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70 साल बाद भी नसीब नहीं पक्की सड़क
alok panwar
Updated Sat, 10 Sep 2016 01:41 AM IST
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सड़क
- फोटो : amar ujala
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इस विडंबना ही कहेंगे कि देश को आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी कई गांव ऐसे हैं, जो बुनियादी सुविधाओं की बांट जोह रहे हैं। इनमें से एक है राज्य की राजधानी दून के करीब खलदार गांव, जहां के ग्रामीणों को अभी तक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। मुख्य मार्ग से गांव तक पथरीली पगडंडी पर पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं।
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गांवों में सरकार के विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
डोईवाला विकास खंड के रखवाल ग्रामसभा का खलदार गांव इसकी बानगी है। जहां विकास की किरण आज तक नहीं पहुंच सकी है। गांव को बसे करीब 100 साल हो चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। ऐसे में यातायात की सुविधा दूर की कौड़ी है। यह हाल तब है, जब खलदार गांव राज्य की राजधानी से महज 30 किलोमीटर दूर है।
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हैरत की बात यह कि ग्रामीण जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी समेत कई सरकारी महकमों से पगडंडी को सड़क में तब्दील करने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में ग्रामीण भोगपुर-थानों संपर्क मार्ग से गांव तक करीब चार किलोमीटर दूरी पैदल नापने को मजबूर हैं। आजाद होने के बाद गुलामी जैसा जीवन व्यतीत करना ग्रामीणों की नियती बन गई है।
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समस्या ग्रामीणों की जुबानी
आजादी के क्या मायने होते हैं, पता नहीं। सुविधाओं के अभाव में कई परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। सड़क के अभाव में यातायात सुविधा नहीं है। ऐसे में शाम ढलने से पहले गांव पहुंचना मजबूरी होती है। - किशोरीलाल
चुनाव के समय नेता विकास के बड़े-बड़े वायदे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद सबकुछ भूल जाते हैं। सड़क गांव के विकास की पहली सीढ़ी है और वह ही ग्रामीणों को नसीब नहीं है। - राजपाल
गांव में केवल प्राथमिक विद्यालय है। पांचवी के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए रानीपोखरी, डोईवाला और दून जाना पड़ता है। गांव में पक्की सड़क नहीं है। कई परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। उनके खंडहरनुमा आवास इसकी निशानी है। - रविंद्र
हैरानी होती है कि गांव में पक्की सड़क तो दूर कच्चा रास्ता भी नहीं है। गांव की जनता ने इस बार उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है। गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जद्दोजहद जारी है। प्रधानमंत्री सड़क रोजगार योजना में सड़क का प्रस्ताव नालापानी दून स्थित संबंधित कार्यालय को भेजा है। सड़क का सपना साकार होने की उम्मीद है। - दीपक चंद, प्रधान रखवाल ग्रामसभा