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200 पक्के और कच्चे अवैध निर्माण ध्वस्त

Tue, 05 Nov 2019 01:27 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 05 Nov 2019 01:27 AM IST
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200 pucca and raw illegal construction demolished
चंद्रभागा नदी से अतिक्रमण हटाने के दौरान जमा हुई भीड़। - फोटो : RISHIKESH
चंद्रभागा नदी किनारे पसरे अतिक्रमण पर एक बार फिर नगर निगम की जेसीबी गरजी। लोगों के भारी विरोध के बीच प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई और पुलिस विभाग ने संयुक्त कार्रवाई कर यहां फैले कच्चे और पक्के अतिक्रमण को ध्वस्त किया। इस दौरान करीब 200 अवैध निर्माणों को जेसीबी की सहायता से ध्वस्त किया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच कई बार नोंकझोंक भी हुई, लेकिन अतिक्रमणकारियों की एक न चल पाई। एनजीटी ने एक व्यक्ति की शिकायत पर बीते 11 जून को चंद्रभागा नदी का निरीक्षण किया था। इसके बाद 261 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर 24 जुलाई तक अपना पक्ष रखने को कहा था। इस क्रम में 261 में से केवल 176 अतिक्रमणकारी नगर निगम में प्रस्तुत हुए और नदी किनारे बसावट का कोई विधिक आदेश, पट्टा, अधिकार या अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए।
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सोमवार सुबह करीब 10 बजे तहसीलदार रेखा आर्य के नेतृत्व मेें नगर निगम, सिंचाई और पुलिस विभाग की टीम दो जेसीबी और पुलिस के 30 पुरुष आरक्षी, 10 महिला आरक्षी, एक प्लाटून पीएसी और पांच एसआई के संग चंद्रभागा नदी किनारे फैले अतिक्रमण को हटाने के लिए पहुंची। मौके पर मौजूद महिलाओं ने तहसीलदार सहित टीम के समक्ष विरोध जताना शुरू कर दिया। इस पर तहसीलदार रेखा आर्या ने महिलाओं को काफी समझाया और वहां से हटने के लिए कहा। करीब सवा घंटे तक अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई बाधित रही। इसके बाद तहसीलदार ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों से वार्ता की और पुलिस को भीड़ हटाने व नगर निगम को अतिक्रमण ध्वस्त करने के लिए निर्देशित किया। तहसीलदार रेखा आर्य ने बताया कि मंगलवार को भी चंद्रभागा नदी किनारे अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी रहेगा।
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लोग मांगते रहे दस्तावेज, टीम ने किया नजरंदाज
चंद्रभागा नदी किनारे झुग्गी झोपड़ियों को हटाने पहुंची टीम को तकनीकी तौर पर भी काफी देर तक असमंजस स्थिति का सामना करना पड़ा। आशियाना टूटता देख लोग अधिकारियों से कार्रवाई के दस्तावेज दिखाने की जिद करने लगे। इस पर अधिकारी भी गोलमोल जवाब देते हुए नजर आए। वहीं एआईसीसी सदस्य जयेंद्र रमोला ने अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई को प्रशासन का तानाशाही रवैया करार दिया। इस संबंध में तहसीलदार रेखा आर्य और एआईसीसी सदस्य जयेंद्र रमोला के बीच काफी बहस भी हुई। कार्रवाई का विरोध जताने पर पुलिस ने जयेंद्र रमोला को गिरफ्तार किया।
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आशियान टूटता देख बेहोश हुई महिला
चंद्रभागा नदी किनारे हुए अतिक्रमण को हटवाने के दौरान तैयारियों में गंभीर खामियां भी देखने को मिलीं। विरोध का अंदेशा होते हुए भी प्रशासन ने मौके पर न तो फायर ब्रिगेड वाहन की पहले से व्यवस्था की न ही एंबुलेंस उपलब्ध कराया गया। आशियाना ध्वस्त होते देख एक महिला सदमे से बेहोश हो गई। आननफानन में आसपास मौजूद लोगों ने दोपहिया वाहन से महिला को सरकारी अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन की पहल पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड वाहन अपराह्न करीब एक बजे के बाद पहुंच पाया।
महिला ने जेसीबी चालक पर फेंका पत्थर
चंद्रभागा नदी में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान एक महिला गुस्से में आपा खो बैठी। महिला ने झुग्गी ध्वस्त कर रहे जेसीबी चालक पर पत्थर दे मारा। इस घटना के बाद माहौल काफी गर्मा गया। पुलिस ने तत्काल जेसीबी की ओर दौड़ लगाई और महिला संग उसके पति को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को बल प्रयोग करता देख लोगों में आक्रोश फैल गया। इस दौरान महिलाओं और पुलिस के बीच तीखी नोंक झोंक हुई। उन्होंने ईंट मारने वाली महिला और उसके पति को छोड़े जाने की मांग की। स्थिति को भांपते हुए पुलिस ने महिला और उसके पति को छोड़ दिया।
झुग्गी वासियों को वितरित किया भोजन
चंद्रभागा नदी से अतिक्रमण हटाने के दौरान भूख प्यास से व्याकुल झुग्गी झोपड़ी वासियों को दोपहर बाद प्रशासन की ओर से खाना और बिस्कुट बांटा गया। इस दौरान बच्चे बिस्कुट बांटने वाली गाड़ियों के पीछे भागते हुए नजर आए।

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मानवाधिकार आयोग के आदेश का नहीं लिया संज्ञान
ऋषिकेश। प्रशासन ने चंद्रभागा नदी से अवैध झुग्गी झोपड़ियों का अतिक्रमण तो हटाया, मगर खुले आसमान में रहने को मजबूर इन लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। यहां तक कि मानवाधिकार आयोग के आदेशों को प्रशासन ने संज्ञान में ही नहीं लिया। कुछ माह पूर्व प्रशासन की ओर से चंद्रभागा नदी में अवैध झुग्गी झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस कारण मजबूरन कई लोगों को खुले में ही दिन-रात गुजारना पड़ रहा था। इस दौरान यहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक बच्ची की मौत हो गई थी। इस संदर्भ में अमर उजाला में खबर भी प्रकाशित की गई थी। इसका संज्ञान मानवाधिकार आयोग ने लिया और जिलाधिकारी देहरादून को खुले में रहने वाले लोगों के लिए इलाज समेत खाने, पीने और छत की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मगर अभी तक इन लोगों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। आलम यह है कि इन लोगों ने चंद्रभागा नदी के बीच में ही अपने सामान का ढेर लगा दिया है और उसी पर खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं।

 अतिक्रमण कार्रवाई का विरोध जताने पर एआईसीसी सदस्य जयेंद्र रमोला को गिरफ्तार करती पुलिस।

अतिक्रमण कार्रवाई का विरोध जताने पर एआईसीसी सदस्य जयेंद्र रमोला को गिरफ्तार करती पुलिस।- फोटो : RISHIKESH

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