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स्कूल खोलने को लेकर असमंजस में प्रबंधन
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ऋषिकेश। दो अगस्त सोमवार से स्कूल खोलने को लेकर स्कूल प्रबंधन भी असमंजस की स्थिति में है। वहीं कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। जिन स्कूलों में छात्र संख्या अधिक है वह स्कूल को दो पालियों में चलाने का विचार कर रहे हैं। वहीं शनिवार को देहरादून में होने वाली बैठक के बाद ही कुछ साफ हो पाएगा।
श्रीभरत मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कैप्टन जीएस रावत ने कहा कि उनके विद्यालय में 1500 छात्र संख्या है। उनके विद्यालय में जो अध्यापक से 44 से कम आयु के हैं। उनमें अधिकांश को कोविड की सिंगल डोज ही लगी है। वहीं एक साथ 1500 छात्र-छात्राओं को बुलाना संभव नहीं है। स्कूल को दो पालियों में चलाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं पंजाब सिंध इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एलके शर्मा ने बताया कि उनके विद्यालय में 250 छात्र संख्या है। विद्यालय में सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। लेकिन इस बार कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। वहीं राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य रचना अग्रवाल ने कहा कि उनके विद्यालय में सैनिटाइजेशन का काम किया जा रहा है। कोविड की एसओपी का पालन किया जाएगा। लेकिन अभी शासन की ओर से विद्यालय खोलने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। शनिवार को दोपहर में स्कूलों को खोलने को लेकर जिलाधिकारी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे उसके बाद ही स्कूल खोलने को लेकर कुछ साफ हो पाएगा। जैसे आदेश मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा।
ऋषिकेश। दो अगस्त से कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल खुल रहे हैं। स्कूली बसों में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था बनाई जा सकती है। लेकिन ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और सार्वजनिक बसों से स्कूल जाने वाले बच्चे को संक्रमण से बचाना अभिभावक और स्कूल प्रबंधन दोनों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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शहर में कई अभिवावक ऑटो रिक्शा, विक्रम और ई-रिक्शा से अपने बच्चों को स्कूल भेजेते हैं। बड़े बच्चे सार्वजनिक बसों से भी स्कूल आते हैं। ऑटों, विक्रम, ई-रिक्शा और सार्वजनिक बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना लगभग असंभव है। ऐसे सार्वजनिक वाहनों में बैठने वाले छात्र छात्राओं के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। शहर में संचालित हो रहे विक्रम में यात्रियों को ठूंस ठूंसकर भरा जा रहा है। सार्वजनिक वाहनों के सैनिटाइजेशन की निगरानी भी मश्किल है।
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श्रीभरत मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कैप्टन जीएस रावत ने कहा कि उनके विद्यालय में 1500 छात्र संख्या है। उनके विद्यालय में जो अध्यापक से 44 से कम आयु के हैं। उनमें अधिकांश को कोविड की सिंगल डोज ही लगी है। वहीं एक साथ 1500 छात्र-छात्राओं को बुलाना संभव नहीं है। स्कूल को दो पालियों में चलाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं पंजाब सिंध इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एलके शर्मा ने बताया कि उनके विद्यालय में 250 छात्र संख्या है। विद्यालय में सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। लेकिन इस बार कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। वहीं राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य रचना अग्रवाल ने कहा कि उनके विद्यालय में सैनिटाइजेशन का काम किया जा रहा है। कोविड की एसओपी का पालन किया जाएगा। लेकिन अभी शासन की ओर से विद्यालय खोलने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। शनिवार को दोपहर में स्कूलों को खोलने को लेकर जिलाधिकारी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे उसके बाद ही स्कूल खोलने को लेकर कुछ साफ हो पाएगा। जैसे आदेश मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा।
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ऋषिकेश। दो अगस्त से कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल खुल रहे हैं। स्कूली बसों में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था बनाई जा सकती है। लेकिन ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और सार्वजनिक बसों से स्कूल जाने वाले बच्चे को संक्रमण से बचाना अभिभावक और स्कूल प्रबंधन दोनों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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शहर में कई अभिवावक ऑटो रिक्शा, विक्रम और ई-रिक्शा से अपने बच्चों को स्कूल भेजेते हैं। बड़े बच्चे सार्वजनिक बसों से भी स्कूल आते हैं। ऑटों, विक्रम, ई-रिक्शा और सार्वजनिक बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना लगभग असंभव है। ऐसे सार्वजनिक वाहनों में बैठने वाले छात्र छात्राओं के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। शहर में संचालित हो रहे विक्रम में यात्रियों को ठूंस ठूंसकर भरा जा रहा है। सार्वजनिक वाहनों के सैनिटाइजेशन की निगरानी भी मश्किल है।