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Rishikesh News: अब घर-आंगन में नहीं सुनाई देती गौरैया की चहचहाहट

Wed, 20 Mar 2024 01:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:21 AM IST
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Now chirping of sparrows is not heard in the courtyard
कंक्रीट के मकानों ने छीना गौरेया का आशियाना, ऋषिकेश और हरिद्वार में तेजी से कम हुई चिड़िया
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गुरुकुल कांगड़ी विवि के कई इलाकों में किए सर्वे में खुलासा

शहराें में पक्के मकान बनने से अब घर-आंगन में गौरैया का चहचहाहट नहीं सुनाई देती। शहरों से गौरैया विलुप्त सी हो गई है। इसके पीछे पक्के मकानों में उनके लिए जगह नहीं है। गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार के सर्वे में ऋषिकेश और हरिद्वार शहर में गौरैया की संख्या को बेहद कम हो गई है।
गांवों में सुबह-सुबह गौरैया का झुंड घरों की दहलीज तक पहुंच जाते थे। गौरैया की चहचहाहट से सुबह की शुरुआत होती थी। लेकिन अब गांवों में पक्के मकानों का प्रचलन होने, आधुनिक डिजायनों के मकानों का निर्माण होने से गौरैया के रहने के लिए स्थान रोबा, आला नहीं छोड़ा जाता। जिससे गौरैया उस मकान में घोंसला नहीं बना पाती। गौरैया को कच्ची गोशाला में अपना घोंसला बनाना पड़ता है। वहीं शहराें में जिन क्षेत्रों में पक्के मकानों का निर्माण हुआ है उन क्षेत्रों से गौरैया भी विलुप्त की कगार पर पहुंच गई। हरियाली कम होने से भी गौरैया आबादी में नहीं रह पाती है। पक्षी वैज्ञानिक बताते हैं कि गौरैया पानी में पनप रहे मच्छरों के लार्वा और हवा में उड़ रहे मच्छर को भी खाती है। यदि शहरी क्षेत्रों में गौरैया के रहने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाएं तो गौरैया की संख्या बढ़ सकती है। गौरैया की संख्या बढ़ेगी तो मच्छरों का लार्वा नहीं पनपेगा, जिससे डेंगू और चिकनगुनिया की बीमारी से भी निजात मिलेगी।
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इन शहरों में गौरेया की संख्या में आई कमी

गुरुकुल कांगड़ी विवि की पक्षी विविधता एवं पक्षी संवाद प्रयोगशाला की ओर से उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल, उत्तरकाशी, ऋषिकेश, हरिद्वार हल्द्वानी, पंतनगर जैसे शहरों में सर्वे किया गया। जिसमें उत्तरकाशी और श्रीनगर गढ़वाल में गौरैया की संख्या को पर्याप्त बताया गया। जबकि ऋषिकेश शहर और हरिद्वार में गौरैया की संख्या कम होने से पर चिंता जताई गई। कुछ वर्षों में गौरैया की संख्या 50 फीसदी कमी आई है। जहां पहले गौरेया के 50 झुंड में दिखते थे, वहां अब गिनी चुनी गौरैया रह गई हैं।
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ऐसे करें गौरैया का संरक्षण
हम अपने घर में प्लाई या लकड़ी का बाक्स बनाकर उसमें डेढ़ इंच व्यास का होल बनाकर मकान के टॉप वाले कोने पर लटका सकते हैं। घोंसला ऐसी जगह पर लगाना चाहिए जहां पर सीधे सूर्य की किरण और बारिश की बौछार भी न पड़े। जमीन से करीब आठ फीट ऊंची जगह पर गौरैया का घोंसला लगाया जाना चाहिए। घोंसला के आसपास ऊंची जगह पर पानी और बाजरा रखना चाहिए।


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शहरीकरण के कारण गौरैया के परंपरागत घर खत्म हो गए। आधुनिक शैली के पक्के घर में गौरैया के रहने का कोई इंतजाम नहीं होते हैं। जिससे शहरी क्षेत्रों गौरैया के घोंसला न बनाए जाने से गौरैया की संख्या लगातार घट रही है। ऋषिकेश शहर और हरिद्वार शहर में गौरैया की संख्या घटना चिंताजनक है। - दिनेश भट्ट, पक्षी वैज्ञानिक गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार
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