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बाल विवाह महिला के लिए एक अभिशाप
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । बाल विवाह पूरे समाज के लिए अभिशाप है। इसे रोकने के लिए बने कानून को कठोरता से लागू करवाना चाहिए। बाल विवाह पर रोक लगना तभी संभव है जब हम खुद जागरूक होकर दूसरों में भी अलख जगाना शुरू करें। रविवार को गढ़ी श्यामपुर में अमर उजाला की ओर से मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समाज सेवी सरोज तोमर ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बाल विवाह महिला गरिमा के लिए एक अभिशाप है। इसके लिए कानून तो बनाया गया है लेकिन जमीनी स्तर पर कहीं-कहीं इसका पालन नहीं हो पा रहा है।
पूर्व में लोग बेटी के 14 वर्ष पार करने के बाद शादी कर देते थे। वर्तमान में बाल विवाह के प्रति काफी हद तक लोगों में जागरुकता आई है। अभी कई प्रदेशों के दूर दराज के इलाकों में पिछड़ी जाति के लोग आज भी बाल विवाह की रीति को अपना रहे हैं। इसके लिए सरकार को इन क्षेत्रों में जन जागरुकता अभियान चलाकर ऐसे लोगों को सजग करना चाहिए। बाल विवाह करना यानी उस लड़की के पूरे जीवन को बर्बाद करने के समान है। लड़की की शादी करने के लिए सरकार ने कानून बनाकर उम्र तय की है। नाबालिग उम्र में लड़की नासमझ होती है। ऐसे में उसे शादी के बंधन में उलझाना उचित नहीं है। इसके लिए हम सब को जागरूक होकर दूसरे को भी सजग प्रहरी बनाना होगा।
छोटी उम्र में लड़की की शादी करना उसके जीवन से खिलवाड़ है। अभी भी कई जगहों पर देखने को मिलता है कि छोटी उम्र में ही लड़कियों को विवाह के बंधन में बांध दिया जाता है। इसका खामियाजा उसे उसी पूरी जिंदगी भुगतना पड़ता है।
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- शाकुंबरी देवी समाज सेविका
बाल विवाह पर सरकार को कठोर कानून बनाकर उस पर अमल भी करना चाहिए। कई बार देखने को मिलता है कि कानून तो बनाए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उसका पालन नहीं होता है।
- सरोज तोमर गृहणी
बाल विवाह महिला के लिए एक अभिशाप है जिसका खामियाजा उसे पूरी जिंदगी भुगताना पड़ता है। इसके लिए सरकारों को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। इससे बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।
- लक्ष्मी कलूड़ा पंचायत सदस्य
बाल विवाह पर कानून तो बनाया गया है लेकिन जागरुकता के अभाव में अब भी पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। इसके लिए हम सब को जागरूक होना पड़ेगा। इससे हम आस पड़ोस को भी मानसिक परिपक्व बना सकते हैं।
- सुषमा रयाल, गृहणी
वर्तमान में बाल विवाह के प्रति महिलाएं काफी हद तक जागरूक हो गई हैं। अभी दूर दराज के इलाकों में जानकारी के अभाव के चलते बाल विवाह पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। ऐसे लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
- सुनिता रावत गृहणी
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पूर्व में लोग बेटी के 14 वर्ष पार करने के बाद शादी कर देते थे। वर्तमान में बाल विवाह के प्रति काफी हद तक लोगों में जागरुकता आई है। अभी कई प्रदेशों के दूर दराज के इलाकों में पिछड़ी जाति के लोग आज भी बाल विवाह की रीति को अपना रहे हैं। इसके लिए सरकार को इन क्षेत्रों में जन जागरुकता अभियान चलाकर ऐसे लोगों को सजग करना चाहिए। बाल विवाह करना यानी उस लड़की के पूरे जीवन को बर्बाद करने के समान है। लड़की की शादी करने के लिए सरकार ने कानून बनाकर उम्र तय की है। नाबालिग उम्र में लड़की नासमझ होती है। ऐसे में उसे शादी के बंधन में उलझाना उचित नहीं है। इसके लिए हम सब को जागरूक होकर दूसरे को भी सजग प्रहरी बनाना होगा।
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छोटी उम्र में लड़की की शादी करना उसके जीवन से खिलवाड़ है। अभी भी कई जगहों पर देखने को मिलता है कि छोटी उम्र में ही लड़कियों को विवाह के बंधन में बांध दिया जाता है। इसका खामियाजा उसे उसी पूरी जिंदगी भुगतना पड़ता है।
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- शाकुंबरी देवी समाज सेविका
बाल विवाह पर सरकार को कठोर कानून बनाकर उस पर अमल भी करना चाहिए। कई बार देखने को मिलता है कि कानून तो बनाए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उसका पालन नहीं होता है।
- सरोज तोमर गृहणी
बाल विवाह महिला के लिए एक अभिशाप है जिसका खामियाजा उसे पूरी जिंदगी भुगताना पड़ता है। इसके लिए सरकारों को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। इससे बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।
- लक्ष्मी कलूड़ा पंचायत सदस्य
बाल विवाह पर कानून तो बनाया गया है लेकिन जागरुकता के अभाव में अब भी पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। इसके लिए हम सब को जागरूक होना पड़ेगा। इससे हम आस पड़ोस को भी मानसिक परिपक्व बना सकते हैं।
- सुषमा रयाल, गृहणी
वर्तमान में बाल विवाह के प्रति महिलाएं काफी हद तक जागरूक हो गई हैं। अभी दूर दराज के इलाकों में जानकारी के अभाव के चलते बाल विवाह पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। ऐसे लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
- सुनिता रावत गृहणी