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Rishikesh News: आयुर्वेदिक चिकित्सालय में जल्द मिलेगा पंचकर्म चिकित्सा का लाभ
Tue, 25 Aug 2026 07:47 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 25 Aug 2026 07:47 PM IST
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चंद्रमोहन कोठियाल
जौलीग्रांट। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जौलीग्रांट में जल्द ही मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा मिलने लगेगी। अस्पताल में पंचकर्म से जुड़ी पांच मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। आगामी एक माह में एक महिला और एक पुरुष पंचकर्म सहायक की नियुक्ति होने के बाद चिकित्सा सेवा शुरू कर दी जाएगी। इससे क्षेत्र के सैकड़ों मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। शासन के निर्देश पर आयुष विभाग ने अस्पताल में स्ववेदन मशीन, नाड़ी स्वेदन यंत्र, द्रोणी टेबल, पंचकर्म टेबल और शिरोधारा यंत्र स्थापित किए हैं। इनसे रक्तगत वात, शिरागत वात, संधिवात, कटिगत वात, जानुगत वात और मन्यागत वात आदि की चिकित्सा की जाएगी। पंचकर्म के तहत भाप, मसाज और अन्य आयुर्वेदिक विधियों से उपचार किया जाएगा। चिकित्सकों के अनुसार आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को संतुलित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से इन तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद मिलेगी। चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेद की ओर मरीजों का रुझान फिर बढ़ रहा है, जिससे अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। चिकित्साधिकारी डॉ. हरदेव सिंह रावत ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में पंचकर्म चिकित्सा शुरू करने के लिए आयुष मंत्री मदन कौशिक के प्रयासों से प्रदेशभर में 224 पंचकर्म सहायकों की नियुक्ति की जा रही है। जौलीग्रांट अस्पताल में भी एक महिला और एक पुरुष सहायक की नियुक्ति जल्द होगी, जिसके बाद मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
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जौलीग्रांट। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जौलीग्रांट में जल्द ही मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा मिलने लगेगी। अस्पताल में पंचकर्म से जुड़ी पांच मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। आगामी एक माह में एक महिला और एक पुरुष पंचकर्म सहायक की नियुक्ति होने के बाद चिकित्सा सेवा शुरू कर दी जाएगी। इससे क्षेत्र के सैकड़ों मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। शासन के निर्देश पर आयुष विभाग ने अस्पताल में स्ववेदन मशीन, नाड़ी स्वेदन यंत्र, द्रोणी टेबल, पंचकर्म टेबल और शिरोधारा यंत्र स्थापित किए हैं। इनसे रक्तगत वात, शिरागत वात, संधिवात, कटिगत वात, जानुगत वात और मन्यागत वात आदि की चिकित्सा की जाएगी। पंचकर्म के तहत भाप, मसाज और अन्य आयुर्वेदिक विधियों से उपचार किया जाएगा। चिकित्सकों के अनुसार आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को संतुलित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से इन तीनों दोषों को संतुलित करने में मदद मिलेगी। चिकित्सकों ने बताया कि आयुर्वेद की ओर मरीजों का रुझान फिर बढ़ रहा है, जिससे अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। चिकित्साधिकारी डॉ. हरदेव सिंह रावत ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में पंचकर्म चिकित्सा शुरू करने के लिए आयुष मंत्री मदन कौशिक के प्रयासों से प्रदेशभर में 224 पंचकर्म सहायकों की नियुक्ति की जा रही है। जौलीग्रांट अस्पताल में भी एक महिला और एक पुरुष सहायक की नियुक्ति जल्द होगी, जिसके बाद मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।