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कृष्णानगर कालोनी को खाली कराएगा वन विभाग
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ऋषिकेश। वन विभाग आईडीपीएल स्थित वन भूमि पर बनी कृष्णानगर कॉलोनी को हटाने की तैयारी कर रहा है। नवंबर 2021 में भूमि की लीज समाप्त हो रही है। इसके बाद भूमि वन विभाग को स्थानांतरित हो जाएगी। देहरादून के प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि वन विभाग के लिए कॉलोनी को हटाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
मंगलवार को तहसील दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान ने डीएम डॉ. आर राजेश कुमार को बताया कि आईडीपीएल ने वन विभाग से 60 साल के लिए भूमि लीज पर ली थी। भूमि पर कृष्णानगर कॉलोनी के अलावा बड़े-बड़े अतिक्रमण हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर 2021 को आईडीपीएल की लीज समाप्त होने वाली है। इसके बाद यह वन विभाग भूमि पर वापस कब्जा लेगा। उन्होंने कहा कि नवंबर के बाद अतिक्रमण को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी। कृष्णा नगर में करीब ढाई हजार परिवार रहते है। क्षेत्र की आबादी की करीब 15 हजार है। गौर करने वाली बात है कि यहां बड़े पैमाने पर भूखंड का क्रय-विक्रय भी हुआ है। बड़ा आबादी क्षेत्र होने के चलते कृष्णानगर दोनों बड़े राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस का वोट बैंक है। यहां विभागों की ओर से विभिन्न सुविधाएं भी दी गई है। ऐसे में राजनीतिक दखल कब्जा हटाने की कार्रवाई में रुकावट बन सकता है। वहीं वन विभाग किसी भी सूरत में भूमि को कब्जा मुक्त कराने का दावा कर रहा है।
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मंगलवार को तहसील दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान ने डीएम डॉ. आर राजेश कुमार को बताया कि आईडीपीएल ने वन विभाग से 60 साल के लिए भूमि लीज पर ली थी। भूमि पर कृष्णानगर कॉलोनी के अलावा बड़े-बड़े अतिक्रमण हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर 2021 को आईडीपीएल की लीज समाप्त होने वाली है। इसके बाद यह वन विभाग भूमि पर वापस कब्जा लेगा। उन्होंने कहा कि नवंबर के बाद अतिक्रमण को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी। कृष्णा नगर में करीब ढाई हजार परिवार रहते है। क्षेत्र की आबादी की करीब 15 हजार है। गौर करने वाली बात है कि यहां बड़े पैमाने पर भूखंड का क्रय-विक्रय भी हुआ है। बड़ा आबादी क्षेत्र होने के चलते कृष्णानगर दोनों बड़े राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस का वोट बैंक है। यहां विभागों की ओर से विभिन्न सुविधाएं भी दी गई है। ऐसे में राजनीतिक दखल कब्जा हटाने की कार्रवाई में रुकावट बन सकता है। वहीं वन विभाग किसी भी सूरत में भूमि को कब्जा मुक्त कराने का दावा कर रहा है।
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