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तकनीक और चिकित्सा एक-दूसरे की सहयोगी शक्तियां: प्रो. मीनू
Mon, 31 Aug 2026 06:58 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 31 Aug 2026 06:58 PM IST
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-एम्स में एआई-टेलीमेडिसिन से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर हुई चर्चा
ऋषिकेश। एम्स में टेलीमेडिसिन सोसायटी ऑफ इंडिया, उत्तराखंड चैप्टर की पहल पर सोमवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों, चिकित्सकों और शिक्षकों ने आधुनिक तकनीक के सुरक्षित व प्रभावी इस्तेमाल पर विचार साझा किए। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक और चिकित्सा विशेषज्ञता विकल्प नहीं बल्कि एक-दूसरे की सहयोगी शक्तियां हैं। भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
सोमवार को कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक व टीएसआई उत्तराखंड की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इसका महत्व और अधिक है। एम्स ऋषिकेश की इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष व टीएसआई उत्तराखंड की मानद सचिव डॉ. निधि कैले ने कहा कि पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन के जरिये विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराना सांप के काटने जैसे आपात मामलों में उपयोगी साबित हो सकता है। टीएसआई अध्यक्ष व मोहन फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. सुनील श्रॉफ ने एआई इनोवेशन बनाम डेटा प्रोटेक्शन विषय पर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के बढ़ते उपयोग के साथ मरीजों के डेटा की गोपनीयता और जिम्मेदार एआई के महत्व पर चर्चा की।
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ऋषिकेश। एम्स में टेलीमेडिसिन सोसायटी ऑफ इंडिया, उत्तराखंड चैप्टर की पहल पर सोमवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से पहुंचे विशेषज्ञों, चिकित्सकों और शिक्षकों ने आधुनिक तकनीक के सुरक्षित व प्रभावी इस्तेमाल पर विचार साझा किए। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक और चिकित्सा विशेषज्ञता विकल्प नहीं बल्कि एक-दूसरे की सहयोगी शक्तियां हैं। भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
सोमवार को कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक व टीएसआई उत्तराखंड की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इसका महत्व और अधिक है। एम्स ऋषिकेश की इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष व टीएसआई उत्तराखंड की मानद सचिव डॉ. निधि कैले ने कहा कि पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन के जरिये विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराना सांप के काटने जैसे आपात मामलों में उपयोगी साबित हो सकता है। टीएसआई अध्यक्ष व मोहन फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. सुनील श्रॉफ ने एआई इनोवेशन बनाम डेटा प्रोटेक्शन विषय पर स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के बढ़ते उपयोग के साथ मरीजों के डेटा की गोपनीयता और जिम्मेदार एआई के महत्व पर चर्चा की।
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