{"_id":"58d3fd024f1c1b776a1a27f7","slug":"worrying-to-manage-more-water-than-studies","type":"story","status":"publish","title_hn":"पढ़ाई से ज्यादा पानी की व्यवस्था करने की चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पढ़ाई से ज्यादा पानी की व्यवस्था करने की चिंता
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 23 Mar 2017 10:21 PM IST
विज्ञापन
कोटापंद्रपाला में तीन किलोमीटर दूर से पानी भरकर लाते परीक्षार्थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुनस्यारी तहसील के राजकीय इंटर कॉलेज कोटापंद्रपाला में उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा देने पहुंचे विद्यार्थियों को पढ़ाई से ज्यादा पानी का इंतजाम करने की चिंता हो रही है। इस परीक्षा केंद्र में जीआईसी समकोट और धामीगांव के विद्यार्थी भी परीक्षा देने के लिए आए हैं।
कोटा-मलौन पेयजल योजना 20 अप्रैल 2015 को बांसबगड़-कोटा मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान टूट गई थी। दो वर्ष बीतने को हैं, लेकिन पेयजल योजना की मरम्मत नहीं हो पाई है। सड़क का निर्माण पीएमजीएसवाई के तहत हुआ है। जल संस्थान के अधिकारी कई बार पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए लिख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
इस पेयजल योजना से जीआईसी कोटापंद्रपाला के साथ साथ कोटा गांव को पानी की सप्लाई होती थी। परीक्षार्थियों को हो रही परेशानी की जानकारी देने के लिए बृहस्पतिवार को प्रधान वीरेंद्र सुयाल जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अपर जिलाधिकारी मोहम्मद नासिर के सामने समस्या को रखा। एडीएम ने जल संस्थान डीडीहाट डिवीजन के अधिशासी अभियंता बिलाल युनूस और पीएमजीएसवाई की धारचूला इकाई के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि तीन दिन के भीतर पेयजल योजना की मरम्मत की जाए और पानी चलाया जाए।
विज्ञापन
प्रधान ने बताया कि परीक्षा देने के लिए आए विद्यार्थियों के चार पांच घंटे पानी ढोने में बर्बाद हो रहे हैं। विद्यार्थियों को चार किलोमीटर दूर खड़िक स्रोत से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। प्रधान ने बताया कि वाहनों से पानी पहुंचाने का इंतजाम संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर आक्रोश जताया कि सरकारी विभागों की लापरवाही की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने इस समस्या के बारे में मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।
विज्ञापन
कोटा-मलौन पेयजल योजना 20 अप्रैल 2015 को बांसबगड़-कोटा मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान टूट गई थी। दो वर्ष बीतने को हैं, लेकिन पेयजल योजना की मरम्मत नहीं हो पाई है। सड़क का निर्माण पीएमजीएसवाई के तहत हुआ है। जल संस्थान के अधिकारी कई बार पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को पेयजल लाइन की मरम्मत के लिए लिख चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
इस पेयजल योजना से जीआईसी कोटापंद्रपाला के साथ साथ कोटा गांव को पानी की सप्लाई होती थी। परीक्षार्थियों को हो रही परेशानी की जानकारी देने के लिए बृहस्पतिवार को प्रधान वीरेंद्र सुयाल जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अपर जिलाधिकारी मोहम्मद नासिर के सामने समस्या को रखा। एडीएम ने जल संस्थान डीडीहाट डिवीजन के अधिशासी अभियंता बिलाल युनूस और पीएमजीएसवाई की धारचूला इकाई के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि तीन दिन के भीतर पेयजल योजना की मरम्मत की जाए और पानी चलाया जाए।
विज्ञापन
प्रधान ने बताया कि परीक्षा देने के लिए आए विद्यार्थियों के चार पांच घंटे पानी ढोने में बर्बाद हो रहे हैं। विद्यार्थियों को चार किलोमीटर दूर खड़िक स्रोत से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। प्रधान ने बताया कि वाहनों से पानी पहुंचाने का इंतजाम संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर आक्रोश जताया कि सरकारी विभागों की लापरवाही की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने इस समस्या के बारे में मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।