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समाज के प्रति समर्पित होता है संतों का जीवन : सर्वात्मानंद
Sun, 04 Jan 2026 07:57 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 04 Jan 2026 07:57 PM IST
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स्वतंत्र आनंद सरस्वती को श्रद्धांजलि देते गीता आश्रम के पदाधिकारी और संत। स्रोत आयोजक।
फोटो-
स्वामी स्वतंत्र आनंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर यज्ञ, कीर्तन व गीता पाठ का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। आनंद आश्रम हरिद्वार के संस्थापक स्वामी स्वतंत्र आनंद सरस्वती जी की 54वीं पुण्यतिथि स्वर्गाश्रम स्थित गीता आश्रम में अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस कार्यक्रम में यज्ञ, कीर्तन और गीता पाठ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के चरणों में अपनी भावांजलि अर्पित की।
महंत स्वामी सर्वात्मानंद सरस्वती ने कहा कि संत सदैव परोपकार एवं धर्म प्रचार के लिए अपने जीवन का संपूर्ण भाग अर्पित कर देते हैं। संतों का जीवन प्रेरणादाई और समाज के प्रति समर्पित होता है। उन्हें स्मरण करना व उनके कार्यों को आगे बढ़ना सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने अपने उत्तराधिकारी स्वामी शांतानंद को बनाया। उन्होंने अपने कार्यकाल में संस्था की गतिविधियों को आगे बढ़ाया और सेवा की भावना में निरंतर लगे रहे। श्री गीता आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन गुरु वेदव्यास आनंद ने भी गीता के प्रचार में विशेष योगदान किया। आज भी गीता आश्रम में ट्रस्ट के माध्यम से आश्रम की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है।
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ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक गुप्ता ने कहा कि संतों का स्मरण हमें प्रेरणा प्रदान करता है। हम उनके बताए मार्ग पर चलते रहे और उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें, यही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस मौके पर प्रबंधक चंद्र मित्र शुक्ला, भानु मित्र शर्मा, गीता चैतन्य, प्रमिला शाह, दया जोशी, सुलोचना लखानी, त्रिभुवन उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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स्वामी स्वतंत्र आनंद सरस्वती की पुण्यतिथि पर यज्ञ, कीर्तन व गीता पाठ का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। आनंद आश्रम हरिद्वार के संस्थापक स्वामी स्वतंत्र आनंद सरस्वती जी की 54वीं पुण्यतिथि स्वर्गाश्रम स्थित गीता आश्रम में अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस कार्यक्रम में यज्ञ, कीर्तन और गीता पाठ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के चरणों में अपनी भावांजलि अर्पित की।
महंत स्वामी सर्वात्मानंद सरस्वती ने कहा कि संत सदैव परोपकार एवं धर्म प्रचार के लिए अपने जीवन का संपूर्ण भाग अर्पित कर देते हैं। संतों का जीवन प्रेरणादाई और समाज के प्रति समर्पित होता है। उन्हें स्मरण करना व उनके कार्यों को आगे बढ़ना सच्ची श्रद्धांजलि है।
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उन्होंने अपने उत्तराधिकारी स्वामी शांतानंद को बनाया। उन्होंने अपने कार्यकाल में संस्था की गतिविधियों को आगे बढ़ाया और सेवा की भावना में निरंतर लगे रहे। श्री गीता आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन गुरु वेदव्यास आनंद ने भी गीता के प्रचार में विशेष योगदान किया। आज भी गीता आश्रम में ट्रस्ट के माध्यम से आश्रम की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है।
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ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. दीपक गुप्ता ने कहा कि संतों का स्मरण हमें प्रेरणा प्रदान करता है। हम उनके बताए मार्ग पर चलते रहे और उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें, यही सच्ची श्रद्धांजलि है। इस मौके पर प्रबंधक चंद्र मित्र शुक्ला, भानु मित्र शर्मा, गीता चैतन्य, प्रमिला शाह, दया जोशी, सुलोचना लखानी, त्रिभुवन उपाध्याय आदि मौजूद रहे।