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कॉफी के बहाने ‘किताबों’ से जोड़ रहा कैफे

Thu, 24 Mar 2016 02:15 AM IST
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश
हेमवती नंदन भ्ाट्ट /अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Thu, 24 Mar 2016 02:15 AM IST
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rishikesh youth reading historical books in coffee shop.
कॉफी शॉप में बैठकर किताबें पढ़नी युवा बहुत पसंद कर रहे है। - फोटो : amar ujala

तीर्थनगरी के एक कैफे शॉप में लोगों को खाने-पीने की वस्तुओं के साथ साहित्यिक पुस्तकें भी पढ़ने के लिए मिल रही हैं। कॉफी के बहाने किताबों से दूर हो चुके समाज को दोबारा विभिन्न तरह के साहित्य की पुस्तकों से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। कैफे  शॉप में 400 से अधिक धार्मिक, ऐतिहासिक, साहित्यिक और अन्य प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध हैं। लोगों में अपनी किस्म की इस अनूठी पहल से खासा उत्साह है। वह कॉफी की चुस्कियों के साथ पुस्तकों से भी जुड़ने में रुचि दिखा रहे हैं।  

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इंटरनेट समेत तमाम माध्यमों के बढ़ते वर्चश्व में आम आदमी का पुस्तकों से नाता लगभग टूटता जा रहा है। ऐसे में कई बार बाजार में जरूरत का साहित्य उपलब्ध नहीं होने पर इसके शौकीन लोगों को मन मसोस कर रहना पड़ता है। लेकिन तीर्थनगरी में एक कैफे ऐसा भी है, जो लोगों को पुस्तकों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। बैराज रोड स्थित बुक एंड ब्रू कैफे शॉप में लोगों के लिए कॉफी के साथ ही पुस्तकें भी उपलब्ध हैं, वह भी निशुल्क।
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कैफे के प्रोपराइटर सुरेंद्र कथूरिया का कहना है कि ऐसा नहीं है कि जो व्यक्ति कैफे में कॉफी की चाह लिए आएगा, उन्हें ही साहित्य उपलब्ध होगा। बल्कि कोई भी पाठक यहां आकर साहित्य का अध्ययन कर सकता है। उनका मकसद लोगों का पुस्तकों से टूटता नाता फिर से जोड़ना है।
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इन पुस्तकों का लें लुत्फ
कैफे में आप आध्यात्मिक और साहित्यिक पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं। युवा वर्ग के लिए प्रेरक पुस्तकें, भारतीय पुरातन इतिहास, नावेल, कविता, गद्य साहित्य उपलब्ध है। आध्यात्मिक पुस्तकों में श्रीराम चरित मानस, गीता, गुरुवाणी, बाइबिल, कुरान, निरंकारी मिशन, राधा स्वामी समेत विभिन्न मिशनरी साहित्य मौजूद है।


मेट्रो सिटी का कांसेप्ट तीर्थनगरी में
कैफे के प्रोपराइटर कथूरिया ने बताया कि उन्हें दिल्ली और चंडीगढ़ के कॉफी हाउस में पुस्तकें पढ़ाने का कांसेप्ट पसंद आया। लिहाजा उन्हें तीर्थनगरी में कैफे खोलने का विचार आया तो उसमें इस कांसेप्ट को उतारने की ठान ली। कैफे में वर्तमान में लाखों रुपये मूल्य की करीब चार सौ पुस्तकें उपलब्ध हैं। जबकि अभी काफी साहित्य मंगाया गया है।

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