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Pithoragarh News: नेटवर्क विहीन गांवों में अब वायरलेस नेटवर्क
Mon, 07 Sep 2026 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:17 PM IST
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चंपावत। जिले के दूरस्थ और नेटवर्क विहीन गांवों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मोबाइल कनेक्टिविटी से महरूम रहे इन क्षेत्रों में अब वायरलेस नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। करीब 4.97 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत मंच, बुड़म, ककनई और डांडा समेत अन्य बिना नेटवर्क वाले क्षेत्रों को सीधे टनकपुर से वायरलेस कनेक्टिविटी के जरिए जोड़ा जाएगा। इस पहल से सबसे बड़ा लाभ आपदा के समय त्वरित सूचनाओं के आदान-प्रदान और प्रभावी राहत-बचाव कार्यों के समन्वय में मिलने की उम्मीद है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण में स्कूलों, चिकित्सालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायतों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और पुलिस और पटवारी चौकियों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में सामान्य मोबाइल नेटवर्क की अनुपस्थिति के कारण इन दूरदराज के इलाकों से जरूरी सूचनाएं समय पर भेजने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
वायरलेस कनेक्टिविटी के शुरू होने से सरकारी संस्थानों के पास संवाद का एक मजबूत वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध हो जाएगा। खासकर मानसून के दौरान होने वाली मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के वक्त जब मोबाइल टावर ठप हो जाते हैं तब यह सेवा वरदान साबित होगी। इसके जरिये प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच सूचनाएं तेजी से पहुंच सकेंगी जिससे आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को समय रहते अंजाम दिया जा सकेगा।
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परियोजना की नियमित निगरानी की जा रही है और इसे सितंबर में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। धनराशि राज्य आपदा मोचन निधि के क्षमता विकास मद से स्वीकृत की गई है।
मनीष कुमार, डीएम, चंपावत।
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इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण में स्कूलों, चिकित्सालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायतों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और पुलिस और पटवारी चौकियों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में सामान्य मोबाइल नेटवर्क की अनुपस्थिति के कारण इन दूरदराज के इलाकों से जरूरी सूचनाएं समय पर भेजने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
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वायरलेस कनेक्टिविटी के शुरू होने से सरकारी संस्थानों के पास संवाद का एक मजबूत वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध हो जाएगा। खासकर मानसून के दौरान होने वाली मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के वक्त जब मोबाइल टावर ठप हो जाते हैं तब यह सेवा वरदान साबित होगी। इसके जरिये प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच सूचनाएं तेजी से पहुंच सकेंगी जिससे आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को समय रहते अंजाम दिया जा सकेगा।
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परियोजना की नियमित निगरानी की जा रही है और इसे सितंबर में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। धनराशि राज्य आपदा मोचन निधि के क्षमता विकास मद से स्वीकृत की गई है।
मनीष कुमार, डीएम, चंपावत।