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Rishikesh News: लाइसेंस में देरी, बाजारों में धड़ल्ले से सजीं अवैध पटाखे की दुकानें
Sat, 07 Nov 2026 06:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 07 Nov 2026 06:38 PM IST
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- स्थानीय प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही से मंडरा रहा हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। दीपावली पर्व की पूर्व संध्या तक पटाखा विक्रेताओं को अस्थायी लाइसेंस जारी न होना स्थानीय प्रशासन की घोर सुस्ती और लापरवाही को साफ बयां कर रहा है। समय रहते प्रक्रिया पूरी न करने के कारण त्योहार के मुख्य दिन तक लाइसेंस लटके रहे। जिसका नतीजा यह हुआ कि शहर के घने और संकरे मुख्य बाजार में बेखौफ होकर अवैध पटाखा दुकानें सजा दी गईं।
नियमानुसार स्थानीय प्रशासन की एनओसी के बाद ही निर्धारित खुले मैदानों में आतिशबाजी बिक्री की अनुमति दी जाती है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मुख्य बाजार के संकरे रास्तों में दुकानों पर रखे पटाखों के ढेर किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। इन अस्थायी फड़ों पर न तो आग बुझाने के लिए रेत-पानी के बुनियादी इंतजाम हैं और न ही अग्निशमन यंत्र मौजूद हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मुख्य बाजार में हर वक्त पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की मौजूदगी रहती है। तब सरेआम चल रही इस अवैध बिक्री पर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया गया। ऐन वक्त तक फाइलें लटकाए रखना और फिर बाजार में पसरी अराजकता पर मूकदर्शक बने रहना अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस संबंध में जब एसडीएम और तहसीलदार को प्रशासन का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। दीपावली पर्व की पूर्व संध्या तक पटाखा विक्रेताओं को अस्थायी लाइसेंस जारी न होना स्थानीय प्रशासन की घोर सुस्ती और लापरवाही को साफ बयां कर रहा है। समय रहते प्रक्रिया पूरी न करने के कारण त्योहार के मुख्य दिन तक लाइसेंस लटके रहे। जिसका नतीजा यह हुआ कि शहर के घने और संकरे मुख्य बाजार में बेखौफ होकर अवैध पटाखा दुकानें सजा दी गईं।
नियमानुसार स्थानीय प्रशासन की एनओसी के बाद ही निर्धारित खुले मैदानों में आतिशबाजी बिक्री की अनुमति दी जाती है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मुख्य बाजार के संकरे रास्तों में दुकानों पर रखे पटाखों के ढेर किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। इन अस्थायी फड़ों पर न तो आग बुझाने के लिए रेत-पानी के बुनियादी इंतजाम हैं और न ही अग्निशमन यंत्र मौजूद हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मुख्य बाजार में हर वक्त पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की मौजूदगी रहती है। तब सरेआम चल रही इस अवैध बिक्री पर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया गया। ऐन वक्त तक फाइलें लटकाए रखना और फिर बाजार में पसरी अराजकता पर मूकदर्शक बने रहना अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस संबंध में जब एसडीएम और तहसीलदार को प्रशासन का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हुआ।
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