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मृतकों के नाम बिल भेजकर किराया वसूल रहा निगम
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। शासनादेश के मुताबिक 187 दुकानों से सर्किल रेट पर किराया न वसूलने के मामले में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नगर निगम की ओर से आंख मूंदकर मृतकों के नाम पर किराएदारी का बिल जारी किया जा रही है और वसूली भी हो रही है। निगम के अफसर कभी झांकने भी नहीं गए कि आखिर उनकी संपत्तियों पर कौन काबिज है और किराया किससे वसूल रहे हैं। मामला नेहरू पार्क, रेलवे रोड का है। यहां निगम की दुकानें आवंटित की गई हैं। इनमें से कई मूल आवंटियों का देहांत हो चुका है, जिसके बाद दुकानों पर अवैध कब्जा हो चुका है।
निगम में कर विभाग की कृपा से ये खेल पिछले करीब 15 सालों से चल रहा है। अवैध कब्जेदारों और कर विभाग के बाबुओं की मिलीभगत से यह गोरखधंधा चल रहा है। इसी का नतीजा है कि दफ्तरों में बैठकर कर विभाग के अफसर और बाबू उन मूल आवंटियों के नाम पर टैक्स बिल जारी कर रहे हैं जो वर्षों पहले दिवंगत हो चुके हैं। इनमें एक मामला नेहरू पार्क की दुकान नंबर-9 का है। इसका किराया आज भी संतलाल के नाम पर जारी हो रहा है। इसके अलावा दुकान नंबर-3 का मामला भी यही है। इसका भी बिल राजेंद्र जैन के नाम पर जारी हो रहा है, जिनका देहांत हो चुका है।
दरअसल कर विभाग के बाबू और अफसर चहेतों को इन दुकानों को देकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जानबूझकर मृतकों के नाम पर किराया बिल जारी किया जा रहा है और कब्जेदार उन्हीं के नाम से आज भी भुगतान कर रहे हैं। देहांत होने के बावजूद मूल आवंटियों के नाम कर विभाग के अफसरों और बाबुओं ने इसलिए जारी रखे ताकि नए सिरे से आवंटन की नौबत ही न आने पाए।
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कर विभाग का बाबू है घपले का मास्टरमाइंड
निगम में कर विभाग के बाबू इतने हुनरमंद हैं कि अफसरों को भी भ्रमित करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पूर्व में हुए पत्राचार इस कारस्तानी की कलई खोल रहे हैं। वर्ष 2016 में पालिका प्रबंधन के दौरान विभागीय पत्राचार में खुलासा हुआ कि नेहरू पार्क की करीब आधा दर्जन दुकानों को बेदखली का आदेश जारी हुआ था। तत्कालीन बाबू ने बेदखली के नोटिस को दबा दिया। मजे की बात यह है कि जिस बाबू ने वर्ष 2016 में अवैध कब्जे करवाने का खेल किया और खुद भी परिजनों के नाम दुकानें आवंटित करवाई, उसी को फिर से कर विभाग में अहम जिम्मेदारी दे दी गई है। नेहरू पार्क में करीब 6 दुकानें हैं, जोकि गड़बड़ी से चल रही हैं।
आश्रमों और दुकानों पर अवैध कब्जों की छानबीन शुरू
जो आश्रम यात्रियों को ठौर देने के लिए बने थे, उनमें आज अवैध कब्जेदारों का अड्डा है। इस संदर्भ में निगम की ओर से जांच भी शुरू हो गई है। इसके तहत पड़ताल की जा रही है कि निगम की कितनी दुकानों पर अवैध कब्जेदार काबिज हैं। ऐसी दुकानों के खिलाफ नोटिस भेजकर बेदखली की तैयारी है।
कोट्स
ये तो बहुत गंभीर मामला है। यदि मूल आवंटी का देहांत हो चुका है तो नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। मैं सहायक नगर आयुक्त से कहूंगा कि जिम्मेदार कर्मचारी या अफसर को तलब कर स्पष्टीकरण मांगे। इस मामले में जांच करवाई जाएगी।
- प्रेम लाल, मुख्य नगर आयुक्त
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निगम में कर विभाग की कृपा से ये खेल पिछले करीब 15 सालों से चल रहा है। अवैध कब्जेदारों और कर विभाग के बाबुओं की मिलीभगत से यह गोरखधंधा चल रहा है। इसी का नतीजा है कि दफ्तरों में बैठकर कर विभाग के अफसर और बाबू उन मूल आवंटियों के नाम पर टैक्स बिल जारी कर रहे हैं जो वर्षों पहले दिवंगत हो चुके हैं। इनमें एक मामला नेहरू पार्क की दुकान नंबर-9 का है। इसका किराया आज भी संतलाल के नाम पर जारी हो रहा है। इसके अलावा दुकान नंबर-3 का मामला भी यही है। इसका भी बिल राजेंद्र जैन के नाम पर जारी हो रहा है, जिनका देहांत हो चुका है।
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दरअसल कर विभाग के बाबू और अफसर चहेतों को इन दुकानों को देकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जानबूझकर मृतकों के नाम पर किराया बिल जारी किया जा रहा है और कब्जेदार उन्हीं के नाम से आज भी भुगतान कर रहे हैं। देहांत होने के बावजूद मूल आवंटियों के नाम कर विभाग के अफसरों और बाबुओं ने इसलिए जारी रखे ताकि नए सिरे से आवंटन की नौबत ही न आने पाए।
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कर विभाग का बाबू है घपले का मास्टरमाइंड
निगम में कर विभाग के बाबू इतने हुनरमंद हैं कि अफसरों को भी भ्रमित करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पूर्व में हुए पत्राचार इस कारस्तानी की कलई खोल रहे हैं। वर्ष 2016 में पालिका प्रबंधन के दौरान विभागीय पत्राचार में खुलासा हुआ कि नेहरू पार्क की करीब आधा दर्जन दुकानों को बेदखली का आदेश जारी हुआ था। तत्कालीन बाबू ने बेदखली के नोटिस को दबा दिया। मजे की बात यह है कि जिस बाबू ने वर्ष 2016 में अवैध कब्जे करवाने का खेल किया और खुद भी परिजनों के नाम दुकानें आवंटित करवाई, उसी को फिर से कर विभाग में अहम जिम्मेदारी दे दी गई है। नेहरू पार्क में करीब 6 दुकानें हैं, जोकि गड़बड़ी से चल रही हैं।
आश्रमों और दुकानों पर अवैध कब्जों की छानबीन शुरू
जो आश्रम यात्रियों को ठौर देने के लिए बने थे, उनमें आज अवैध कब्जेदारों का अड्डा है। इस संदर्भ में निगम की ओर से जांच भी शुरू हो गई है। इसके तहत पड़ताल की जा रही है कि निगम की कितनी दुकानों पर अवैध कब्जेदार काबिज हैं। ऐसी दुकानों के खिलाफ नोटिस भेजकर बेदखली की तैयारी है।
कोट्स
ये तो बहुत गंभीर मामला है। यदि मूल आवंटी का देहांत हो चुका है तो नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। मैं सहायक नगर आयुक्त से कहूंगा कि जिम्मेदार कर्मचारी या अफसर को तलब कर स्पष्टीकरण मांगे। इस मामले में जांच करवाई जाएगी।
- प्रेम लाल, मुख्य नगर आयुक्त