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खेतार कन्याल में बंदरों ने तबाह की धान की फसल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 10:54 PM IST
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Villagers are seeing their hard work getting wasted in the fields
पिथौरागढ़। एक ओर सरकार खेतीबाड़ी बचाने और किसानों की आय दो गुना करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन्य जीवों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। डीडीहाट विकास खंड के खेतार कन्याल गांव में खेतों में खड़ी फसल बर्बाद करने से किसान व्यथित हैं। उन्होंने वन विभाग से सूचना के अधिकार अधिनियम में जानकारी लेनी चाही है कि वन्यजीवों के आतंक से फसलों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
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डीडीहाट के रौंतिस घाटी के खेत काफी उपजाऊ माने जाते हैं। कुछ वर्षों तक घाटी के खेतार कन्याल, खेतार भंडारी, किरौली, मौगड़ा, बसौरा, कूटाचौरानी, घुरपट्टा, बसेड़ी आदि गांवों में 10 हजार नाली से अधिक भूमि पर फसल लहलहाती थी। घनधूरा मृग अभ्यारण्य से लगे इस क्षेत्र में अब करीब तीन हजार नाली में ही फसल सिमट कर रह गई है। बंदरों, सुअरों अन्य वन्य जीवों ने फसल चौपट कर दी है।
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पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश कन्याल बताते हैं कि रौंतिस और भाड़ी गाड़ क्षेत्र के लगा सेरा बेहद उपजाऊ है। पूरे क्षेत्र में किसान धान की रोपाई करते हैं। उन्होंने बताया कि बंदरों ने धान, मड़ूवा की खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया है। कई जगहों पर पकने को तैयार धान की फसल खेतों में लंबी हो गई है। कन्याल ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के जरिए वन विभाग से खेती बचाने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। इस संबंध में जानकारी चाही है। उन्होंने कहा है कि फसल को बचाने के लिए काश्तकार बारी-बारी से पहरा दे रहे हैं। कहा कि यदि वन्य जीवों का आतंक इसी तरह बढ़ता रहा तो गांवों में खेती पूरी तरह चौपट हो जाएगी।
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- वन्य जीवों का आतंक काफी बढ़ गया है। सुबह से लेकर शाम तक कनस्तर बजा बंदरों को भगा कर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।
- त्रिलोक सिंह, काश्तकार ।
- धान की फसल काफी अच्छी हुई थी। बंदरों ने खेत तबाह कर दिए हैं। युवा दिनभर बंदर ही भगाने में रहते हैं। प्रवीन सिंह, काश्तकार
- 14 किमी दूर से आकर खेतार कन्याल में खेती कर रही हूं। बदंरों से खेती की रखवाली के लिए देविसोना में किराए पर कमरा लिया है। बंदरों ने खेती चौपट कर दी है। मोतिमा देवी, वनराजी

- बंदरों के आतंक से 50 प्रतिशत खेती करने योग्य भूमि बंजर हो गई है। जंगली जानवरों के आतंक से काश्तकार बेहद परेशान हैं। खेतीबाड़ी बचाने के लिए सरकार को ठोस पहल करनी होगी। महेश कन्याल, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य।
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