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पुलिसकर्मियों ने किसान को पीटा, लोगों ने लगाया जाम
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ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर। ट्रैक्टर ट्रालियों में गन्ना लेकर चीनी मिल जा रहे किसानों को पुलिस ने श्यामपुर रेलवे क्रांसिंग के समीप रोक दिया। किसी बात को लेकर किसानों और पुलिस के बीच झगड़ा हो गया, आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने किसानों की पिटाई कर दी जबकि एक किसान विजेंद्र चौधरी को थाने में बंद कर दिया। विरोध में किसानों ने श्यामपुर पुलिस चौकी के समीप हाईवे पर दो घंटे जाम लगा दिया। श्यामपुर से लेकर रायवाला व छिद्दरवाला तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। जाम के कारण पुलिस के हाथ पांव फूल गए, जिसके बाद पुलिस ने हिरासत में लिए किसान को छोड़ दिया।
शिकायतकर्ता विजेंद्र चौधरी ने बताया कि मंगलवार तड़के 3 बजे वह अन्य किसानों के साथ तीन ट्रॉलियों में गन्ना भरकर डोईवाला चीनी मिल तौल के लिए ले जा रहे थे। इसी दौरान श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग के समीप पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ट्रैक्टर ट्राली के दस्तावेज मांगने लगे। किसानों ने कहा कि वाहन व्यावसायिक नहीं बल्कि कृषि उपयोग के हैं। इसका टैक्स जमा नहीं होता है। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने घर से वाहन के दस्तावेज मंगवाए, लेकिन पुलिस ने चालान काट दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी, और थाने ले गए। इस दौरान समीप की दुकान में बैठे लोग घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगे तो पुलिस ने उनकी भी पिटाई कर दी और वीडियो डिलीट कर दिया। इसके विरोध में किसानों ने जाम लगा दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ऋषिकेश कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक मनोज नैनवाल घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों को समझाते हुए जाम खुलवाया। एसएसआई ने किसानों को भरोसा दिलाया कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद लोगों का गुस्सा ठंडा हुआ। इस मौके पर ग्राम प्रधान सरोप सिंह पुंडीर, रजनीश शर्मा, प्रधान सतीश रावत, रमेश रांगड़, बीना चौहान, राजेश व्यास, पवन पांडे, महावीर उपाध्याय, रतन कौर, अरविंद चौधरी, ईश्वर सिंह, लक्ष्मी वर्मा, सुरेंद्र चौधरी आदि मौजूद थे।
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कार्रवाई न हुई तो दोबारा होगा आंदोलन
जाम खुलने के बाद कोतवाल को किसानों ने ज्ञापन सौंपा। इसमें किसानों ने हिदायत दी है कि दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई न हुई तो दोबारा आंदोलन होगा। ज्ञापन में विजेंद्र कुमार, मधु सेमवाल, बीना चौहान, दीपा चौहान, लक्ष्मी वर्मा, रजनीश शर्मा, रमेश रांगड़, ईश्वर सिंह, सतीश रावत आदि के हस्ताक्षर हैं।
परिवहन विभाग के अधिकारियों की भी जांच हो
स्थानीय लोग इस बात को लेकर भी भारी आक्रोशित हैं कि बाहर के नंबरों की ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ओवरलोडिंग कर ईंट लाई जाती हैं। उनको न तो परिवहन विभाग और न ही पुलिस कुछ कहती है। किसानों तथा स्थानीय लोगों को बेवजह परेशान किया जाता है। लोगों ने मांग किया है कि ऐसी गतिविधियां किसी शह पर चल रही हैं। इसमें परिवाहन विभाग के अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए।
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शिकायतकर्ता विजेंद्र चौधरी ने बताया कि मंगलवार तड़के 3 बजे वह अन्य किसानों के साथ तीन ट्रॉलियों में गन्ना भरकर डोईवाला चीनी मिल तौल के लिए ले जा रहे थे। इसी दौरान श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग के समीप पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ट्रैक्टर ट्राली के दस्तावेज मांगने लगे। किसानों ने कहा कि वाहन व्यावसायिक नहीं बल्कि कृषि उपयोग के हैं। इसका टैक्स जमा नहीं होता है। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने घर से वाहन के दस्तावेज मंगवाए, लेकिन पुलिस ने चालान काट दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी, और थाने ले गए। इस दौरान समीप की दुकान में बैठे लोग घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगे तो पुलिस ने उनकी भी पिटाई कर दी और वीडियो डिलीट कर दिया। इसके विरोध में किसानों ने जाम लगा दिया।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए ऋषिकेश कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक मनोज नैनवाल घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों को समझाते हुए जाम खुलवाया। एसएसआई ने किसानों को भरोसा दिलाया कि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद लोगों का गुस्सा ठंडा हुआ। इस मौके पर ग्राम प्रधान सरोप सिंह पुंडीर, रजनीश शर्मा, प्रधान सतीश रावत, रमेश रांगड़, बीना चौहान, राजेश व्यास, पवन पांडे, महावीर उपाध्याय, रतन कौर, अरविंद चौधरी, ईश्वर सिंह, लक्ष्मी वर्मा, सुरेंद्र चौधरी आदि मौजूद थे।
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कार्रवाई न हुई तो दोबारा होगा आंदोलन
जाम खुलने के बाद कोतवाल को किसानों ने ज्ञापन सौंपा। इसमें किसानों ने हिदायत दी है कि दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई न हुई तो दोबारा आंदोलन होगा। ज्ञापन में विजेंद्र कुमार, मधु सेमवाल, बीना चौहान, दीपा चौहान, लक्ष्मी वर्मा, रजनीश शर्मा, रमेश रांगड़, ईश्वर सिंह, सतीश रावत आदि के हस्ताक्षर हैं।
परिवहन विभाग के अधिकारियों की भी जांच हो
स्थानीय लोग इस बात को लेकर भी भारी आक्रोशित हैं कि बाहर के नंबरों की ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ओवरलोडिंग कर ईंट लाई जाती हैं। उनको न तो परिवहन विभाग और न ही पुलिस कुछ कहती है। किसानों तथा स्थानीय लोगों को बेवजह परेशान किया जाता है। लोगों ने मांग किया है कि ऐसी गतिविधियां किसी शह पर चल रही हैं। इसमें परिवाहन विभाग के अधिकारियों की भी जांच की जानी चाहिए।