फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Toilet condition in uttarakhand.

इनाम के लालच में बता दिए इतने 'टॉयलेट' अब खुली पोल

Tue, 22 Aug 2017 09:32 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऋषिकेश
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Tue, 22 Aug 2017 09:32 PM IST
विज्ञापन
Toilet condition in uttarakhand.
toilet

इनाम के लालच में गांव में टायलेट की संख्या तो पूरी तो बता दी गई, लेकिन जब मामले की जांच हुई तो सारी पोल खुल गई।

विज्ञापन


निर्मल ग्राम पुरस्कार की किस तरह बंदरबांट हुई, इसका अंदाजा ऋषिकेश के अंतर्गत पड़ते गांव गौहरीमाफी से लगाया जा सकता है।

 400 परिवारों के इस गांव में 2009 के दौरान 82 परिवार ऐसे थे, जिनके पास शौचालय तक नहीं थे, इसके बावजूद स्वजल विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर गांव को निर्मल ग्राम पुरस्कार दे दिया। अब जब मनरेगा के तहत गांवों में शौचालय बनाने का काम शुरू हुआ तो इसकी पोल खुलने लगी है। स्वजल परियोजना अधिकारी देहरादून ने इस मामले को उच्चाधिकारियों के ध्यान में लाने की बात कही है। 

सरकारी मानकों की मानें तो निर्मल ग्राम पुरस्कार ऐसी ग्रामसभा को दिया जाता है। जहां प्रत्येक परिवार के पास शौचालय की व्यवस्था हो। गांव में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था के साथ सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन वर्ष 2009 में ग्रामसभा गौहरी माफी को नियमों को दरकिनार कर निर्मल ग्राम घोषित कर दिया गया। 

विज्ञापन

अब प्रधान हुए आमने सामने

Toilet condition in uttarakhand.
शौचालय

जिस समय गांव को पुरस्कार दिया गया तब गांव में कच्ची सड़कें और साफ-सफाई की उचित व्यवस्था का अभाव था। बावजूद इसके स्वजल परियोजना अधिकारियों ने निर्मल ग्राम पुरस्कार की बंदर बांट कर डाली। समाजसेवी देवेंद्र सेमवाल ने कहा साल 2009 में कई परिवारों के पास शौचालय नहीं थे।

 गांव में सड़कों का बुरा हाल था। बावजूद इसके ग्रामसभा को निर्मल ग्राम पुरस्कार मिलना सवालों के घेरे में है। वहीं, वार्ड मेंबर दिगंबर गोनियाल ने कहा नियमों को ताक पर रखकर पुरस्कार दिया गया है।

मेरे चुनाव जीतने के बाद 2014 तक ग्रामसभा में 82 परिवारों के पास शौचालय नहीं थे। जिन परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं उनके शौचालय मनरेगा के तहत बना दिए गए हैं।       
सरिता रतूड़ी, मौजूदा ग्रामप्रधान गौहरी माफी        

साल 2009 से 2014 तक सभी परिवारों के शौचालय बन चुके थे। मनरेगा के तहत बनाए जा रहे शौचालय फर्जी हैं। ग्रामप्रधान मनरेगा के पैसों को ठिकाने लगी रही हैं।       
संजय पोखरियाल, पूर्व ग्राम प्रधान गौहरीमाफी       

किसी भी ग्रामसभा को निर्मल ग्राम पुरस्कार गांव में शत-प्रतिशत शौचालय होने और स्वच्छता के आधार पर दिया जाता है। हालांकि, अब 2009 के बाद निर्मल ग्राम पुरस्कार देने बंद हो गए हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।        
- सुमन कुटियाल, स्वजल परियोजना अधिकारी देहरादून    

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed