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श्री राम के बाणों के आगे टिक नहीं पाया कुम्भकर्ण
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रायवाला में आयोजित रामलीला में लक्ष्मण शक्ति और संजीवनी लाने का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : RISHIKESH
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रायवाला। श्रीराम लीला कमेठी रायवाला की ओर से आयोजित रामलीला में 13वें दिन लक्ष्मण के शक्ति बाण से मुर्छित होने, हनुमान के संजीवनी बूटी लाने और कुम्भकर्ण वध का मंचन किया गया। कुम्भकर्ण वध में दिखाया गया कि विशालकाय शरीर लिए कुम्भकर्ण श्रीराम की सेना पर टूट पड़ता है। इससे सेना में भगदड़ मच जाती है। इसके बाद श्रीराम कुम्भकर्ण से युद्ध करते हैं और अपने बाणों से उसे धराशायी कर देते हैें।
हनुमान चौक पर चल रही रामलीला में नियमित आरती के बाद पात्रों ने निर्देशक महेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में लीला के अगले चरण का मचंन किया। इसमें रावण की सेना से मेघनाथ और राम की सेना से लक्ष्मण, हनुमान और अंगद युद्ध के मैदान में आमने सामने हुए। लंबे समय तक चले युद्ध में धोखे से मेघनाथ की ओर से शक्ति बाण का प्रयोग कर लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया गया। इसकी सूचना पाकर बड़े भाई राम और वानर सेना मायूस होकर विलाप करने लगी। इसके बाद हनुमान लंका से सुषेन नामक वैद्य को लेकर आए और लक्ष्मण का उपचार शुरू किया गया। वैद्य ने संजीवनी बूटी लाने की बात कही। इसकी जिम्मेदारी हनुमान को सौंपी गई।
वीर हनुमान हिमालय पर जब संजीवनी नहीं खोज पाए तो द्रोणागिरि पर्वत को ही अपने हाथों से उखाड़ लाए। आखिरकार संजीवनी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण स्वस्थ हो गए। इसकी खबर रावण के दरबार में पहुंची और रावण ने अगला कदम उठाते हुए अपने भाई कुम्भकर्ण को युद्ध के मैदान में भेजा। युद्ध में श्रीराम के हाथों कुम्भकर्ण का वध हो गया।
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हनुमान चौक पर चल रही रामलीला में नियमित आरती के बाद पात्रों ने निर्देशक महेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में लीला के अगले चरण का मचंन किया। इसमें रावण की सेना से मेघनाथ और राम की सेना से लक्ष्मण, हनुमान और अंगद युद्ध के मैदान में आमने सामने हुए। लंबे समय तक चले युद्ध में धोखे से मेघनाथ की ओर से शक्ति बाण का प्रयोग कर लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया गया। इसकी सूचना पाकर बड़े भाई राम और वानर सेना मायूस होकर विलाप करने लगी। इसके बाद हनुमान लंका से सुषेन नामक वैद्य को लेकर आए और लक्ष्मण का उपचार शुरू किया गया। वैद्य ने संजीवनी बूटी लाने की बात कही। इसकी जिम्मेदारी हनुमान को सौंपी गई।
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वीर हनुमान हिमालय पर जब संजीवनी नहीं खोज पाए तो द्रोणागिरि पर्वत को ही अपने हाथों से उखाड़ लाए। आखिरकार संजीवनी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण स्वस्थ हो गए। इसकी खबर रावण के दरबार में पहुंची और रावण ने अगला कदम उठाते हुए अपने भाई कुम्भकर्ण को युद्ध के मैदान में भेजा। युद्ध में श्रीराम के हाथों कुम्भकर्ण का वध हो गया।
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