्य, बड़कोट माफी
अक्तूबर 2019 में चुनाव हुए और दिसंबर 2019 में मैंने अध्यक्ष पद की शपथ ली। जबकि ये सड़कें इससे पहले की बनी हैं। सड़कें खाली प्लाट में बना दी गई हैं तो ये गंभीर विषय है। वहां मेरे नाम का बोर्ड कैसे लगा है, यह भी जांच का विषय है। पहले मैं अपने स्तर पर इसकी जांच कराऊंगी।
- मधु चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष, देहरादून
जिला पंचायत के तहत जो भी सड़कें बनती हैं, जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर ही बनती हैं। ये जरूरी भी नहीं है कि केवल आबादी क्षेत्र में ही सड़क बनें। सड़कें कहीं भी बन सकती हैं। जहां तक कार्यकाल का सवाल है तो कई बार पूर्व सदस्यों के कार्यकाल में सड़कें पास होती हैं और अगले सदस्यों के कार्यकाल में पूरी होती हैं, इसलिए उनके नाम का बोर्ड लगा दिया जाता है। यदि उन्हें आपत्ति है तो इसे दिखवाया जा सकता है।
- राजीव कुमार त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक, पंचायती राज/अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत
विज्ञापन
मामला न्याय पंचायत क्षेत्र रानीपोखरी की ग्रामसभा बड़कोट डांडी (झीलवाला) गांव का है। जहां कुछ प्रापर्टी डीलरों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी धन का दुरपयोग किया गया है। यहां देहरादून-ऋषिकेश हाईवे से लगती गांव की मुख्य सड़क पर कई प्रापर्टी डीलरों ने किसानों की खेती की जमीनों को औने-पौने दामों में खरीदकर प्लाट काट दिए हैं।
विज्ञापन
प्रापर्टी डीलरों को ये प्लाट बेचने में कोई दिक्कत न हो, इसलिए जिला पंचायत के तहत सरकार ने इन प्लाट तक पहुंचने के लिए फटाफट यहां सीसी मार्ग का निर्माण भी करा दिया है। यहां ऐसे एक-दो नहीं कई मामले हैं, जहां कोई आबादी अभी बसी नहीं है, लेकिन जिला पंचायत के तहत यहां करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कें बना दी गई हैं। जबकि गांव की मुख्य सड़क पिछली बार वर्ष 2007-08 में बनी थी, जो आज भी बदहाली के आंसू बहा रही है। इसके अलावा कई नए आबाद क्षेत्र ऐसे हैं, जहां सड़कें बनाने की जरूरत थी, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
सड़कें पिछले कार्यकाल की, बोर्ड पर नए सदस्य, अध्यक्ष का नाम
न्याय पंचायत क्षेत्र रानीपोखरी के बड़कोट ग्रामसभा में जिला पंचायत के तहत करीब पांच करोड़ रुपये की सड़कों का काम पिछले कार्यकाल में हुआ। लेकिन मजेदार बात यह है कि इन सड़कों के मुहाने पर नए जिला पंचायत सदस्यों और अध्यक्ष के नाम का बोर्ड चस्पा कर दिया गया है। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य का कहना है कि ये सड़कें उनके कार्यकाल में नहीं बनी हैं, किसने बनवाई हैं, उन्हें पता नहीं। इसके अलावा अधिकतर सड़कों का निर्माण पूरा होने के बावजूद यहां कोई बोर्ड नहीं लगा है, जिससे पता चल सके कि निर्माण एजेंसी कौन थी, कितने के बजट में सड़क बनी और किसने ये सड़क बनवाई।
2019 में ये सड़कें जब बन रहीं थीं, तब आचार संहिता लगी थी। ये सड़कें मेरे कार्यकाल में पास नहीं हुई हैं। वहां मेरे नाम का बोर्ड कैसे लगा है, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। पहले तो खाली प्लाट में सड़क बनाई ही क्यों, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
- अनिता सेमवाल, जिला पंचायत सदस्य, बड़कोट माफी
अक्तूबर 2019 में चुनाव हुए और दिसंबर 2019 में मैंने अध्यक्ष पद की शपथ ली। जबकि ये सड़कें इससे पहले की बनी हैं। सड़कें खाली प्लाट में बना दी गई हैं तो ये गंभीर विषय है। वहां मेरे नाम का बोर्ड कैसे लगा है, यह भी जांच का विषय है। पहले मैं अपने स्तर पर इसकी जांच कराऊंगी।
- मधु चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष, देहरादून
जिला पंचायत के तहत जो भी सड़कें बनती हैं, जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर ही बनती हैं। ये जरूरी भी नहीं है कि केवल आबादी क्षेत्र में ही सड़क बनें। सड़कें कहीं भी बन सकती हैं। जहां तक कार्यकाल का सवाल है तो कई बार पूर्व सदस्यों के कार्यकाल में सड़कें पास होती हैं और अगले सदस्यों के कार्यकाल में पूरी होती हैं, इसलिए उनके नाम का बोर्ड लगा दिया जाता है। यदि उन्हें आपत्ति है तो इसे दिखवाया जा सकता है।
- राजीव कुमार त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक, पंचायती राज/अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत

झीलवाला (डांडी) का बदहाल मुख्य सड़क मार्ग ।- फोटो : RISHIKESH

झीलवाला (डांडी) में जिला पंचायत की ओर से बने सीसी मार्ग का साइनबोर्ड।- फोटो : RISHIKESH