फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Valture In Pithauragarh

कनारी पाभैं की पहाड़ियों में दिखा हिमालयी गिद्ध

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 12:08 AM IST
विज्ञापन
Valture In Pithauragarh
पिथौरागढ़ के सुदूर इलाके में नजर आया हिमालयी गिद्ध। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। नगर से लगी कनारी पाभैं की पहाड़ियों पर हिमालयी गिद्ध दिखाई दिया है। हिमालयी गिद्ध दिखने से पक्षी प्रेमी का काफी उत्साहित हैं। विशेषकर ये उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। बताया जाता है कि 1980 के दशक में इनकी देश में संख्या लाखों में थी, लेकिन आज ये कुछ हजार ही बचे हैं।
विज्ञापन

हिमालयी गिद्ध का आकार 115 सेंटीमीटर से 125 सेंटीमीटर होता है। कनारी पाभैं की पहाड़ियों पर ये बड़ी संख्या में देखे गए हैं। ऊंचे क्षेत्रों में पाए जाने वाले हिमालयी गिद्ध का मूल स्थान तिब्बत, नेपाल, भूटान और चीन है। इसके सिर पर पीलापन और गले पर श्वेत रोम और चहुंओर नुकीले परों की कंठी होती है। पीठ के ऊपर भूरे रंग की धारियां होती हैं।
विज्ञापन

निचला भाग तनुरा और टांगे मटमैली होती हैं। सूक्ष्म कीड़ों से लेकर बड़े स्तनधारी पशुओं के शव तक खाने वाला यह पक्षी प्रकृति का स्वच्छकार माना जाता है। इस पक्षी के प्रजनन का समय दिसंबर से मार्च तक होता है। ये एक ही जोड़ा बनाते हैं। यह जोड़ा साल दर साल एक ही घोंसले वाली जगह पर बार-बार आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नर और मादा मिलकर चूजों को पालते हैं। मादा एक ही अंडा देती है। इसके अंडों का आकार 3.75 से 2.5 इंच होता है। गिद्ध की यह प्रजाति भी धीरे-धीरे कम हो रही है। इसकी औसत आयु 25 से 35 वर्ष तक होती है।
शिकार नहीं मरे पशु, पक्षियों का करता है भोजन
सरमोली गांव मुनस्यारी के पक्षी विशेषज्ञ त्रिलोक राणा मानते हैं कि पिछले कुछ सालों में इनकी संख्या तेजी से घटी है। हिमालयी गिद्ध के निचले क्षेत्रों में दिखना अच्छा संकेत है। ये शीत ऋतु का प्रवासी पक्षी हैं। इसे काफी कम दिखाई देता है।
हिमालयी गिद्ध मांसाहारी होता है और ये खुद किसी का शिकार नहीं करता बल्कि ये मरे पशु-पक्षियों का मांस खाकर भूख मिटाता है। ये पर्यावरण से गंदगी को काफी तेजी से साफ करते हैं।

वैज्ञानिक नाम : जिप्स हिमालयेंसिस
उच्च वर्गीकरण : ग्रिफॉन वल्चर
हिमालय गिद्ध समुद्र तल से 500 मीटर से पांच हजार मीटर तक की ऊंचाई पर पाया जाता है। पहले ये बड़ी संख्या में दिखाई देते थे, अब इनकी संख्या में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। हिमालयन ग्रिफॉन पर्यावरण में स्वच्छता बनाए रखते हैं, इनका दिखना अच्छा संकेत है। -डॉ. विनय भार्गव, डीएफओ पिथौरागढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed