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Rishikesh News: डेढ़ साल की मासूम के लिए वरदान साबित हुआ एम्स, नया जीवन दिया
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I- 12 दिनों से सांस नली में फंसा था मूंगफली का दाना, चिकित्सकों ने निकाला
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I- नमकीन खाते समय हुई घटना, अल्ट्राथिन ब्रोंकोस्कोपी से किया निदानI
सांस नली में 12 दिनों से फंसे मूंगफली के दाने को निकाल कर एम्स के चिकित्सकों ने डेढ़ साल की बच्ची को जीवनदान दिया है। बच्ची को देहरादून के एक बड़े निजी अस्पताल से एम्स रेफर किया गया था। एम्स के चिकित्सकों ने उच्च तकनीक आधारित ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया अपनाकर बच्ची की सांस की नली में फंसे मूंगफली के दाने को बाहर निकालने में सफलता पाई।
बीते 4 मार्च को देहरादून के एक बड़े निजी अस्पताल से रेफर कर बच्ची को एम्स लाया गया था। एम्स पहुंचने पर पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग के चिकित्सकों ने बच्ची के स्वास्थ्य की जांच की। इस विभाग की विभागाध्यक्ष संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह हैं। प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में डॉक्टरों की टीम ने सभी आवश्यक जांच करने के बाद अल्ट्राथिन ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया।
पल्मोनरी विभाग के डॉ. मयंक मिश्रा के सुपरविजन में डॉक्टरों की टीम ने श्वास नली में फंसे मूंगफली के दाने को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। टीम में डॉ. निर्वाण वैश्य के अलावा पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग की डॉ. खुशबू तनेजा और एनेस्थेशिया विभाग के डॉ. गौरव जैन आदि शामिल रहे।
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Iमूंगफली खाते समय फंसा था दाना गले मेंI
लक्सर (रुड़की) निवासी लगभग डेढ़ साल की बच्ची 21 फरवरी को अपने चार वर्षीय भाई के साथ बैठी थी। भाई को नमकीन खाते देख मासूम ने भी कुछ दाने अपने मुंह में डाल दिए। इस दौरान मूंगफली का एक दाना उसके गले में अटक गया और कुछ देर बाद सांस की नली में फंस गया। बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे पहले रुड़की और फिर देहरादून के एक बड़े अस्पताल में ले गए थे।
Iछोटे बच्चों की देखरेख में रखें सावधानीI
डॉ. मयंक ने बताया कि मूंगफली के दाने का यह अंश 8 मिमी साइज का था। उन्होंने बताया कि चिकित्सीय निगरानी हेतु बच्ची को 5 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा गया था। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और पिछले सप्ताह उसे एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है। प्रो. गिरीश सिंधवानी ने कहा कि परिजनों को चाहिए कि छोटी उम्र के बच्चों की देखरेख के प्रति विशेष सावधानी बरतें।
Iक्या है अल्ट्राथिन ब्रोंकोस्कोपीI
अल्ट्राथिन बोंकोस्कोपी तकनीक में एक विशेष प्रकार के पतले ब्रोंकोस्कोप का उपयोग किया जाता है। ब्रोंकोस्कोपी उपकरण एक ट्यूब के समान होता है, जो मरीज के गले में प्रवेश कराया जाता है। डॉ. मयंक ने बताया कि यह प्रक्रिया करने से पहले मरीज को बेहोश करने की आवश्यकता होती है। हालांकि यह प्रक्रिया बेहद जोखिम भरी है, लेकिन इस तकनीक से सांस की नली में फंसे भोज्य पदार्थ के छोटे से छोटे कण को भी बाहर निकाला जा सकता है।
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Iपीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग विशेष तौर से छोटे बच्चों के श्वास रोग संबंधी इलाज के लिए ही बना है। यह बच्ची बहुत ही क्रिटिकल स्थिति में एम्स पहुंची थी। अनुभवी व उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम बोंकोस्कोपी की आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बच्ची का जीवन बचाने में सफल रही। - प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स व एचओडी पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभागI
