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Pithoragarh News: अस्कोट के युवाओं को खेल मैदान की सौगात चाहिए
Sun, 31 Dec 2023 09:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 31 Dec 2023 09:45 PM IST
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अस्कोट। संवाद
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट के युवाओं को खेल मैदान का इंतजार है। खेल मैदान नहीं होने से प्रतियोगिताओं के आयोजन को लेकर यहां काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। युवा प्रतिभाओं को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल पाता है। वे अपने स्तर से ही फुटबाल, क्रिकेट, दौड़ आदि की तैयारियां करते हैं। वर्तमान में प्रतियोगिताएं आईटीआई मैदान में होती हैं।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद शासन-प्रशासन से खेल मैदान के लिए पत्राचार किया गया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। वहीं अन्य क्षेत्रों में खेल मैदान के साथ तहसील, पाॅलीटेक्निक, डिग्री कॉलेज आदि भी खोले गए। अस्कोट रियासत के परगना अस्कोट के अंतर्गत 900 वर्ग मील के इलाकों में कुछ विकास तो हुआ लेकिन राजधानी अस्कोट राजनीति की भेंट चढ़ा। आज यहां के युवा खेल मैदान के लिए भी तरस रहे हैं।
खेल मैदान नहीं होने के कारण युवा प्रतिभाओं को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल पाता है। क्षेत्रीय युवओं के लिए खेल मैदान होना बेहद जरूरी है।
- पुरुषोत्तम उपाध्याय, स्थानीय।
खेल मैदान नहीं होने के कारण यहां पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी बहुत कम होता है। खेल आयोजन समिति को कई बार इस बारे में सोचना पड़ता है।
- वासुदेव जोशी, स्थानीय।
राजशाही खत्म होने के बाद इस क्षेत्र की रौनक घटती रही। लोगों ने कोशिश भी की लेकिन जनता की सुनने वाला कोई नहीं है। बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान जरूरी है।
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- राजेंद्र पाल, स्थानीय।
खेल मैदान को लेकर विधायक, तहसील कार्यालय और आईटीआई विभाग के अधिकारियों से भी वार्ता की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। खेल मैदान का मामला सीएम के सामने रखा जाएगा।
- तरुण पाल, एकता मंच।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद शासन-प्रशासन से खेल मैदान के लिए पत्राचार किया गया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। वहीं अन्य क्षेत्रों में खेल मैदान के साथ तहसील, पाॅलीटेक्निक, डिग्री कॉलेज आदि भी खोले गए। अस्कोट रियासत के परगना अस्कोट के अंतर्गत 900 वर्ग मील के इलाकों में कुछ विकास तो हुआ लेकिन राजधानी अस्कोट राजनीति की भेंट चढ़ा। आज यहां के युवा खेल मैदान के लिए भी तरस रहे हैं।
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खेल मैदान नहीं होने के कारण युवा प्रतिभाओं को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल पाता है। क्षेत्रीय युवओं के लिए खेल मैदान होना बेहद जरूरी है।
- पुरुषोत्तम उपाध्याय, स्थानीय।
खेल मैदान नहीं होने के कारण यहां पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी बहुत कम होता है। खेल आयोजन समिति को कई बार इस बारे में सोचना पड़ता है।
- वासुदेव जोशी, स्थानीय।
राजशाही खत्म होने के बाद इस क्षेत्र की रौनक घटती रही। लोगों ने कोशिश भी की लेकिन जनता की सुनने वाला कोई नहीं है। बच्चों और युवाओं के लिए खेल मैदान जरूरी है।
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- राजेंद्र पाल, स्थानीय।
खेल मैदान को लेकर विधायक, तहसील कार्यालय और आईटीआई विभाग के अधिकारियों से भी वार्ता की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। खेल मैदान का मामला सीएम के सामने रखा जाएगा।
- तरुण पाल, एकता मंच।