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ब्लॉक प्रमुख के अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं हुआ मतदान

Thu, 12 Oct 2017 10:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Thu, 12 Oct 2017 10:09 PM IST
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Voting on block chief's no-confidence motion
धारचूला के ब्लाक सभागार में पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला

धारचूला के कांग्रेसी ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बृहस्पतिवार को मतदान नहीं हो पाया। पीठासीन अधिकारी के अचानक बीमार होने के कारण प्रशासन ने ऐनवक्त पर मतदान नहीं कराने का फैसला लिया। जिलाधिकारी सी रविशंकर का कहना है कि यदि मतदान के लिए एक पीठासीन अधिकारी नियुक्त हो जाता है तो उसे बदला नहीं जा सकता। मतदान के लिए पुलिस-प्रशासन के सारे इंतजाम धरे रह गए और जिले के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे भाजपा, कांग्रेस के कार्यकर्ता अपरान्ह चार बजे बाद लौट गए। साथ ही अन्य थानों से यहां पहुंचा फोर्स भी लौट गया है।

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ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश होते ही प्रशासन ने मतदान के लिए 12 अक्तूबर की तिथि तय कर दी और पिथौरागढ़ के एसडीएम सदर एसके पांडे को पीठासीन अधिकारी बनाया। पीठासीन अधिकारी बुधवार रात यहां पहुंच गए थे। प्रशासन ने मतदान केंद्र में बेरिकेडिंग कर दी थी और सुबह 11 बजे से मतदान की तैयारी भी कर दी, लेकिन उसी बीच जानकारी मिली कि पीठासीन अधिकारी बीमार हो गए हैं और उनको मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराने के बजाय पिथौरागढ़ जिला अस्पताल ले जाया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि पांडे का रक्तचाप अचानक बढ़ गया है और उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। उनको जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। डीएम खुद भी एसडीएम का हालचाल जानने अस्पताल गए।
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इधर, मतदान की प्रक्रिया से पहले ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर ब्लॉक सभागार में पहुंच गए थे, लेकिन अपरान्ह चार बजे तक पक्ष और विपक्ष का कोई भी सदस्य ब्लॉक सभागार में नहीं गया। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पुलिस अधीक्षक अजय जोशी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने शांति व्यवस्था और ऐहतियातन नगर में वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया था। डीडीहाट के एसडीएम विवेक प्रकाश को अतिरिक्त व्यवस्था के लिए यहां तैनात कर दिया गया।
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जिलाधिकारी ने पंचायतीराज एक्ट के नियमों का हवाला देते हुए बताया कि स्थगित तिथि से 25 दिन के भीतर फिर से मतदान कराना अनिवार्य होता है। इसीलिए प्रशासन ने पांच नवंबर की तिथि तय कर दी है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार का मतदान स्थगित कर दिया गया है। 

अब भाजपा, कांग्रेस नई रणनीति में लगे
अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि आगे खिसक जाने के कारण भाजपा और कांग्रेस को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ गई है। कांग्रेस ने अपने एक सदस्य की सदस्यता को हाइकोर्ट से स्थगनादेश लेकर बचा दी थी, लेकिन अब भाजपा इसके खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि हाइकोर्ट में फिर से अपील करने पर रांथी के क्षेत्र पंचायत सदस्य मान सिंह की सदस्यता समाप्त होती है तो उनका पक्ष मजबूत हो जाएगा। कांग्रेस भी यही रणनीति बनाने में लगी है कि किसी तरह मान सिंह की सदस्यता को बरकरार रखा जाए। भाजपा जिला महामंत्री महेंद्र बुदियाल का कहना है कि मान सिंह को सिर्फ स्थगनादेश मिला है। अभी भाजपा भी इस मामले में अपील करेगी। कांग्रेस विधायक हरीश धामी का कहना है कि मान सिंह का सदस्यता को बचाए रखने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। अब भी ब्लॉक प्रमुख पद का संशय समाप्त नहीं हुआ है और पांच नवंबर तक उतार-चढ़ाव जारी रहेंगे।


सदस्यों के पाला बदलने का संकट
भाजपा और कांग्रेस के सामने एक बार फिर से अपने सदस्यों को एकजुट रखने की चुनौती आ गई है। 26 सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद से ही सदस्य दो खेमों में बंट गए थे। 12 अक्तूबर तक होने वाले मतदान तक दोनों दलों ने अपने खेमे के सदस्यों को किसी तरह घेरकर रखा था, लेकिन अब पांच नवंबर तक इन सदस्यों को घेरकर रखना होगा। इस समय क्षेत्र समिति में सदस्यों की संख्या 38 है। इनमें से 25 पर भाजपा और 13 पर कांग्रेस अपने समर्थन का दावा करती है।

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