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Rishikesh News: मोतीचूर रेंज में पहुंचा पांचवां बाघ
Fri, 02 May 2025 01:27 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 02 May 2025 01:27 AM IST
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कार्बेट टाइगर रिजर्व से ट्रेंकुलाइज करने के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में पांचवें बाघ को भी सफलतापूर्वक लाया गया है। दो दिन तक टाइगर बाड़े में रखने के बाद मेडिकल परीक्षण कर इसे राजाजी के जंगल में छोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही बाघ शिफ्टिंग प्रोजेक्ट का कार्य भी पूरा हो गया है।
प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के बिजरानी रेंज के सांवल्दे नान-टूरिज्म क्षेत्र से पांच वर्षीय बाघ को ट्रैंकुलाइज किया गया। जिसके बाद बृहस्पतिवार की सुबह करीब चार बजे राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में बनाए गए बाड़े में उसे सफलता पूर्वक छोड़ दिया गया।
इस नर बाघ की उम्र करीब पांच वर्ष है। यहां अब तक कार्बेट से कुल पांच बाघ शिफ्ट कर दिए गए हैं। इसके साथ ही बीते करीब पांच वर्ष से चल रहा बाघ शिफ्टिंग प्रोजेक्ट पूरा हो गया है।
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बतादें कि पिछले कई वर्षो से राजाजी टाइगर रिजर्व के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बाघों के कुनबे को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। जिसके चलते राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनसीटीए) के निर्देश पर राजाजी टाइगर रिजर्व के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की शिफ्टिंग किए जाने की मंजूरी मिली।
दिसम्बर 2020 में यहां पहले बाघ काे सफलता पूर्वक लाया गया। अब तक यहां दो नर बाघ और तीन बाघिन शिफ्ट किए जा चुके हैं। मेडिकल परीक्षण के बाद बाघ को सैटेलाइट रेडियो कालर पहनाया गया।
निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व डाॅ. कोको रोसे ने बताया कि प्रोजेक्ट का उद्देश्य राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाना है। पांचवें बाघ के आने के बाद अब यह प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। इन बाघों की गतिविधियों पर बाघ विशेषज्ञों की टीम जीपीएस कॉलर और सीसीटीवी कैमरों की मदद से लगातार नजर रख रही है।
इस मौके पर उप निदेशक महामित यादव, कालागढ़ के सहायक वन संरक्षक बिंदर पाल, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. राकेश नौटियाल व दुष्यंत शर्मा, वार्डन अजय लिंगवाल, राजीव तलवार, रेंजर महेश सेमवाल, डाॅ. आईपी बोपन्ना मौजूद रहे।
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एक दूसरे को मिठाई खिलाकर दी शुभकामनाएं
पार्क निदेशक कोको रोसे ने इसे ऐतिहासिक प्रोजेक्ट बताया। पार्क अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुशी और उत्साह व्यक्त किया। एक दूसरे को मिठाई खिलाकर इस पल को यादगार बनाया।
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2016 में बनी थी बाघ शिफ्टिंग योजना
राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्टिंग योजना वर्ष 2016 में बनाई गई थी। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इसे मंजूरी मिली। 24 दिसम्बर 2020 को पहले बाघ को मोतीचूर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को बाघिन, 20 मई 2023 को बाघिन, 16 मार्च 2024 को बाघिन और अब एक मई 2025 को एक बाघ को यहां शिफ्ट किया गया। जिसके चलते अब यहां बाघों की संख्या पांच हो गई है। जिसमें दो बाघ व तीन बाघिन शामिल है। खास बात यह है कि एक बाघिन ने गत वर्ष चार शावकों को जन्म भी दिया है।
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कर्मचारियों की भी रही अहम भूमिका
बाघ शिफ्टिंग में अधिकारियों के साथ-साथ कर्मचारियों का भी अहम योगदान रहा। राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज के उन कर्मचारियों का अहम योगदान रहा जिन्होंने सर्दी, बरसात, आंधी और तूफान में भी बाघों की निगरानी करने में बिलकुल भी लापरवाही नही बरती।
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प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व के बिजरानी रेंज के सांवल्दे नान-टूरिज्म क्षेत्र से पांच वर्षीय बाघ को ट्रैंकुलाइज किया गया। जिसके बाद बृहस्पतिवार की सुबह करीब चार बजे राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में बनाए गए बाड़े में उसे सफलता पूर्वक छोड़ दिया गया।
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इस नर बाघ की उम्र करीब पांच वर्ष है। यहां अब तक कार्बेट से कुल पांच बाघ शिफ्ट कर दिए गए हैं। इसके साथ ही बीते करीब पांच वर्ष से चल रहा बाघ शिफ्टिंग प्रोजेक्ट पूरा हो गया है।
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बतादें कि पिछले कई वर्षो से राजाजी टाइगर रिजर्व के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बाघों के कुनबे को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। जिसके चलते राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनसीटीए) के निर्देश पर राजाजी टाइगर रिजर्व के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की शिफ्टिंग किए जाने की मंजूरी मिली।
दिसम्बर 2020 में यहां पहले बाघ काे सफलता पूर्वक लाया गया। अब तक यहां दो नर बाघ और तीन बाघिन शिफ्ट किए जा चुके हैं। मेडिकल परीक्षण के बाद बाघ को सैटेलाइट रेडियो कालर पहनाया गया।
निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व डाॅ. कोको रोसे ने बताया कि प्रोजेक्ट का उद्देश्य राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाना है। पांचवें बाघ के आने के बाद अब यह प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। इन बाघों की गतिविधियों पर बाघ विशेषज्ञों की टीम जीपीएस कॉलर और सीसीटीवी कैमरों की मदद से लगातार नजर रख रही है।
इस मौके पर उप निदेशक महामित यादव, कालागढ़ के सहायक वन संरक्षक बिंदर पाल, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. राकेश नौटियाल व दुष्यंत शर्मा, वार्डन अजय लिंगवाल, राजीव तलवार, रेंजर महेश सेमवाल, डाॅ. आईपी बोपन्ना मौजूद रहे।
एक दूसरे को मिठाई खिलाकर दी शुभकामनाएं
पार्क निदेशक कोको रोसे ने इसे ऐतिहासिक प्रोजेक्ट बताया। पार्क अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुशी और उत्साह व्यक्त किया। एक दूसरे को मिठाई खिलाकर इस पल को यादगार बनाया।
2016 में बनी थी बाघ शिफ्टिंग योजना
राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्टिंग योजना वर्ष 2016 में बनाई गई थी। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इसे मंजूरी मिली। 24 दिसम्बर 2020 को पहले बाघ को मोतीचूर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को बाघिन, 20 मई 2023 को बाघिन, 16 मार्च 2024 को बाघिन और अब एक मई 2025 को एक बाघ को यहां शिफ्ट किया गया। जिसके चलते अब यहां बाघों की संख्या पांच हो गई है। जिसमें दो बाघ व तीन बाघिन शामिल है। खास बात यह है कि एक बाघिन ने गत वर्ष चार शावकों को जन्म भी दिया है।
कर्मचारियों की भी रही अहम भूमिका
बाघ शिफ्टिंग में अधिकारियों के साथ-साथ कर्मचारियों का भी अहम योगदान रहा। राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज के उन कर्मचारियों का अहम योगदान रहा जिन्होंने सर्दी, बरसात, आंधी और तूफान में भी बाघों की निगरानी करने में बिलकुल भी लापरवाही नही बरती।