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Rishikesh News: कृष्ण की बाल लीलाओं ने मोहा मन, श्लोकों से गूंजा मधुबन आश्रम
Sat, 22 Aug 2026 05:07 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 22 Aug 2026 05:07 PM IST
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- जन्माष्टमी महोत्सव के लिए ऑडिशन में बच्चों ने दिखाया हुनर,
-एकल नृत्य और श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में उत्साह
ढालवाला। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियों के बीच नव मधुबन आश्रम में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के ऑडिशन में रविवार को भक्ति और संस्कृति का रंग देखने को मिला। ऑडिशन के तीसरे दिन बच्चों ने एकल नृत्य के जरिये भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत किया, वहीं श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में गीता के श्लोकों की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मधुबन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी परमानंद दास महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि और गौरव की भावना पैदा करते हैं। एकल नृत्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को मंच पर उतार दिया। बच्चों की भाव-भंगिमाओं और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने शुद्ध उच्चारण, लय और आत्मविश्वास के साथ गीता के श्लोकों का पाठ किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने निर्णायकों के साथ ही मौजूद श्रद्धालुओं का भी मन मोह लिया।
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-एकल नृत्य और श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में उत्साह
ढालवाला। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियों के बीच नव मधुबन आश्रम में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के ऑडिशन में रविवार को भक्ति और संस्कृति का रंग देखने को मिला। ऑडिशन के तीसरे दिन बच्चों ने एकल नृत्य के जरिये भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत किया, वहीं श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में गीता के श्लोकों की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ मधुबन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी परमानंद दास महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि और गौरव की भावना पैदा करते हैं। एकल नृत्य प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को मंच पर उतार दिया। बच्चों की भाव-भंगिमाओं और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने शुद्ध उच्चारण, लय और आत्मविश्वास के साथ गीता के श्लोकों का पाठ किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने निर्णायकों के साथ ही मौजूद श्रद्धालुओं का भी मन मोह लिया।