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Rishikesh News: कुछ के सपनों पर फिरा पानी तो किसी को अच्छे दिन की उम्मीद

Sun, 15 Dec 2024 01:33 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 15 Dec 2024 01:33 AM IST
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Some have their dreams dashed and some have hope for better
नगर निगम में मेयर पद पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही शहर में चर्चाओं का बाजार गरमा गया है। आरक्षण ने लंबे समय से तैयारी कर रहे कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है। वहीं कुछ लोगों में उम्मीद की किरण भी जगाई है। ऋषिकेश में मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। यहां की कुल जनसंख्या में करीब 11 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है।
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नवंबर 2017 में ऋषिकेश नगरपालिका का सीमा विस्तार किया गया और इसमें ग्रामसभा ऋषिकेश और वीरपुर खुर्द को मिलाया गया। आठ दिसंबर, 2017 को नगर पालिका ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा मिला। नगर निगम में 20 नए वार्ड शामिल किए गए। वर्तमान में कुल वार्डों की संख्या 40 है।
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ठीक एक साल बाद दिसंबर 2018 में नगर निगम के नए बोर्ड ने महिला मेयर अनीता ममगाईं के नेतृत्व में शपथ ली। नगर निगम के पहले बोर्ड में भी सीट महिला आरक्षित की गई थी। उस दौरान मेयर पद के लिए तैयारी कर रहे अन्य पुरुष दावेदारों को उम्मीद थी कि दूसरे बोर्ड में मेयर पद सामान्य होगा। लेकिन लगातार दूसरी बार मेयर पद आरक्षित किया गया है।
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इस बार मेयर पद पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही लंबे समय से तैयारी कर रहे कई दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। दावेदार करीब एक साल से सार्वजनिक कार्यों से लेकर निजी समारोहों में सक्रिय थे। भाजपा व कांग्रेस से कई-कई दावेदार सामने आ रहे थे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी 106320 है। जिसमें अनुसूचित जाति की जनसंख्या 12643 है, जो कुल आबादी का 11.89 फीसदी है।

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पहली बार एससी के लिए मिला आरक्षण

ऋषिकेश नगर निकाय में पहली बार अनुसूचित जाति को मेयर पद पर प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। यहां एससी के लिए पहली बार आरक्षण तय हुआ है। नगर पालिका रहते हुए एक बार अध्यक्ष महिला भी रह चुकी हैंं। पहली बार मेयर पद पर भी महिला ही रही।




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अनीता ममगाईं के बाद कौन



नगर निगम में पहली मेयर अनीता ममगाईं चुनी गई। अनीता ममगाईं भाजपा से चुन कर आई थी। अब चर्चा है कि इस बार यह पद किस के खाते में जाएगा।

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अब नए समीकरण शुरू

आरक्षण की घोषणा होते ही शहर में नए राजनीतिक समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। नए दावेदारों के कयास लगाए जाने लगे हैं। भाजपा व कांग्रेस में तीन-चार दावेदारों की शहर में चर्चा है। हालांकि राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि अब इस सीट पर दोनों पार्टियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। वहीं लंबे समय से दावेदारी की तैयारी कर रहे कुछ दावेदार अभी आपत्तियों पर उम्मीद लगाए हुए हैं।
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