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Rishikesh News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह माह का सश्रम कारावास
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। न्यायालय सिविल जज जूनियर डिविजन भूपेंद्र सिंह शाह की अदालत ने शुक्रवार को चेक बाउंस के दोषी को छह माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सहारनपुर निवासी दोषी ब्रिजेश पर 1.10 लाख का अर्थदंड भी लगाया है। जिसमें से 1.5 लाख परिवादी को प्रतिकर के रूप में देय होंगे। जबकि पांच हजार रुपये जुर्माने के तौर पर राजकोष में जमा कराने होंगे। जुर्माना न भरने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
चेक बाउंस के मामले में न्यायालय ने पांच साल बाद फैसला सुनाया है। चार फरवरी 2021 को शिवाजी नगर निवासी अंकित ने न्यायालय में वाद दायर किया था। अंकित ने न्यायालय को बताया था कि ओजपुरा मैन रोड नवीन नगर सहारनपुर निवासी ब्रिजेश कुमार से उसकी पुरानी जान पहचान थी। ब्रिजेश ने सात अक्तूबर 2020 को अपने निजी कार्य के लिए उससे एक लाख रुपये उधार मांगे थे और दो माह के भीतर लौटाने की बात कही थी। दो माह बाद जब ब्रिजेश से उसने धनराशि मांगी तो ब्रिजेश ने एक लाख की धनराशि का एसबीआई सहारनपुर शाखा का चेक दिया। चेक अकाउंट में जमा कराने पर बैंक ने अपर्याप्त धनराशि कहकर चेक लौटा दिया। इसकी जानकारी ब्रिजेश को भी दी गई, बावजूद इसके ब्रिजेश ने धनराशि वापस नहीं लौटाई। जिस पर मजबूरन उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय सिविल जज जूनियर डिविजन भूपेंद्र सिंह शाह की अदालत ने ब्रिजेश को दोष सिद्ध करार दिया है।
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ऋषिकेश। न्यायालय सिविल जज जूनियर डिविजन भूपेंद्र सिंह शाह की अदालत ने शुक्रवार को चेक बाउंस के दोषी को छह माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सहारनपुर निवासी दोषी ब्रिजेश पर 1.10 लाख का अर्थदंड भी लगाया है। जिसमें से 1.5 लाख परिवादी को प्रतिकर के रूप में देय होंगे। जबकि पांच हजार रुपये जुर्माने के तौर पर राजकोष में जमा कराने होंगे। जुर्माना न भरने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
चेक बाउंस के मामले में न्यायालय ने पांच साल बाद फैसला सुनाया है। चार फरवरी 2021 को शिवाजी नगर निवासी अंकित ने न्यायालय में वाद दायर किया था। अंकित ने न्यायालय को बताया था कि ओजपुरा मैन रोड नवीन नगर सहारनपुर निवासी ब्रिजेश कुमार से उसकी पुरानी जान पहचान थी। ब्रिजेश ने सात अक्तूबर 2020 को अपने निजी कार्य के लिए उससे एक लाख रुपये उधार मांगे थे और दो माह के भीतर लौटाने की बात कही थी। दो माह बाद जब ब्रिजेश से उसने धनराशि मांगी तो ब्रिजेश ने एक लाख की धनराशि का एसबीआई सहारनपुर शाखा का चेक दिया। चेक अकाउंट में जमा कराने पर बैंक ने अपर्याप्त धनराशि कहकर चेक लौटा दिया। इसकी जानकारी ब्रिजेश को भी दी गई, बावजूद इसके ब्रिजेश ने धनराशि वापस नहीं लौटाई। जिस पर मजबूरन उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय सिविल जज जूनियर डिविजन भूपेंद्र सिंह शाह की अदालत ने ब्रिजेश को दोष सिद्ध करार दिया है।
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