{"_id":"619fe46181826851c6508f2c","slug":"sanskrit-is-the-world-s-oldest-scientific-language-rishikesh-news-drn397065513","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऋषिकेश: विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक भाषा है संस्कृत-","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऋषिकेश: विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक भाषा है संस्कृत-
Fri, 26 Nov 2021 01:00 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज डेस्क, ऋषिकेश
संवाद न्यूज डेस्क, ऋषिकेश
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 01:00 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जयराम आश्रम के ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उत्तराखंड गोष्ठी का समापन हो गया। गोष्ठी में आठ राज्यों के ग्यारह विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
बृहस्पतिवार को आयोजित गोष्ठी का उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रोफेसर प्रेमचन्द्र शास्त्री ने शुरू किया। उन्होंने कहा कि यह गोष्ठी संस्कृत विषय को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने संस्कृत में निहित वैज्ञानिकता को नई पीढ़ी तक पहुंचाये जाने पर जोर दिया। कहा संस्कृत विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक भाषा है।
आधुनिक युग के संसाधनों का प्रयोग करते हुए इसका प्रचार प्रसार विश्व पटल पर किया जाना चाहिए। अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड के निदेशक आरके कुंवर ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक विषय के राज्य की पाठ्यचर्या में ज्ञान परंपरा के अंतर्गत प्राचीन ग्रन्थों में निहित ज्ञान को पाठ्यचर्या का हिस्सा बनाये जाना चाहिए।
विज्ञापन
इस दिशा में यह कार्यशाला अपने उद्देश्यों को पूर्ण करने में सफल सिद्ध होगी। इसके अलावा गोष्ठी में राजेन्द्र चन्द्रपाण्डे, मोती प्रसाद साहू, डॉ. राजेशचन्द्र पांडे, डॉ. ममता त्रिपाठी, रोशन गौड़, भावना नैथानी, डॉ. अमित सेमवाल, गिरीशचन्द्र तिवारी, डॉ. नौनिहाल गौतम, हरि सिंह गौर, डॉ. उमेश चमोला, डॉ. दिव्या भारती आदि थे।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को आयोजित गोष्ठी का उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रोफेसर प्रेमचन्द्र शास्त्री ने शुरू किया। उन्होंने कहा कि यह गोष्ठी संस्कृत विषय को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने संस्कृत में निहित वैज्ञानिकता को नई पीढ़ी तक पहुंचाये जाने पर जोर दिया। कहा संस्कृत विश्व की प्राचीनतम वैज्ञानिक भाषा है।
विज्ञापन
आधुनिक युग के संसाधनों का प्रयोग करते हुए इसका प्रचार प्रसार विश्व पटल पर किया जाना चाहिए। अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड के निदेशक आरके कुंवर ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक विषय के राज्य की पाठ्यचर्या में ज्ञान परंपरा के अंतर्गत प्राचीन ग्रन्थों में निहित ज्ञान को पाठ्यचर्या का हिस्सा बनाये जाना चाहिए।
विज्ञापन
इस दिशा में यह कार्यशाला अपने उद्देश्यों को पूर्ण करने में सफल सिद्ध होगी। इसके अलावा गोष्ठी में राजेन्द्र चन्द्रपाण्डे, मोती प्रसाद साहू, डॉ. राजेशचन्द्र पांडे, डॉ. ममता त्रिपाठी, रोशन गौड़, भावना नैथानी, डॉ. अमित सेमवाल, गिरीशचन्द्र तिवारी, डॉ. नौनिहाल गौतम, हरि सिंह गौर, डॉ. उमेश चमोला, डॉ. दिव्या भारती आदि थे।