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Rishikesh News: लाइन में फाल्ट आने पर तीन दिन बाद आती है बिजली
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II75 किमी दूर से एसडीओ क्षेत्र की कर रहे निगरानी
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Iएसडीओ कोटद्वार द्वितीय के कार्यालय को सिलोगी, गैंडखाल शिफ्ट करने की मांग
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Iबिजली की लाइन में गड़बड़ी होने पर यमकेश्वर और द्वारीखाल क्षेत्र में तीन दिन बाद आपूर्ति होती है। इससे क्षेत्रवासी बेहद परेशान है।
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Iऊर्जा निगम विद्युत वितरण कोटद्वार के उपखंड अधिकारी द्वितीय करीब 75 किमी दूर कोटद्वार शहर में बैठते हैं। वहीं से ही यमकेश्वर और द्वारीखाल के क्षेत्र को देखते हैं। अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की बजाय कोटद्वार शहर में ही रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति संबंधी समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई नहीं हो पाती है। एसडीओ कोटद्वार द्वितीय के कार्यालय को लोग सिलोगी, गैंडखाल शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।
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Iउपखंड अधिकारी द्वितीय के पास गूमखाल, द्वारीखाल, डाडामंडी, कांडाखाल, मष्टखाल, सिलोगी, गैंडखाल, बिनक, बंचूरी, बैरागढ़, नीलकंठ, गंगाभोगपुर का क्षेेत्र है। एसडीओ कार्यालय के दूर होने से यहां विभागीय इंजीनियर भी गांवों में बिजली की लाइनों का निरीक्षण करने नहीं जा पाते।
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Iऊर्जा निगम कोटद्वार के उपखंड अधिकारी द्वितीय का कार्यालय सिलोगी, गैंडखाल या फिर नीलकंठ क्षेत्र में शिफ्ट करने की मांग स्थानीय लोग काफी समय से कर रहे हैं। इस बाबत स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - शुभम सिंह, स्थानीय निवासीI
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Iनीलकंठ में कांवड़ यात्रा चलती है। राफ्टिंग के दौरान पूरी हेंवलघाटी और तल्ला ढांगू क्षेत्र में कैंपों में यात्रियों की अधिकता होती है। कई बार बिजली की लाइनों में फाल्ट आने पर तीसरे दिन क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल होती है। कोटद्वार से नीलकंठ क्षेत्र में अधिकारियों को पहुंचने में समय लग जाता है। - देवेंद्र शर्मा, स्थानीय निवासीI
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Iउपखंड अधिकारी कोटद्वार द्वितीय के ऑफिस को गैंडखाल में शिफ्ट करने की मांग को लेकर पूर्व में ऊर्जा निगम के अधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित किए जा चुके हैं। एसडीओ कार्यालय नजदीक न होने से क्षेत्र की बिजली की लाइनों की देखरेख आउटसोर्स से लगे लाइनमैन ही करते हैं। - सुरेंद्र नेगी, स्थानीय निवासी
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Iएसडीओ कार्यालय को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने का निर्णय शासन स्तर से लिया जाता है। ऊर्जा निगम के स्तर से इसमें कोई निर्णय नहीं लिया जाता। यदि किसी को बिजली से संबंधित शिकायत दर्ज करानी हो तो वह 1912 नंबर दर्ज करा सकता है। - रवि राजौरा, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम, श्रीनगर गढ़वालI
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II75 किमी दूर से एसडीओ क्षेत्र की कर रहे निगरानी
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Iएसडीओ कोटद्वार द्वितीय के कार्यालय को सिलोगी, गैंडखाल शिफ्ट करने की मांग
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Iबिजली की लाइन में गड़बड़ी होने पर यमकेश्वर और द्वारीखाल क्षेत्र में तीन दिन बाद आपूर्ति होती है। इससे क्षेत्रवासी बेहद परेशान है।
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Iऊर्जा निगम विद्युत वितरण कोटद्वार के उपखंड अधिकारी द्वितीय करीब 75 किमी दूर कोटद्वार शहर में बैठते हैं। वहीं से ही यमकेश्वर और द्वारीखाल के क्षेत्र को देखते हैं। अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की बजाय कोटद्वार शहर में ही रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति संबंधी समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई नहीं हो पाती है। एसडीओ कोटद्वार द्वितीय के कार्यालय को लोग सिलोगी, गैंडखाल शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।
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Iउपखंड अधिकारी द्वितीय के पास गूमखाल, द्वारीखाल, डाडामंडी, कांडाखाल, मष्टखाल, सिलोगी, गैंडखाल, बिनक, बंचूरी, बैरागढ़, नीलकंठ, गंगाभोगपुर का क्षेेत्र है। एसडीओ कार्यालय के दूर होने से यहां विभागीय इंजीनियर भी गांवों में बिजली की लाइनों का निरीक्षण करने नहीं जा पाते।
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Iऊर्जा निगम कोटद्वार के उपखंड अधिकारी द्वितीय का कार्यालय सिलोगी, गैंडखाल या फिर नीलकंठ क्षेत्र में शिफ्ट करने की मांग स्थानीय लोग काफी समय से कर रहे हैं। इस बाबत स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - शुभम सिंह, स्थानीय निवासीI
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Iनीलकंठ में कांवड़ यात्रा चलती है। राफ्टिंग के दौरान पूरी हेंवलघाटी और तल्ला ढांगू क्षेत्र में कैंपों में यात्रियों की अधिकता होती है। कई बार बिजली की लाइनों में फाल्ट आने पर तीसरे दिन क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल होती है। कोटद्वार से नीलकंठ क्षेत्र में अधिकारियों को पहुंचने में समय लग जाता है। - देवेंद्र शर्मा, स्थानीय निवासीI
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Iउपखंड अधिकारी कोटद्वार द्वितीय के ऑफिस को गैंडखाल में शिफ्ट करने की मांग को लेकर पूर्व में ऊर्जा निगम के अधिकारियों को ज्ञापन प्रेषित किए जा चुके हैं। एसडीओ कार्यालय नजदीक न होने से क्षेत्र की बिजली की लाइनों की देखरेख आउटसोर्स से लगे लाइनमैन ही करते हैं। - सुरेंद्र नेगी, स्थानीय निवासी
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Iएसडीओ कार्यालय को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने का निर्णय शासन स्तर से लिया जाता है। ऊर्जा निगम के स्तर से इसमें कोई निर्णय नहीं लिया जाता। यदि किसी को बिजली से संबंधित शिकायत दर्ज करानी हो तो वह 1912 नंबर दर्ज करा सकता है। - रवि राजौरा, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम, श्रीनगर गढ़वालI