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जिंदगी जीने की कला तो कई सजवाण से सीखे
मनोज सिंह राणा /अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Sat, 07 May 2016 02:31 AM IST
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कृपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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यमकेश्वर के खंड गांव सिमलखेत में 107 सालों का राज छुपा है। जिंदगी के 107 बसंत देख चुके कृपाल सिंह सजवाण लंबी उम्र के लिए हाड़ तोड़ मेहनत को जरूरी बताते हैं। उनका मानना है कि विकास होने से गांव और शहर के बीच की दूरी बढ़ी है।
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शहरों की चकाचौंध से गांव खाली होते जा रहे है। शहरों में शारीरिक श्रम नहीं होने से बीमारी कम उम्र में ही मनुष्य के शरीर में घर कर रही है। उनका मानना है कि यदि युवा पीढ़ी श्रम करे तो उसे बीमारी छू नहीं सकती है।
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23 नवंबर 1908 को यमकेश्वर ब्लॉक के ग्राम सभा पटना के सिमलखेत में कृपाल सिंह सजवाण का जन्म हुआ। लोगों को लंबी उम्र जीने की प्रेरणा देने वाले सजवाण ने बताया कि उनका पूरा जीवन कठिन परिश्रम में गुजरा है। गांव में खेतीबाड़ी करके उन्होंने अपने परिवार का भरण पोषण किया।
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खेत में उगने वाला अन्न, साग सब्जियां उनके इस लंबे जीवन का रहस्य है। नियमित दिनचर्या और खानपान अच्छा हो तो कोई भी बीमारी छू नहीं सकती। सुबह नाश्ते में वह आठ बजे दो रोटी, एक बजे लंच में दो रोटी, दाल, सब्जी और रात आठ बजे दो रोटी सब्जी और दाल खाते हैं।
सजवाण का कहना है कि शहरों में जिस तेजी से विकास हुआ है उसी दर से पहाड़ के गांवों से पलायन भी तेजी से हुआ है। पलायन का कारण वे लोगों का सुविधा भोगी होना मानते है। कहते हैं यदि गांवों में अच्छे स्कूल, स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था होगी तो पलायन कुछ हद तक थम सकता है।
दिनचर्या में है शामिल
सजवाण ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी बासी भोजन नहीं किया। समय से खाना, जल्दी सोना और जल्दी उठने के साथ सुबह मॉर्निंग वाक करना उनके स्वस्थ जीवन का रहस्य है। अकेले में ताश खेलना शौक है और हमेशा खुश रहना सेहत का राज है।
हरा भरा है परिवार
सजवाण ने बताया कि उनकी तीन लड़के और पांच लड़कियां हैं। सबकी शादी हो चुकी है और वह अपने-अपने गृहस्थ जीवन में खुश हैं। कमी है तो सिर्फ पत्नी है की जो उन्हें दो दशक पहले छोड़कर चली गई। बुजुर्ग सजवाण इन दिनों अपने बेटों के साथ देहरादून स्थित सुंदरवाला लार्डपुर में रहते हैं।