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उर्दू अनुवादकों को आबकारी इंस्पेक्टर पद पर तैनाती देने की जांच शुरू

Sun, 24 Feb 2019 01:58 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 24 Feb 2019 01:58 AM IST
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उर्दू अनुवादकों को आबकारी इंस्पेक्टर पद पर तैनाती देने की जांच शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। आबकारी विभाग में नियमों के विरुद्घ उर्दू अनुवादकों को आबकारी इंस्पेक्टर के पद पर तैनाती देने के मामले में जांच आखिरकार शुरू हो गई है। वर्षों से अनियमित तरीके से हुई नियुक्ति पर सुस्त पड़े शासन ने ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद संज्ञान लिया। इसी के तहत अब संयुक्त आबकारी आयुक्त एसके कांबोज को मामले की पड़ताल का जिम्मा सौंपा गया है। गौरतलब है कि आबकारी विभाग में तदर्थ तैनाती पाए उर्दू अनुवादकों को साजिशन आबकारी इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति दे दी गई है। इस मामले में कोर्ट और शासन ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि उर्दू अनुवादकों को आबकारी इंस्पेक्टर के पद पर तैनाती नहीं दी जा सकती।
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इतना ही नहीं हाईकोर्ट के ताजा आदेशों के तहत कहा गया कि तदर्थ नियुक्ति पाए हुए वे कर्मचारी जो विभिन्न न्यायालयों से स्टे लाकर नौकरी कर रहे हैं उनकी सेवा स्वत: समाप्त मानी जाए। दिलचस्प पहलू यह है कि शासन ने कोर्ट के आदेशों का संज्ञान लेते हुए शासनादेश तो जारी कर दिया लेकिन नियम विरुद्घ नियुक्तियां होती रहीं। हालात यह रहे कि उर्दू अनुवादक से आबकारी इंस्पेक्टर बनाए गए एक अफसर की मूल पत्रावली भी सेवा पुस्तिका से गायब है। इस मामले में जांच अधिकारी एसके कांबोज ने बताया कि इस मामले में जांच चल रही है। सभी पहलुओं पर जांच करने के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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मनमर्जी से आवंटित की गईं दुकानें
नियुक्ति मामले तक ही गड़बड़ी सीमित नहीं है। आबकारी विभाग में इंस्पेक्टरों की तैनाती स्थल को लेकर भी खेल चल रहा है। दरअसल जिले में शराब की दुकानों से राजस्व वसूली को लेकर सेक्टर निर्धारित हैं। लिखित में कार्य क्षेत्र का निर्धारण होने के बावजूद मुख्यालय में बैठे अफसरों और जिला आबकारी अधिकारी मिलीभगत से चहेते इंस्पेक्टरों को मनचाही तैनाती दे दी गई है। हालात ये हैं कि सेक्टर-3 रिस्पना बाईपास की दुकान जोकि शास्त्रीनगर में खुली है, उसे सेक्टर-1 के आबकारी इंस्पेक्टर देख रहे हैं। मजे की बात ये है कि फाइलों में भी ये अनियमितता कई महीनों से दर्ज हो रही है। अहम मुद्दा ये है कि जानबूझकर तैनाती का उलटफेर किया गया है जिस पर मुख्यालय में बैठे अफसर भी नजरंदाज कर रहे हैं।
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