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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Twenty-four hours after the open-Pithoragarh highway Twagat

चौबीस घंटे बाद खुला पिथौरागढ़-तवाघाट हाइवे

Mon, 18 Jul 2016 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Mon, 18 Jul 2016 10:42 PM IST
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Twenty-four hours after the open-Pithoragarh highway Twagat
चौबीस घंटे बाद खुला पिथौरागढ़-तवाघाट हाइवे - फोटो : अमर उजाला

पिथौरागढ़-तवाघाट एनएच पूरे 24 घंटे बाद सोमवार को अपराह्न एक बजे खुला। सड़क बंद होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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पिथौरागढ़ से मदकोट और बंगापानी के लिए राशन ले जा रहे ट्रक भी 24 घंटे तक बगड़ीहाट में फंसे रह गए। सीमा सड़क संगठन ने रविवार को देर रात तक काम किया। इस रोड में तीन स्थानों पर एक साथ मलबा गिरने से बीआरओ के अधिकारी भारी मुसीबत में आ गए। बगड़ीहाट, खिरचना और गुड़ौली में लगातार दो-दो बुलडोजर लगाकर सड़क खोलने का काम किया गया। बीआरओ के द्वितीय कमान अधिकारी आरबी अग्रवाल ने बताया कि एक साथ कई जगह सड़क बंद होने से व्यवस्था बनाने में दिक्कत पेश आ गई। सोमवार  सुबह से बारिश की रफ्तार कम होते ही मलबा हटाने का काम तेज किया गया।
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सातशिलिंग-थल मोटर मार्ग की हालत सबसे ज्यादा खराब है। इस रोड में सिल, लेकघाटी और सूनी के पास सड़क बुरी तरह धंस गई है। इस सड़क पर दो दिन से वाहनों की आवाजाही बंद है। रोड बंद होने से बेड़ीनाग, बागेश्वर जाने वालों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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पिथौरागढ़ से थल के रास्ते मुनस्यारी जाने वालों को भी जौलजीबी के रास्ते घूमकर जाना पड़ रहा है। थल-मुनस्यारी रोड खुली है। मुनस्यारी से जौलजीबी जाने वाली सड़क घिंघरानी के पास आज कुछ देर तक बंद रही लेकिन बाद में यातायात सामान्य हो गया। थल से डीडीहाट जाने वाली सड़क में भी यातायात शुरू हो गया है। जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़क यातायात बहाल रखने के लिए पूरी कोशिश की जाए। इसके लिए अतिरिक्त संसाधन भी जुटाए जाएं। 

महाकाली का खतरा अभी बरकरार
 धारचूला में महाकाली उफान पर है। सोमवार को नदी का जलस्तर 888.7 मीटर रहा। महाकाली में खतरे का निशान 890 मीटर पर है। गोरी का जलस्तर 605 मीटर रहा। गोरी में खतरे का निशान 607.8 मीटर पर है। सरयू में आज पानी का स्तर 448.6 मीटर रहा। सरयू में खतरे का निशान 453 मीटर पर है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बारिश की रफ्तार कम होते ही नदियों का जलस्तर भी कम होने लग जाएगा। फिलहाल सतर्कता बरती जा रही है और लोगों से नदियों के किनारे नहीं जाने की अपील की गई है।

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