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अदालत के आदेशों को दरकिनार कर संस्था के नाम दर्ज की संपति
Fri, 17 May 2019 10:31 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 17 May 2019 10:31 AM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : PTI
नगर निगम के कर विभाग में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। नगर स्थित संपत्ति संख्या 56/78 आदर्श नगर के नामांतरण प्रक्रिया में वास्तविक दस्तावेजों को नजरअंदाज कर चहेती संस्था को लाभ पहुंचाने का खुलासा हुआ है। पूरी प्रक्रिया में कर विभाग के अफसर सवालों के घेरे में हैं। नगर आयुक्त को भेजी गई ताजा आख्या में स्पष्ट किया गया है कि नामांतरण प्रक्रिया में वास्तविक तथ्यों को नजरंदाज कर कीमती संपत्ति एक संस्था के नाम दर्ज कर दी गई है।
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घटनाक्रम के मुताबिक उक्त संपत्ति कोआपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड की थी, जोकि 19 जनवरी 1979 को गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट को बेच दी गई। इसी आधार पर तत्कालीन नगर पालिका के अभिलेखों में आदर्श नगर स्थित यह संपत्ति गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट के नाम दर्ज कर दी गई। बाद में नाटकीय घटनाक्रम के तहत हाउसिंग सोसायटी के अन्य सदस्यों ने इस पर एतराज जताते हुए स्वामी गंगा गिरि ट्रस्ट के खिलाफ फास्ट ट्रैक अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया। कोर्ट ने ट्रस्ट के नाम की गई संपत्ति की रजिस्ट्री को अमान्य घोषित कर दिया। इसी क्रम में कोर्ट के निर्णय को संलग्न करते हुए उक्त संपत्ति को कोआपरेटिव सोसायटी के नाम दर्ज करने के लिए पालिका में पेश किया गया। मजे की बात ये रही कि पालिका प्रशासन ने 10 सितंबर 2007 से उक्त आवेदन पर ध्यान ही नहीं दिया।
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रातों रात ट्रस्ट के नाम दर्ज की गई संपत्ति
हाउसिंग सोसायटी के जिस आवेदन पर कई साल तक पालिका प्रशासन ने गौर ही नहीं फरमाया उसे नगर निगम अफसरों ने रातों रात संपन्न कर डाला। इस कारनामे की शुरुआत 11 जनवरी 2019 को शुरू हुई। रत्नेश नाथ नामक व्यक्ति ने आदर्श नगर स्थित उक्त संपत्ति का भवन कर निर्धारण करने का आवेदन किया। कर विभाग को गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट के नाम संपत्ति दर्ज करने के लिए शपथपत्र भी जमा किया गया। इसके बावजूद आवेदक का ट्रस्ट से क्या संबंध है, इसका कोई उल्लेख नही किया गया। इसी क्रम में सहायक नगर आयुक्त ने कर अधीक्षक को और कर अधीक्षक ने निरीक्षक को मौके की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में 21 जनवरी को कर अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट दी और चार फरवरी 2019 को निगम ने संपत्ति गंगा गिरि ट्रस्ट के नाम दर्ज कर दी गई।
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कोर्ट आदेश भी दरकिनार किए गए
नगर के बीच बेशकीमती संपत्ति की नामांतरण प्रक्रिया जिस आपाधापी में निपटाई गई वह हैरान कर देने वाली है। मजे की बात है कि संपत्ति से जुड़ी फाइल को कर विभाग के बाबू से भी अलग रखा गया। जब नामांतरण प्रक्रिया पूरी हो गई तब संबंधित क्लर्क के पास आख्या के लिए भेजी गई। इसी आख्या ने नगर निगम के अफसरों की सारी पोल खोल दी है। आख्या में स्पष्ट किया गया है कि उक्त संपत्ति गंगा गिरि स्मारक ट्रस्ट की है ही नहीं। नामांतरण करते समय विभाग के अफसरों ने कोर्ट के आदेश और आपत्तियों को नजरअंदाज किया है।
झूठा निकला जांच समिति गठित करने का दावा
इस मामले में मेयर अनिता ममगाईं ने जांच समिति बनाने की बात कही थी। इस समिति में तत्कालीन मुख्य नगर आयुक्त, सहित क्षेत्रीय पार्षद भी शामिल होना बताया गया था। बृहस्पतिवार को जब उक्त जांच समिति की रिपोर्ट के बारे में मेयर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मामले को लेकर बैठक होगी। जांच समिति की रिपोर्ट आ गई है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। हास्यास्पद पहलू ये है कि जांच समिति गठित करने का जो दावा मेयर की ओर से किया गया था वह विरोधाभासों में उलझ गया है। तथाकथित जांच समिति में शामिल पार्षद अजीत सिंह गोल्डी का कहना है कि कोई जांच गठित नहीं की गई थी। पार्षद ने बताया कि मेयर ने समिति गठित करने से खुद ही मना कर दिया था।
आदर्श नगर स्थित उक्त संपत्ति का मामला विवादित है। ऐसे मामले में निगम अफसरों को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी। फिलहाल मामला मेरे संज्ञान में है। विधिक राय ली जा रही है। जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
- चतर सिंह चौहान, मुख्य नगर आयुक्त, ऋषिकेश