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जब बेटियां बचाईं है, तभी तो मेडल लाई हैं
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 20 Aug 2016 10:18 PM IST
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ओलंपिक पदक विजेता को बधाई देती देवलथल की बालिकाएं
- फोटो : अमर उजाला
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सवा सौ करोड़ के देश को ओलंपिक में दो पदक वह भी बेटियों के। इस हकीकत ने सीमांत की बेटियों को भी जोश से लवरेज कर दिया है। देवलथल महिला जागृति मंच की अध्यक्ष प्रेमा बसेड़ा के नेतृत्व में बालिकाओं ने शिंधु, साक्षी को बधाई देने के साथ ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, खिलाड़ी बनाओ का संदेश दिया।
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बसेड़ा की अगुवाई में सड़क पर निकली देवलथल की बेटियां हाथों में ‘जब बेटियां बचाई हैं तभी तो भारत की 130 करोड़ जनता के लिए मेडल लाई हैं’ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी को खेलाओ’ की तख्तियां थामे थी। सिंधु और साक्षी के सम्मान में नारे लगा रही बालिकाओं का कहना था कि बेटियों को संरक्षण मिले तो वह हर क्षेत्र में बुलंदियों को छूने में सक्षम हैं। मंच की अध्यक्ष श्रीमती बसेड़ा ने कहा कि भारत की बेटियों ने दिखा दिया है कि वह भी किसी से कम नहीं। बसेड़ा ने लोगों से बेटियों के लालन-पालन में किसी प्रकार की कसर न छोड़ने की अपील की।
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