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Pithoragarh News: गांव से बना नगर, सुुविधाएं फिर भी नदारद
Sun, 12 Jan 2025 11:13 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 12 Jan 2025 11:13 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मुनस्यारी नगर पंचायत बनने के बाद यह पहला चुनाव है जब यहां की जनता पहला अध्यक्ष चुनेगी। अभी तक ग्राम सभा में शामिल मुनस्यारी नगर पंचायत तो बन गया लेकिन सुविधाओं के मामले में अभी तक गांव जैसे ही हालात हैं। यहां रहने वाली अधिकतर आबादी के पास जमीन तो है लेकिन अपने नाम पर नहीं है। नगर में कूड़ा प्रबंधन के इंतजाम तक नहीं हैं।
मुनस्यारी को पर्यटक और हिमनगरी कहा जाता है। यहां वर्षभर पर्यटक आते रहते हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। वर्तमान में कूड़ा निस्तारण और प्रबंधन जिला पंचायत के जिम्मे ही है भविष्य में यह नगर पंचायत के हवाले होगा ऐसे में कैसे कूड़ा निस्तारण होगा, यह भी समस्या है क्योंकि अभी तक न तो ट्रंचिंग ग्राउंड है और ना ही रीसाइकिलिंग की व्यवस्था है। नगर में साल 1971 की पेयजल लाइनें हैं। पार्किंग का प्रबंध नहीं है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ ही बाहर से आने वाले लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पर्यटन सीजन में व्यवस्थाएं बनाने में प्रशासन को भी खासी दिक्कतें पैदा होती हैं।
जमीन का मालिकाना हक नहीं होने से चिंतित हैं लोग
मुनस्यारी में अधिकतर लोगों के पास जमीन अपने नाम पर नहीं है। नगर बनने के बाद अब लोगों को घर या अन्य निर्माण कार्य करने के लिए प्लान पास कराना जरूरी होगा। बिना नक्शा पास किए लोग निर्माण कार्य नहीं करा सकेंगे। ऐसे में अब लोगों को डर सता रहा है कि यदि भविष्य में घर बनाना चाहें तो बिना जमीन नाम पर हुए कैसे निर्माण करा सकेंगे।
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आबादी के लिए नई पेयजल योजना तक नहीं
मुनस्यारी में धीरे-धीरे आबादी बढ़ रही है। पर्यटकों की आवाजाही के कारण यहां पर होटल सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं। पानी की कमी भी एक प्रमुख समस्या है। नगर में चल रही 1971 की पेयजल योजना पर निर्भरता है। लगभग 1.75 करोड़ की योजना का मामला कोर्ट में होने के चलते पिछले तीन वर्षों से लंबित है। ऐसे में अक्सर पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है।
नगर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्थित करना और पार्किंग की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए अनुभवी और संवेदनशील व्यक्ति का नगर पंचायत की कुर्सी पर होना अति आवश्यक है।- मीना निखुर्पा, सरमोली वार्ड निवासी।
नगर की पेयजल व्यवस्था में सुधार करना और लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिलाना अहम है। मुनस्यारी पर्यटन नगरी के नाम से विख्यात है। इसलिए पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही मूलभूत समस्याओं का विकास जरूरी है।- विनोद पांगती, व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष
पहली बार बने नगर पंचायत में विकास का खाका खींचने की अहम जिम्मेदारी नए अध्यक्ष की होगी क्योंकि जैसा पहला अध्यक्ष तय करेगा उसी के अनुसार आगे चीजें तय होंगी। - छत्र सिंह खत्री, अंबेडकर वार्ड निवासी।
अभी फड़ खोखों से भी मुनस्यारी में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग आजीविका चलाते हैं। नगर बनने के बाद फड़ खोखा व्यवसायियों का क्या भविष्य होगा इसको लेकर चिंतित हैं। -तुला राम, अंबेडकर वार्ड निवासी।
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मुनस्यारी को पर्यटक और हिमनगरी कहा जाता है। यहां वर्षभर पर्यटक आते रहते हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। वर्तमान में कूड़ा निस्तारण और प्रबंधन जिला पंचायत के जिम्मे ही है भविष्य में यह नगर पंचायत के हवाले होगा ऐसे में कैसे कूड़ा निस्तारण होगा, यह भी समस्या है क्योंकि अभी तक न तो ट्रंचिंग ग्राउंड है और ना ही रीसाइकिलिंग की व्यवस्था है। नगर में साल 1971 की पेयजल लाइनें हैं। पार्किंग का प्रबंध नहीं है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ ही बाहर से आने वाले लोगों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पर्यटन सीजन में व्यवस्थाएं बनाने में प्रशासन को भी खासी दिक्कतें पैदा होती हैं।
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जमीन का मालिकाना हक नहीं होने से चिंतित हैं लोग
मुनस्यारी में अधिकतर लोगों के पास जमीन अपने नाम पर नहीं है। नगर बनने के बाद अब लोगों को घर या अन्य निर्माण कार्य करने के लिए प्लान पास कराना जरूरी होगा। बिना नक्शा पास किए लोग निर्माण कार्य नहीं करा सकेंगे। ऐसे में अब लोगों को डर सता रहा है कि यदि भविष्य में घर बनाना चाहें तो बिना जमीन नाम पर हुए कैसे निर्माण करा सकेंगे।
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आबादी के लिए नई पेयजल योजना तक नहीं
मुनस्यारी में धीरे-धीरे आबादी बढ़ रही है। पर्यटकों की आवाजाही के कारण यहां पर होटल सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं। पानी की कमी भी एक प्रमुख समस्या है। नगर में चल रही 1971 की पेयजल योजना पर निर्भरता है। लगभग 1.75 करोड़ की योजना का मामला कोर्ट में होने के चलते पिछले तीन वर्षों से लंबित है। ऐसे में अक्सर पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है।
नगर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्थित करना और पार्किंग की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए अनुभवी और संवेदनशील व्यक्ति का नगर पंचायत की कुर्सी पर होना अति आवश्यक है।- मीना निखुर्पा, सरमोली वार्ड निवासी।
नगर की पेयजल व्यवस्था में सुधार करना और लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिलाना अहम है। मुनस्यारी पर्यटन नगरी के नाम से विख्यात है। इसलिए पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही मूलभूत समस्याओं का विकास जरूरी है।- विनोद पांगती, व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष
पहली बार बने नगर पंचायत में विकास का खाका खींचने की अहम जिम्मेदारी नए अध्यक्ष की होगी क्योंकि जैसा पहला अध्यक्ष तय करेगा उसी के अनुसार आगे चीजें तय होंगी। - छत्र सिंह खत्री, अंबेडकर वार्ड निवासी।
अभी फड़ खोखों से भी मुनस्यारी में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग आजीविका चलाते हैं। नगर बनने के बाद फड़ खोखा व्यवसायियों का क्या भविष्य होगा इसको लेकर चिंतित हैं। -तुला राम, अंबेडकर वार्ड निवासी।