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Rishikesh News: परमार्थ निकेतन पहुंचे फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर
Wed, 15 Apr 2026 02:23 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 15 Apr 2026 02:23 AM IST
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परमार्थ निकेतन में गंगा आरती करते फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर । स्रोत परमार्थ मीडिया।
- फोटो : Samvad
परमार्थ निकेतन में भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता मधुर भंडारकर पहुंचे। आश्रम में उन्होंने परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से मुलाकात कर सांध्यकालीन गंगा आरती में प्रतिभाग किया। फिल्म निर्देशक को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया।
स्वामी ने कहा कि आज के समय में फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि वे समाज के निर्माण और दिशा निर्धारण का एक सशक्त साधन बन चुकी हैं। युवा पीढ़ी पर फिल्मों का गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए यह आवश्यक है कि सिनेमा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कारों और मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया जाए।
मधुर भंडारकर ने कहा कि गंगा आरती का यह दिव्य दृश्य उनके जीवन के अविस्मरणीय क्षणों में से एक है। भारतीय सिनेमा आने वाले समय में संस्कृति और मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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बैसाखी पर्व नए संकल्पों का प्रतीक : स्वामी चिदानंद
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व नई ऊर्जा, नई फसल और नए संकल्पों का प्रतीक है। बैसाखी हमें परिश्रम, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है। किसान अपनी मेहनत से सुनहरी फसल उगाते हैं, वैसे ही हम भी अपने जीवन में अच्छे विचारों, संस्कारों और सेवा के बीज बोये। यह पर्व हमें एकता, आनंद और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
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स्वामी ने कहा कि आज के समय में फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि वे समाज के निर्माण और दिशा निर्धारण का एक सशक्त साधन बन चुकी हैं। युवा पीढ़ी पर फिल्मों का गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए यह आवश्यक है कि सिनेमा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कारों और मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया जाए।
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मधुर भंडारकर ने कहा कि गंगा आरती का यह दिव्य दृश्य उनके जीवन के अविस्मरणीय क्षणों में से एक है। भारतीय सिनेमा आने वाले समय में संस्कृति और मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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बैसाखी पर्व नए संकल्पों का प्रतीक : स्वामी चिदानंद
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व नई ऊर्जा, नई फसल और नए संकल्पों का प्रतीक है। बैसाखी हमें परिश्रम, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है। किसान अपनी मेहनत से सुनहरी फसल उगाते हैं, वैसे ही हम भी अपने जीवन में अच्छे विचारों, संस्कारों और सेवा के बीज बोये। यह पर्व हमें एकता, आनंद और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।