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खतरनाक पुल से जान हथेली में रखकर आवागमन

Mon, 06 Mar 2017 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)। Updated Mon, 06 Mar 2017 10:34 PM IST
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Traffic in the palm, placing the lives of dangerous bridge
पुल - फोटो : अमर उजाला

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गोरघटिया नदी पर 1990 में बनाया गया गार्डर का पुल अब इतनी खतरनाक हालत में पहुंच गया है कि वह किसी भी समय बड़ी घटना का कारण बन सकता है। पुल पर लगाया सीमेंट उखड़ गया है और लोगों ने पुल पर बने गड्ढों को ढंकने के लिए पत्थर तथा लकड़ी भर दी है। यह लकड़ी भी अब सड़ने लगी है। लोक निर्माण विभाग के किसी भी अधिकारी ने अब तक इस पैदल पुल का निरीक्षण नहीं किया।

गोरघटिया में बने इस पैदल पुल से डांगीगांव, पुरानाथल, रूईनाथल, जाजर, गंगोरा कोटीला, हरड़ी, बाननी, बड़ेत, लिकतड़, माछीखेत, गड़तिर, तोराथल, बलगड़ी, भनेला, चौपाता गांवों के लोग थल और बेड़ीनाग जाते समय आवाजाही करते हैं। पुल को बनाने के बाद उसकी देखरेख नहीं की गई।
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गांव के लोगों ने पुल का सीमेंट उखड़ने के बाद कई बार लोनिवि को यह सूचना दी, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। जब विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया तो क्षेत्र के लोगों ने पुल पर बने गड्ढों को पाटने के लिए पत्थर और लकड़ी भर दी। यह लकड़ी भी अब सड़ने लगी है। लोनिवि के सहायक अभियंता डीसी पांडे ने कहा कि जल्दी ही पुल की स्थिति देखी जाएगी और मरम्मत का प्रस्ताव बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए धन मिलने के बाद तत्काल काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक विभाग की टीम ने पुल का निरीक्षण नहीं किया है।
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धांधली की जांच होनी चाहिए
निवासी ललित सिंह का कहना है कि यदि पुल पर मजबूत सामग्री लगी होती तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि पुल की मरम्मत के साथ साथ इसके निर्माण की गई धांधली की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को जान हथेली पर रखकर पुल पार करना पड़ता है। अब तक किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।


यह अंधेरगर्दी का गंभीर नमूना
स्थानीय निवासी शमशेर बाफिला का कहना है कि यह अंधेरगर्दी का नमूना है। शिकायत करने पर भी कार्रवाई न होना ज्यादा लापरवाही है। वह कहते हैं कि शायद विभाग को किसी बड़ी घटना का इंतजार है। अन्यथा अब तक पुल की मरम्मत हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की जांच के लिए सरकार को पत्र लिखेंगे।
 
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