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25 दिन से पानी की आपूर्ति ठप
Wed, 03 Apr 2019 11:01 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Wed, 03 Apr 2019 11:01 PM IST
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ठूलीगाड़ पंपिंग योजना। अ
- फोटो : अमर उजाला
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बारहमासी सड़क के मलबे से घाट पंपिंग योजना के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पिछले 25 दिनों से पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है। घाट पंपिंग योजना के बंद होने से रई, विण और बस्ते सहित नगर के कुछ हिस्सों में लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। इस समय आंवलाघाट और ठूलीगाड़ पंपिंग योजना से पानी की आपूर्ति हो रही है।
एक लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ शहर और आसपास के गांवों के उपभोक्ताओं के लिए प्रतिदिन 11.50 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि घाट पंपिंग योजना, ठूलीगाड़ और आंवलाघाट पंपिंग योजनाओं से इतना पानी नहीं मिल पा रहा है। घाट से 2.50 एमएलडी, ठूलीगाड़ से तीन एमएलडी जबकि 12 एमएलडी की क्षमता वाली आंवलाघाट से केवल पांच से छह एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है। घाट पंपिंग योजना के पाइप बारहमासी सड़क के मलबे और बोल्डरों में दबने से बार-बार टूट रहे हैं। अब तक कई स्थानों पर योजना के पाइप बदले जा चुके हैं। यह योजना पाइप मलबे में दबने से पिछले 25 दिनों से खराब पड़ी है। हजारों टन मलबे में दबे पाइपों को निकालने में विभाग के पसीने छूट रहे हैं। पंपिंग योजना से ढाई एमएलडी पानी की आपूर्ति बंद होने से नगरवासियों को जरूरत का पानी नहीं मिल रहा है। जल संस्थान रई, विण और बस्ते सहित नगर के कुछ हिस्सों में एक दिन छोड़कर उपभोक्ताओं को पेयजल उपलब्ध करा रहा है। तिलढुकरी में पानी की आपूर्ति अनियमित है। इसके चलते अधिकांश लोग परेशान हैं। लोग जल धारों, नौलों या हैंडपंपों से जरूरत का पानी जुटा रहे हैं। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि मलबे में अधिक गहराई में होने से पाइप लाइन दुरुस्त करने में समय लग रहा है। जेसीबी से मलबा हटाने के बाद ही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन की मरम्मत की जाएगी।
गर्मियों में करना पड़ सकता है गंभीर जल संकट का सामना
लगभग 76 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी आंवलाघाट पंपिंग योजना से पिथौरागढ़ शहर को जरूरत का पानी नहीं मिल सका। शुरू से ही विवादों में रही 12 एमएलडी की इस योजना में मात्र पांच से छह एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। गर्मियों में स्रोतों में पानी की कमी के कारण आपूर्ति में भी कमी आती है। नगर की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। कई स्थानों पर पाइप लाइनें टूटी हैं। शहर की नई कॉलोनियों में पेयजल योजना नहीं बिछाई गई है। यहां सभी परिवार निजी हैंडपंपों या परंपरागत जल स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। गर्मियों में अधिकांश हैंडपंप सूख जाते हैं और नौले-धारों में भी पानी की कमी हो जाती है। यदि जल संस्थान ने समय रहते पेयजल योजनाओं का सुधार कर पानी की आपूर्ति सुचारु नहीं की तो गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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.........कोट
- मलबा गिरने से घाट पंपिंग योजना के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पाइप मलबे में काफी गहराई में दबे हैं। मलबा हटाया जा रहा है। शीघ्र ही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को दुरुस्त कर लिया जाएगा। इस समय आंवलाघाट और ठूलीगाड़ पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
- अशोक कुमार, ईई जल संस्थान पिथौरागढ़।
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एक लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ शहर और आसपास के गांवों के उपभोक्ताओं के लिए प्रतिदिन 11.50 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि घाट पंपिंग योजना, ठूलीगाड़ और आंवलाघाट पंपिंग योजनाओं से इतना पानी नहीं मिल पा रहा है। घाट से 2.50 एमएलडी, ठूलीगाड़ से तीन एमएलडी जबकि 12 एमएलडी की क्षमता वाली आंवलाघाट से केवल पांच से छह एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है। घाट पंपिंग योजना के पाइप बारहमासी सड़क के मलबे और बोल्डरों में दबने से बार-बार टूट रहे हैं। अब तक कई स्थानों पर योजना के पाइप बदले जा चुके हैं। यह योजना पाइप मलबे में दबने से पिछले 25 दिनों से खराब पड़ी है। हजारों टन मलबे में दबे पाइपों को निकालने में विभाग के पसीने छूट रहे हैं। पंपिंग योजना से ढाई एमएलडी पानी की आपूर्ति बंद होने से नगरवासियों को जरूरत का पानी नहीं मिल रहा है। जल संस्थान रई, विण और बस्ते सहित नगर के कुछ हिस्सों में एक दिन छोड़कर उपभोक्ताओं को पेयजल उपलब्ध करा रहा है। तिलढुकरी में पानी की आपूर्ति अनियमित है। इसके चलते अधिकांश लोग परेशान हैं। लोग जल धारों, नौलों या हैंडपंपों से जरूरत का पानी जुटा रहे हैं। जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि मलबे में अधिक गहराई में होने से पाइप लाइन दुरुस्त करने में समय लग रहा है। जेसीबी से मलबा हटाने के बाद ही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन की मरम्मत की जाएगी।
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गर्मियों में करना पड़ सकता है गंभीर जल संकट का सामना
लगभग 76 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी आंवलाघाट पंपिंग योजना से पिथौरागढ़ शहर को जरूरत का पानी नहीं मिल सका। शुरू से ही विवादों में रही 12 एमएलडी की इस योजना में मात्र पांच से छह एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। गर्मियों में स्रोतों में पानी की कमी के कारण आपूर्ति में भी कमी आती है। नगर की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। कई स्थानों पर पाइप लाइनें टूटी हैं। शहर की नई कॉलोनियों में पेयजल योजना नहीं बिछाई गई है। यहां सभी परिवार निजी हैंडपंपों या परंपरागत जल स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। गर्मियों में अधिकांश हैंडपंप सूख जाते हैं और नौले-धारों में भी पानी की कमी हो जाती है। यदि जल संस्थान ने समय रहते पेयजल योजनाओं का सुधार कर पानी की आपूर्ति सुचारु नहीं की तो गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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- मलबा गिरने से घाट पंपिंग योजना के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पाइप मलबे में काफी गहराई में दबे हैं। मलबा हटाया जा रहा है। शीघ्र ही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को दुरुस्त कर लिया जाएगा। इस समय आंवलाघाट और ठूलीगाड़ पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
- अशोक कुमार, ईई जल संस्थान पिथौरागढ़।