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I- 12 दिनों से सांस नली में फंसा था मूंगफली का दाना, चिकित्सकों ने निकाला
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I- नमकीन खाते समय हुई घटना, अल्ट्राथिन ब्रोंकोस्कोपी से किया निदानI
सांस नली में 12 दिनों से फंसे मूंगफली के दाने को निकाल कर एम्स के चिकित्सकों ने डेढ़ साल की बच्ची को जीवनदान दिया है। बच्ची को देहरादून के एक बड़े निजी अस्पताल से एम्स रेफर किया गया था। एम्स के चिकित्सकों ने उच्च तकनीक आधारित ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया अपनाकर बच्ची की सांस की नली में फंसे मूंगफली के दाने को बाहर निकालने में सफलता पाई।
बीते 4 मार्च को देहरादून के एक बड़े निजी अस्पताल से रेफर कर बच्ची को एम्स लाया गया था। एम्स पहुंचने पर पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग के चिकित्सकों ने बच्ची के स्वास्थ्य की जांच की। इस विभाग की विभागाध्यक्ष संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह हैं। प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में डॉक्टरों की टीम ने सभी आवश्यक जांच करने के बाद अल्ट्राथिन ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया।
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पल्मोनरी विभाग के डॉ. मयंक मिश्रा के सुपरविजन में डॉक्टरों की टीम ने श्वास नली में फंसे मूंगफली के दाने को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। टीम में डॉ. निर्वाण वैश्य के अलावा पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग की डॉ. खुशबू तनेजा और एनेस्थेशिया विभाग के डॉ. गौरव जैन आदि शामिल रहे।
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Iमूंगफली खाते समय फंसा था दाना गले मेंI
लक्सर (रुड़की) निवासी लगभग डेढ़ साल की बच्ची 21 फरवरी को अपने चार वर्षीय भाई के साथ बैठी थी। भाई को नमकीन खाते देख मासूम ने भी कुछ दाने अपने मुंह में डाल दिए। इस दौरान मूंगफली का एक दाना उसके गले में अटक गया और कुछ देर बाद सांस की नली में फंस गया। बच्ची की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे पहले रुड़की और फिर देहरादून के एक बड़े अस्पताल में ले गए थे।
Iछोटे बच्चों की देखरेख में रखें सावधानीI
डॉ. मयंक ने बताया कि मूंगफली के दाने का यह अंश 8 मिमी साइज का था। उन्होंने बताया कि चिकित्सीय निगरानी हेतु बच्ची को 5 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा गया था। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और पिछले सप्ताह उसे एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है। प्रो. गिरीश सिंधवानी ने कहा कि परिजनों को चाहिए कि छोटी उम्र के बच्चों की देखरेख के प्रति विशेष सावधानी बरतें।
Iक्या है अल्ट्राथिन ब्रोंकोस्कोपीI
अल्ट्राथिन बोंकोस्कोपी तकनीक में एक विशेष प्रकार के पतले ब्रोंकोस्कोप का उपयोग किया जाता है। ब्रोंकोस्कोपी उपकरण एक ट्यूब के समान होता है, जो मरीज के गले में प्रवेश कराया जाता है। डॉ. मयंक ने बताया कि यह प्रक्रिया करने से पहले मरीज को बेहोश करने की आवश्यकता होती है। हालांकि यह प्रक्रिया बेहद जोखिम भरी है, लेकिन इस तकनीक से सांस की नली में फंसे भोज्य पदार्थ के छोटे से छोटे कण को भी बाहर निकाला जा सकता है।
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Iपीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग विशेष तौर से छोटे बच्चों के श्वास रोग संबंधी इलाज के लिए ही बना है। यह बच्ची बहुत ही क्रिटिकल स्थिति में एम्स पहुंची थी। अनुभवी व उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम बोंकोस्कोपी की आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बच्ची का जीवन बचाने में सफल रही। - प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स व एचओडी पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभागI