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चौकोड़ी में 50 से अधिक ह्वाइट थ्रोटेड लाफिंगथ्रस चिड़ियों की मौत
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चौकोड़ी में मृत पड़े पक्षी।
- फोटो : PITHORAGARH
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बेड़ीनाग के चौकोड़ी में 50 से अधिक व्हाइट थ्रोटेड लाफिंगथ्रश चिड़ियों की मोत हो गई। लोगों ने चिड़ियों के किसी संक्रमण से मरने की आशंका जताते हुए इन्हें दफना दिया है। इन चिड़ियों के किसी जहरीली चीज के खा लेने से मौत का अनुमान लगाया जा रहा है।
शुक्रवार सुबह हिमालया पब्लिक स्कूल के पास जंगल में 50 से अधिक चिड़ियां मृत मिलीं, जबकि कुछ पक्षी जमीन पर तड़प रहीं थीं। इन्हें बचाने के लिए लोग कुछ करते, इससे पहले ही इन्होंने भी दम तोड़ दिया। वहां मौजूद लोगों ने इन पक्षियों के किसी संक्रामक बीमारी से मरने की आशंका जताते हुए सभी को दफना दिया।
इकोलॉजिस्ट के. रामनारायण ने बताया कि मृत चिड़िया व्हाइट थ्रोटेड लाफिंगथ्रश हैं। ये 50 से 100 तक के झुंड में रहती हैं। घरों के आसपास भी झुंड में दिखाई देती हैं और बहुत चहचहाती हैं। गले के नीचे का कुछ भाग सफेद और नीचे का हिस्सा ओरेंज कलर का होता है। उन्होंने बताया कि यह चिड़ियां विलुप्त प्राय नहीं है। यह पक्षी दाना चुगने के लिए आबादी के निकट भी आते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कोई जहरीला पदार्थ खाने से इनकी मौत हुई है।
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बेड़ीनाग के रेंजर मनोज सनवाल का कहना है कि इस मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। कल मौके पर जाकर जांच की जाएगी।
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शुक्रवार सुबह हिमालया पब्लिक स्कूल के पास जंगल में 50 से अधिक चिड़ियां मृत मिलीं, जबकि कुछ पक्षी जमीन पर तड़प रहीं थीं। इन्हें बचाने के लिए लोग कुछ करते, इससे पहले ही इन्होंने भी दम तोड़ दिया। वहां मौजूद लोगों ने इन पक्षियों के किसी संक्रामक बीमारी से मरने की आशंका जताते हुए सभी को दफना दिया।
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इकोलॉजिस्ट के. रामनारायण ने बताया कि मृत चिड़िया व्हाइट थ्रोटेड लाफिंगथ्रश हैं। ये 50 से 100 तक के झुंड में रहती हैं। घरों के आसपास भी झुंड में दिखाई देती हैं और बहुत चहचहाती हैं। गले के नीचे का कुछ भाग सफेद और नीचे का हिस्सा ओरेंज कलर का होता है। उन्होंने बताया कि यह चिड़ियां विलुप्त प्राय नहीं है। यह पक्षी दाना चुगने के लिए आबादी के निकट भी आते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कोई जहरीला पदार्थ खाने से इनकी मौत हुई है।
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बेड़ीनाग के रेंजर मनोज सनवाल का कहना है कि इस मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। कल मौके पर जाकर जांच की जाएगी।