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जिसके पास विकास का विजन होगा उसी को दिया जाएगा वोट
Wed, 27 Mar 2019 10:27 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Wed, 27 Mar 2019 10:27 PM IST
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कैंपस चर्चा: पिथौरागढ़ के लंदन फोर्ट में चुनावी चर्चा में शामिल युवा।
- फोटो : अमर उजाला
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लोक सभा चुनावों में राष्ट्रीय के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों को भी देखा जाना चाहिए। संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचने वाले सांसद की जिम्मेदारी भी तय होनी जरूरी है, जिसके पास विकास का विजन होगा उसी को लोक सभा चुनावों में वोट किया जाएगा।
कैंपस चुनाव चर्चा के दौरान बुधवार को पिथौरागढ़ के लंदन फोर्ट में आयोजित चर्चा में युवा मतदाताओं ने कहा कि चुनावों से पहले तमाम दावे किए जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद उन दावों को भुला दिया जाता है। सीमांत जिले के सड़क, संचार विहीन गांव इसके ताजा उदाहरण हैं। भारत युवाओं का देश है। युवाओं के बारे में सोचा जाना चाहिए। आज नौकरियां नहीं हैं। देश के किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कालेजों में प्रयोगशालाएं और पुस्तकें नहीं हैं। शिक्षकों की कमी है। जिस जनता की वोट लेकर सत्ता तक पहुंचे हैं उनकी मूलभूत जरूरतों का ध्यान रखने का फर्ज नेताओं को निभाना चाहिए, जबकि ऐसा होता नहीं है। युवाओं ने यहां तक कहा कि पिछले पांच साल में गांवों को गोद लेने का प्रचलन चला, लेकिन जो गांव गोद लिए गए उन्हीं गांवों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अन्य गांवों के विकास के बारे में कैसे सोचा जा सकता है।
युवाओं ने कहा कि लाखों-करोड़ों रोजगार देने, चुनाव जीतकर खातों में रुपये डालने जैसे दावे केवल चुनावी जुमले साबित हुए हैं। विदेशों में जमा काला धन नहीं आया। लोगों के खातों में15 लाख नहीं आए। केंद्र में जो भी सरकार आए योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन होना चाहिए। युवाओं ने कहा कि मूलभूत सुविधाएं देकर पलायन रोका जा सकता है।
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चर्चा में ये रहे शामिल
छात्र संघ अध्यक्ष राकेश जोशी, मीनाक्षी भट्ट, सोनी पिपलिया, लक्षिका पांडेय, जीतेंद्र भंडारी, सोनम जोशी, पूजा सामंत, सुनीता बिष्ट, सुमन राणा, विनीता जोशी, बबीता बिष्ट, नीलम जोशी, रोहन चंद्र, सौरभ कुमार, भूपेश बिष्ट, मनीषा सिरोला, यामिनी बिष्ट, रजनी बिष्ट, मेनका चंद।
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कैंपस चुनाव चर्चा के दौरान बुधवार को पिथौरागढ़ के लंदन फोर्ट में आयोजित चर्चा में युवा मतदाताओं ने कहा कि चुनावों से पहले तमाम दावे किए जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद उन दावों को भुला दिया जाता है। सीमांत जिले के सड़क, संचार विहीन गांव इसके ताजा उदाहरण हैं। भारत युवाओं का देश है। युवाओं के बारे में सोचा जाना चाहिए। आज नौकरियां नहीं हैं। देश के किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कालेजों में प्रयोगशालाएं और पुस्तकें नहीं हैं। शिक्षकों की कमी है। जिस जनता की वोट लेकर सत्ता तक पहुंचे हैं उनकी मूलभूत जरूरतों का ध्यान रखने का फर्ज नेताओं को निभाना चाहिए, जबकि ऐसा होता नहीं है। युवाओं ने यहां तक कहा कि पिछले पांच साल में गांवों को गोद लेने का प्रचलन चला, लेकिन जो गांव गोद लिए गए उन्हीं गांवों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अन्य गांवों के विकास के बारे में कैसे सोचा जा सकता है।
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युवाओं ने कहा कि लाखों-करोड़ों रोजगार देने, चुनाव जीतकर खातों में रुपये डालने जैसे दावे केवल चुनावी जुमले साबित हुए हैं। विदेशों में जमा काला धन नहीं आया। लोगों के खातों में15 लाख नहीं आए। केंद्र में जो भी सरकार आए योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन होना चाहिए। युवाओं ने कहा कि मूलभूत सुविधाएं देकर पलायन रोका जा सकता है।
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चर्चा में ये रहे शामिल
छात्र संघ अध्यक्ष राकेश जोशी, मीनाक्षी भट्ट, सोनी पिपलिया, लक्षिका पांडेय, जीतेंद्र भंडारी, सोनम जोशी, पूजा सामंत, सुनीता बिष्ट, सुमन राणा, विनीता जोशी, बबीता बिष्ट, नीलम जोशी, रोहन चंद्र, सौरभ कुमार, भूपेश बिष्ट, मनीषा सिरोला, यामिनी बिष्ट, रजनी बिष्ट, मेनका चंद।